Agnipath Scheme Rule Change: अक्टूबर 2026 में अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले अग्निवीर अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। ऐसे में इस योजना को लेकर सबसे बड़ी चर्चा यह है कि क्या अब सिर्फ 25 फीसदी नहीं, बल्कि 50 से 75 फीसदी तक अग्निवीरों को स्थायी नौकरी मिलेगी।
दरअसल, थलसेना, नौसेना और वायुसेना ने अपने अनुभव के आधार पर सरकार से रिटेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। अगर यह मंजूर होता है तो यह अग्निपथ योजना शुरू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव होगा। आइए समझते हैं कि आखिर यह मांग क्यों उठी है, सरकार किन विकल्पों पर विचार कर रही है और इसका युवाओं के भविष्य पर क्या असर पड़ सकता है।
क्या है अग्निपथ योजना और कैसे करती है काम?
केंद्र सरकार ने जून 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य सेना को युवा बनाना, आधुनिक तकनीकों के मुताबिक तैयार करना और रक्षा बजट में पेंशन पर होने वाले खर्च को कम करना था। इस योजना के तहत 17.5 से 21 साल की उम्र के युवाओं को थलसेना, नौसेना और वायुसेना में चार साल के लिए भर्ती किया जाता है। इन युवाओं को अग्निवीर कहा जाता है। चार साल की सेवा पूरी होने के बाद मौजूदा नियमों के मुताबिक केवल 25 फीसदी अग्निवीरों को उनकी योग्यता, मेडिकल फिटनेस और सेना की जरूरत के आधार पर स्थायी सेवा में शामिल किया जाता है। बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को सेवा निधि पैकेज दिया जाता है। जिसकी राशि करीब 11.71 लाख रुपये होती है। इसके अलावा उन्हें विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर देने की भी व्यवस्था की गई है।
अब क्या बदलाव चाहती हैं तीनों सेनाएं?
चार साल के अनुभव के बाद अब तीनों सेनाओं का मानना है कि 25 फीसदी का रिटेंशन उनकी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। इसलिए उन्होंने सरकार से इस सीमा को बढ़ाने की मांग की है। नौसेना चाहती है कि उसके यहां 75 फीसदी तक अग्निवीरों को स्थायी किया जा सके। वहीं थलसेना और वायुसेना ने 50 फीसदी तक रिटेंशन का प्रस्ताव रखा है। फिलहाल इस प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय में चर्चा चल रही है और अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
चार साल की सेवा क्यों पड़ रही है कम?
सेना का कहना है कि कई तकनीकी पदों पर किसी जवान को पूरी तरह दक्ष बनने में तीन से चार साल तक का समय लग जाता है। खासतौर पर नौसेना और वायुसेना में अत्याधुनिक उपकरणों और सिस्टम को संचालित करने के लिए लंबी ट्रेनिंग की जरूरत होती है। ऐसे में जब कोई अग्निवीर पूरी तरह प्रशिक्षित होकर अनुभव हासिल करता है, तब तक उसका चार साल का कार्यकाल समाप्त होने लगता है। इससे सेना को फिर नए जवानों को शुरुआत से प्रशिक्षण देना पड़ता है। जिससे समय और संसाधनों दोनों की खपत बढ़ जाती है।
नई तकनीक और आधुनिक हथियार भी बने बड़ी वजह
भारतीय सेना तेजी से आधुनिक युद्ध प्रणाली की ओर बढ़ रही है। ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी और हाई-टेक हथियारों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इन आधुनिक प्रणालियों को पूरी तरह समझने और संचालित करने के लिए केवल शुरुआती प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं होता। सेना का मानना है कि अनुभवी जवानों को लंबे समय तक सेवा में बनाए रखने से इन तकनीकों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा और युद्ध क्षमता भी मजबूत होगी।
ऑपरेशन सिंदूर से क्या सीख मिली?
