नई दिल्ली। मेडिकल एंट्रेस टेस्ट नीट यूजी पेपर लीक मामले में सुनवाई करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है जो लाखों स्टूडेंट्स के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए पेपर लीक के असली आरोपी की पहचान होनी बहुत जरूरी है।
कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से हलफनामा मांगा है जिसमें इस बात का पूरा ब्योरा हो कि एनटीए में ऐसे कौन से सुधार लागू किए जाएं जिससे नीट परीक्षा को सुरक्षित बनाया जा सके। वहीं केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में उचित कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिलाते हुए बताया है कि पीएम नरेंद्र मोदी खुद इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया आखिर बार-बार पेपर लीक कैसे हो रहे हैं? इसकी जवाबदेही तय करनी पड़ेगी। हम स्टूडेंट्स को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने केंद्र सरकार और एनटीए को छह सप्ताह के अंदर अपनी कार्ययोजना पेश करने का निर्देश दिया है। समिति ने अदालत के सामने इस बात को स्वीकार किया कि परीक्षा प्रणाली में डोमेन विशेषज्ञों की भारी कमी थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति और सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।
सर्वोच्च न्यायालय की बेंच ने कहा कि सिर्फ सिफारिशें बनाना ही काफी नहीं है, उन सिफारिशों की निगरानी करना और उनको लागू करने की प्रक्रिया कितनी मजबूत है यह आवश्यक है। आपको बता दें कि 3 मई को नीट यूजी 2026 की परीक्षा हुई थी। पेपर लीक की खबरों के बाद 12 मई को परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया था। अब 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा होनी है। केंद्र सरकार ने अभ्यर्थियों को राहत देते हुए उनसे दोबारा परीक्षा की कोई फीस नहीं ली है और जो फीस उन्होंने पहली परीक्षा के लिए दी थी उसे भी वापस की जा रही है।

