LPG Cylinder Price 1 April 2026: रसोई के बजट पर एक बार फिर महंगाई की तलवार लटकती नजर आ रही है। अगर आप भी घर का सिलेंडर खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है।
मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल युद्ध की आग अब सीधे आपकी रसोई तक पहुंचती दिख रही है। 1 अप्रैल 2026 को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की नई समीक्षा होनी है और वैश्विक हालात की मानें तो इस बार कोई बड़ी राहत मिलने की उम्मीद न के बराबर है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल ने गैस सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। पैनिक बाइंग के चलते गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर इस बार आपकी जेब पर कितना बोझ बढ़ने वाला है और पिछले 5 सालों का 'अप्रैल ट्रेंड' क्या कहता है।
युद्ध की आग में झुलसी रसोई और पैनिक बाइंग का साया
7 मार्च 2026 को जब ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष शुरू हुआ, उसके तुरंत बाद ही भारत में गैस की कीमतों में उबाल आ गया था। आंकड़ों पर गौर करें तो युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कमर्शियल सिलेंडर के दाम 115 रुपये और घरेलू एलपीजी सिलेंडर में 60 रुपये की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है। वर्तमान में दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 913 रुपये और लखनऊ में 950.50 रुपये के पार पहुंच गया है। पटना जैसे शहरों में तो यह आंकड़ा 1000 रुपये की मनोवैज्ञानिक सीमा को पार कर चुका है। सरकार भले ही कह रही हो कि सप्लाई में कोई कमी नहीं आएगी, लेकिन युद्ध के अनिश्चित समय को देखते हुए लोग एडवांस बुकिंग करा रहे हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम किल्लत जैसे हालात पैदा हो रहे हैं।
कब मिली राहत और कब लगा झटका?
अगर हम पिछले पांच सालों यानी 2020 से 2025 तक के 'अप्रैल ट्रेंड' को देखें, तो एलपीजी की कीमतों का इतिहास मिला-जुला रहा है। साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान उपभोक्ताओं को 241 रुपये का अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा था। हालांकि, 2020 और 2021 के अप्रैल महीने में ग्राहकों को मामूली राहत भी मिली थी। लेकिन 2026 की स्थिति बिल्कुल अलग है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सऊदी अरामको का कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) लगातार बढ़ रहा है, जिसे ग्लोबल बेंचमार्क माना जाता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया भी गैस को महंगा बनाने में आग में घी का काम कर रहा है। मार्च के महीने में ही ग्लोबल लेवल पर गैस की कीमतें 11 से 12 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं।
राहत मिलेगी या आएगी आफत?
अब सवाल यह है कि क्या 1 अप्रैल को सिलेंडर सस्ता होगा? विशेषज्ञों की मानें तो इसकी संभावना बहुत कम है। ईरान-इजरायल तनाव के कारण क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस की कीमतों में जो तेजी आई है, उसका सीधा असर घरेलू मार्केट पर पड़ना तय है। फिलीपींस, तुर्की और चिली जैसे देशों में भी मार्च के दौरान कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। भारत में भी एलपीजी ₹59.90 प्रति लीटर से बढ़कर ₹66.73 प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है। ऐसे में अगर 1 अप्रैल को एलपीजी उपभोक्ताओं को 50 से 100 रुपये तक का अतिरिक्त झटका लगता है, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। सिलेंडर बुक करने से पहले नए रेट्स पर नजर जरूर रखें, क्योंकि यह अप्रैल आपके किचन का बजट बिगाड़ सकता है।

