अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में भगवान रामलला के मंदिर में चंदा चोरी मामले में एसआईटी के साथ ही पुलिस की जांच भी तेज हो गई है। अयोध्या पुलिस ने राम मंदिर में चंदा चोरी के गिरफ्तार 8 आरोपियों में से अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र और करुणेश पांडे की कस्टडी ली है।
अयोध्या कोर्ट ने मंगलवार को इन तीन आरोपियों को पुलिस कस्टडी में देने का आदेश दिया था। इन सबको अयोध्या पुलिस बुधवार सुबह अयोध्या जेल से लेकर गई। इससे पहले रविवार को अयोध्या पुलिस ने जेल जाकर राम मंदिर चंदा चोरी केस के 5 आरोपियों के कई घंटे पूछताछ की थी।
जेल में आरोपियों से पूछताछ के बाद ही पुलिस ने अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे की कस्टडी के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। इससे पहले पुलिस ने चंदा चोरी के एक और आरोपी अविनाश शुक्ल को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। इस पूछताछ के बाद पुलिस सूत्रों के हवाले से खबर आई थी कि राम मंदिर चंदा चोरी के सभी आरोपी एक सुनसान जगह जाकर रकम का बंटवारा करते थे। राम मंदिर चंदा चोरी केस का मामला सामने आने के बाद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ मंडल के कमिश्नर की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की थी। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें ट्रस्ट से जुड़े रहे डॉ. अनिल मिश्र की ओर अंगुली उठी है। ऐसे में अनिल मिश्र के लिए आने वाले दिन भारी हो सकते हैं।
चंपत राय और अनिल मिश्र की फाइल फोटो।वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय का एसआईटी को दिया बयान मंगलवार को लीक हुआ था। इस बयान में चंपत राय ने कहा है कि चंदे के रकम की गिनती के लिए स्टेट बैंक से अनिल मिश्र ने एमओयू किया था। जबकि, पहले हर एमओयू पर वो दस्तखत करते थे। चंपत राय ने बयान में साफ कहा है कि स्टेट बैंक के अफसरों और अनिल मिश्र ने चंदे के रकम की गिनती के लिए तय हुई एसओपी का पालन नहीं किया। उनका ये भी कहना है कि एमओयू होने की जानकारी उनको जून के महीने में हुई।

