नई दिल्ली। देशभर में बहुत से ऐसे मंदिर हैं जहां पर वीआईपी दर्शन की व्यवस्था है। वीआईपी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पैसे देकर भीड़ से अलग दर्शन करने की सुविधा मिलती है। हिंदू मंदिरों में पैसे देकर वीआईपी दर्शन वाली इस व्यवस्था पर मद्रास हाईकोर्ट ने सवाल उठाया है।
एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट बेंच ने कहा कि भगवान के लिए सभी एक समान हैं, चाहे वो कोई मंत्री हो या आम आदमी। कोर्ट ने कहा कि विधायकों या मंत्रियों या अन्य वीवीआईपी लोगों को यह नहीं सोचना चाहिए कि वो कभी भी मंदिर में प्रवेश कर दर्शन कर सकते हैं।
अदालत ने पैसे लेकर मंदिरों में जल्दी और सुगम दर्शन कराए जाने वाली सुविधा पर चिंता जताते हुए इसे भेदभावपूर्ण करार दिया। कोर्ट ने सवाल किया कि आखिर के दर्शन के लिए वीआईपी व्यवस्था की क्या आवश्यकता है? अदालत ने यह भी तर्क दिया कि मस्जिदों और चर्च में इस प्रकार के कोई प्रथा नहीं अपनाई जाती, तो फिर मंदिरों में ही ऐसी व्यवस्था क्यों लागू की गई है। कोर्ट ने उस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को बंद करने से मंदिरों को मिलने वाले राजस्व की हानि होगी।
विश्व हिंदू परिषद के नेता ने दायर की है याचिका
बता दें कि विश्व हिंदू परिषद की तमिलनाडु इकाई के नेता पी. चोकलिंगम की ओर से दायर याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि तमिलनाडु की विजय सरकार में मंत्री निर्मल कुमार हाल ही में तिरुपरनकुंड्रम स्थित मंदिर में दर्शन करने गए थे। उनके दर्शन के लिए मंदिर प्रशासन ने आम लोगों का दर्शन रोक दिया था और जब मंत्री ने दर्शन कर लिए तब उसके बाद आम लोगों के लिए मंदिर खोला गया। याचिकाकर्ता ने वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों और संवैधानिक अधिकारियों को छोड़कर वीआईपी दर्शन की व्यवस्था खत्म करने की मांग की है।

