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50-70 पुलिसवाले जैसे मैं कोई टेररिस्ट हूँ...", सुप्रीम कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी पर भड़के पवन खेड़ा

50-70 पुलिसवाले जैसे मैं कोई टेररिस्ट हूँ...", सुप्रीम कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी पर भड़के पवन खेड़ा

Newstrack 2 weeks ago

Pawan Khera News: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के विवादास्पद बयान ने अब एक बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर की गई टिप्पणी को लेकर दर्ज मुकदमे में पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

गुवाहाटी हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां आज की सुनवाई बेहद गहमागहमी भरी रही। कोर्ट रूम में एक तरफ वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी गिरफ्तारी को 'अपमानित' करने की कोशिश बता रहे थे, तो दूसरी तरफ सॉलिसीटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने फर्जी दस्तावेजों का हवाला देकर इसे एक गंभीर आपराधिक कृत्य करार दिया। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या देश की सबसे बड़ी अदालत पवन खेड़ा को राहत देगी या उन्हें पुलिस हिरासत का सामना करना पड़ेगा।

गिरफ्तारी की जरूरत पर सिंघवी ने उठाए बड़े सवाल

सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा की तरफ से पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने गिरफ्तारी की आवश्यकता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सिंघवी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को अपमानित करने के लिए पुलिस का डर दिखाया जा रहा है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि खेड़ा के आवास पर 50 से 70 पुलिसवाले ऐसे भेजे गए जैसे वे किसी आतंकवादी की तलाश कर रहे हों। सिंघवी ने कोर्ट को आश्वस्त करने की कोशिश की कि खेड़ा देश छोड़कर कहीं नहीं भाग सकते क्योंकि पासपोर्ट आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को 'अभूतपूर्व' बताते हुए खेड़ा को संरक्षण देने की मांग की।

एसजी तुषार मेहता का पलटवार और फर्जी दस्तावेजों का दावा

सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सिंघवी की दलीलों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट में कहा कि चुनावी कैंपेन के दौरान दिया गया यह बयान सिर्फ छवि धूमिल करने के लिए नहीं था, बल्कि इसमें फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल भी शामिल है। एसजी ने दावा किया कि खेड़ा ने जिन पासपोर्ट का जिक्र किया, वे संबंधित देशों द्वारा कभी जारी ही नहीं किए गए थे। उन्होंने कहा कि यह एक आपराधिक कृत्य है और गैर-जमानती धाराओं में गिरफ्तारी अनिवार्य है। एसजी ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यह जानना बहुत जरूरी है कि आखिर ये फर्जी दस्तावेज किसने मुहैया कराए और इसके पीछे असली मकसद क्या था।

फरार होने के आरोप और कोर्ट का सुरक्षित फैसला

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब एसजी ने कोर्ट को बताया कि पवन खेड़ा फिलहाल फरार हैं और वीडियो जारी कर खुद सुरक्षित स्थान पर होने का दावा कर रहे हैं। इस पर सिंघवी ने एसजी की दलीलों का जवाब देने के लिए कुछ समय की मांग की। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब आने वाला समय ही बताएगा कि पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा मिलती है या उन्हें असम पुलिस की कार्रवाई का सामना करना होगा। इस फैसले पर देश के राजनीतिक और कानूनी गलियारों की पैनी नजर बनी हुई है।

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