नई दिल्ली। भारत में लेन-देन के लिए यूपीआई का काफी इस्तेमाल होता है। जुलाई 2026 में ही यूपीआई के जरिए करीब 30 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन किया गया था। अब मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपीआई का इस्तेमाल करने वालों से चार्ज लिया जा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर चार्ज लगाने की सरकार मंजूरी दे सकती है। 2000 रुपए से ऊपर के कारोबारी भुगतान पर ये एमडीआर चार्ज 0.25 से 0.40 फीसदी तक हो सकती है। तो क्या आपको भी 2000 या उससे ज्यादा की रकम यूपीआई से पेमेंट करने पर चार्ज देना होगा? जानते हैं यहां।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को टैक्सेशन एंड अदर लॉज संशोधन बिल पेश किया। इसमें बैंकों और पेमेंट सर्विस देने वालों पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर एमडीआर लगाने के प्रतिबंध को हटाने का प्रावधान है। हालांकि, एमडीआर चार्ज कब से लगाया जाएगा, ये अभी तय नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2000 रुपए की सीमा तय करने से यूपीआई के लेन-देन का सिर्फ 5 फीसदी कवर होगा। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स में बताया गया है कि रोजमर्रा की खरीदारी या यातायात के लिए यूपीआई पेमेंट करने पर एमडीआर फीस नहीं लगेगी। इसके अलावा कोई व्यक्ति अगर दूसरे व्यक्ति को यूपीआई के जरिए रकम भेजता है, तो भी ये चार्ज नहीं लगेगा।
इससे साफ है कि यूपीआई के जरिए 95 फीसदी लेन-देने पर एमडीआर चार्ज नहीं लगेगा। यूपीआई के जरिए जुलाई में लोगों ने 23.7 अरब लेन-देन किए। ये सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम है। इस सिस्टम को बनाए रखने के लिए काफी खर्च होता है। जिसकी वजह से पेमेंट सर्विस देने वाले प्लेटफॉर्म्स ने सरकार से कहा था कि यूपीआई के जरिए लेन-देन की एक सीमा पर एमडीआर चार्ज फिक्स किया जाए। अगर एमडीआर चार्ज लागू होता है, तो आम लोगों पर असर नहीं होगा, लेकिन बड़ा कारोबार करने वालों को यूपीआई पेमेंट पर पर चार्ज देना होगा।