हालिया ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अग्निवीरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इससे यह साबित हुआ कि नई व्यवस्था के तहत भर्ती हुए जवान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी प्रभावी तरीके से काम कर सकते हैं। सेना ने यह भी महसूस किया कि वास्तविक युद्ध और सैन्य अभियानों में अनुभव की अपनी अलग अहमियत होती है। कई बार वर्षों तक फील्ड में काम करने वाले जवान कठिन परिस्थितियों में ज्यादा तेजी और सटीक निर्णय लेते हैं। यही वजह है कि अब ज्यादा प्रशिक्षित अग्निवीरों को सेना में बनाए रखने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सेना में जवानों की कमी भी बढ़ा रही है चिंता
भारतीय सेना में इस समय बड़ी संख्या में जवानों के पद खाली हैं। अनुमान के मुताबिक करीब 1.8 लाख पदों पर भर्ती की जरूरत है। आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में सैनिक सेवानिवृत्त भी होंगे। ऐसे में अगर अधिक संख्या में प्रशिक्षित अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखा जाता है तो सेना को अनुभवी मानव संसाधन मिलेगा और नई भर्ती तथा प्रशिक्षण का दबाव भी कुछ हद तक कम होगा।
अगर सरकार ने मंजूरी नहीं दी तो क्या होगा?
यदि सरकार 25 फीसदी की सीमा में बदलाव नहीं करती, तब भी सेना के पास कुछ वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं। सेना तकनीकी और विशेष ऑपरेशन वाली इकाइयों में अधिक अनुभवी अग्निवीरों को प्राथमिकता दे सकती है। जबकि सामान्य यूनिटों में नए अग्निवीरों की तैनाती जारी रखी जा सकती है।
इससे कुल रिटेंशन प्रतिशत नहीं बढ़ेगा, लेकिन महत्वपूर्ण और विशेषज्ञता वाली इकाइयों में अनुभव का लाभ जरूर मिलेगा।
अग्निवीरों के लिए और कौन से बदलावों पर विचार चल रहा है?
सरकार सिर्फ रिटेंशन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि अग्निवीरों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने पर भी विचार कर रही है। प्रस्ताव है कि ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले अग्निवीरों के परिवार को आजीवन आर्थिक सहायता दी जाए।
इसके अलावा सेवा के दौरान दिव्यांग होने वाले अग्निवीरों को जीवनभर मुफ्त इलाज देने की योजना पर भी चर्चा चल रही है। अगर ये दोनों प्रस्ताव लागू होते हैं तो योजना को लेकर उठी कई चिंताओं को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
युवाओं और सरकार पर क्या होगा असर?
अगर रिटेंशन बढ़ता है तो सेना में भर्ती होने वाले युवाओं के लिए स्थायी नौकरी मिलने की संभावना पहले के मुकाबले काफी बढ़ जाएगी। इससे युवाओं का भरोसा भी मजबूत होगा और सेना को लंबे समय तक प्रशिक्षित जवान मिलेंगे। दूसरी ओर, ज्यादा जवानों को स्थायी सेवा में रखने का मतलब सरकार पर भविष्य में वेतन और पेंशन का खर्च बढ़ना भी होगा। साथ ही कुछ हद तक नई भर्तियों के लिए उपलब्ध पद कम हो सकते हैं। वहीं सेना अगले साल करीब 90 हजार नई भर्तियां करने की तैयारी भी कर रही है। जिससे भर्ती प्रक्रिया पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं मानी जा रही है।
क्या बदल जाएगी अग्निपथ योजना की तस्वीर?
अभी तक अग्निपथ योजना में किसी बदलाव का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। तीनों सेनाओं ने अपनी जरूरतों के मुताबिक रिटेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है और रक्षा मंत्रालय इस पर विचार कर रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर सरकार इसे मंजूरी देती है तो अक्टूबर 2026 में चार साल पूरे करने वाले पहले बैच के अग्निवीरों के लिए यह सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
ज्योत्सना सिंह
07.07.2026
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