नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपियों ने मंदिर के नाम से फर्जी रसीद बुक छपवाई थी और इसी के जरिए श्रद्धालुओं से चढ़ावा और चंदा वसूलते थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने फर्जी रसीद बुक जब्त की है। गिरफ्तार आरोपी दान देने वाले श्रद्धालुओं को यही फर्जी रसीद देते थे। चंदा चोरी मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों में से अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र और करुणेश पांडे की कस्टडी पुलिस ने ली है। इससे पहले अविनाश शुक्ला को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी।
बताया जा रहा है कि पुलिस पूछताछ ने इन आरोपियों ने यह बात कबूल की है कि जब भी कोई श्रद्धालु मंदिर में दान देने की इच्छा व्यक्त करता था तो ये लोग उससे दान की रकम या सोना चांदी जो भी वो देता था लेकर, रिसीविंग के तौर पर फर्जी रसीद दे देते थे। यह फर्जी रसीद राम मंदिर की असली रसीद से काफी हद तक मिलती जुलती है और इसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का लोगो भी बना है। इसी वजह से दान दाताओं को शक नहीं होता था। यह भी खुलासा हुआ है कि 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर सूनसान जगह पर आरोपी आपस में दान के पैसों का बंटवारा करते थे।
पुलिस को पता चला है कि चंदे चोरी की रकम से अनुकल्प मिश्रा ने स्विफ्ट डिजायर कार खरीदी थी, उसने एक स्कॉर्पियो की बुकिंग भी की थी। जबकि दूसरे लवकुश मिश्रा ने अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर जमीन खरीदी थी, जिस पर वो तीन मंजिला मकान बनवा रहा था। तीन सदस्यीय एसआईटी इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। एसआईटी अपनी प्रारम्भिक रिपोर्ट पहले ही प्रदेश सरकार को सौंप चुकी है। जांच के आगे बढ़ने के साथ ही इस मामले में और भी कई बातें सामने आने की संभावना है।

