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अजीत डोभाल संभालेंगे देश की कमान? 85 की उम्र और पुतिन जैसा रसूख... सोशल मीडिया पर छिड़ी महा-जंग

अजीत डोभाल संभालेंगे देश की कमान? 85 की उम्र और पुतिन जैसा रसूख... सोशल मीडिया पर छिड़ी महा-जंग

Newstrack 1 week ago

भारत के गलियारों में आजकल एक ऐसी चर्चा आग की तरह फैल रही है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। क्या भारत को अपना 'पुतिन' मिल गया है? सोशल मीडिया पर बस एक ही सवाल तैर रहा है: क्या भारत के 'जेम्स बॉन्ड' कहे जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तरह देश की कमान अपने हाथों में लेंगे?

पुतिन भी कभी एक जासूस थे और आज रूस के सबसे ताकतवर नेता हैं, तो क्या डोभाल भी उसी राह पर हैं? इस सवाल के पीछे का रहस्य जितना गहरा है, उसका जवाब उतना ही चौंकाने वाला है। आइए, इस सनसनीखेज दावे की हकीकत की तह तक जाते हैं।

पुतिन बनाम डोभाल

जब हम व्लादिमीर पुतिन और अजीत डोभाल की तुलना करते हैं तो सबसे पहले हमारी नजर उस आंकड़े पर पड़ती है जिसे 'उम्र' कहते हैं। व्लादिमीर पुतिन ने जब 1999 में रूस की बागडोर संभाली थी, तब वे मात्र 47 साल के थे। राजनीति की बिसात पर 47 की उम्र को बेहद युवा और ऊर्जावान माना जाता है। पुतिन के पास दशकों तक शासन करने का वक्त और शरीर में वह स्फूर्ति थी जो एक राष्ट्र को बदलने के लिए चाहिए होती है। लेकिन यहाँ कहानी पूरी तरह पलट जाती है। अजीत डोभाल आज 81 वर्ष के हो चुके हैं। यदि भविष्य के किसी समीकरण में उनके सत्ता संभालने की बात उठती भी है, तो वह समय 83 या 85 वर्ष का होगा। क्या दुनिया का सबसे युवा देश, यानी भारत, अपनी कमान 85 साल के एक व्यक्ति को सौंपना चाहेगा? यह एक ऐसा व्यावहारिक सवाल है जो पुतिन बनने के सपने को धुंधला कर देता है।

अंधेरी गलियों का नायक और चमकती राजनीति की धूप

अजीत डोभाल निस्संदेह एक ऐसी शख्सियत हैं जिनका करियर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने दशकों तक देश की सुरक्षा के लिए वो 'सीक्रेट' काम किए हैं, जिनकी असलियत शायद 20-30 साल बाद तब पता चलेगी जब फाइलें सार्वजनिक होंगी। वे एक 'लेजेंड' हैं, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि डोभाल एक कुशल रणनीतिकार और जासूस तो हैं, पर वे राजनेता नहीं हैं। राजनीति केवल आदेश देने का नाम नहीं है, इसमें जनता के बीच जाना पड़ता है, हाथ जोड़ने पड़ते हैं और चुनाव प्रचार की कड़ी धूप में पसीना बहाना पड़ता है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि पर्दे के पीछे रहकर बड़े-बड़े ऑपरेशन अंजाम देने वाला यह जासूस, रैलियों में भाषण देगा और वोट मांगेगा?

सत्ता की चाह या कर्तव्य का मार्ग: क्या है असली हकीकत?

अजीत डोभाल का पूरा जीवन देश सेवा और रणनीतिक कौशल के लिए समर्पित रहा है। ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि सत्ता की कुर्सी या राजनीति उनके जीवन का असली मकसद (Calling) है। वे एक ऐसे योद्धा हैं जो पर्दे के पीछे रहकर राजा बनाना जानते हैं, खुद राजा बनने की लालसा उनके स्वभाव में नहीं दिखती। इसलिए, उन्हें पुतिन के सांचे में ढालकर देखना एक दिलचस्प कल्पना तो हो सकती है, लेकिन हकीकत की जमीन पर यह पूरी तरह अव्यावहारिक है। डोभाल का कद राजनीति से कहीं ऊपर एक 'रक्षक' का है, और शायद वे उसे ही बरकरार रखना चाहेंगे।

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