
Nepal Floods: नेपाल में भोटे कोशी (Bhote Koshi) और त्रिशूली (Trishuli) नदियों में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (Flash Floods) के बाद हालात लगातार भयावह बने हुए हैं। गुरुवार को रेस्क्यू टीमों को और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर कम से कम 332 हो गई है, जबकि करीब 800 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
इस आपदा में लापता हुए करीब 100 भारतीय नागरिकों का पता लगा लिया गया है, जिससे राहत की खबर सामने आई है। हालांकि प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
नेपाल में 289 लोगों की मौत
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ (Nepal Floods) को हाल के वर्षों की सबसे भीषण आपदाओं में से एक माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों की संख्या बढ़कर 332 हो गई है। नेपाल में 826 लोग लापता हैं, जबकि तिब्बत में भी 558 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बाढ़ और भूस्खलन (Landslides) से प्रभावित इलाकों में गुरुवार को भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। राहत और बचाव दल मोटी कीचड़ और मलबे के बीच फंसे लोगों और लापता लोगों की तलाश में जुटे रहे।
हालात इतने खराब हैं कि बाढ़ का पानी बहुमंजिला इमारतों की निचली मंजिलों तक पहुंच गया और कई इलाकों में पानी के साथ आया मलबा और कीचड़ इमारतों तथा आसपास के क्षेत्रों में भर गया। रेस्क्यू टीमों को ऐसे हालात में जीवित बचे लोगों की तलाश करनी पड़ रही है।
भारतीयों के साथ कई देशों के नागरिक भी लापता
इस आपदा में लापता होने वाले विदेशी नागरिकों में कई भारतीय भी शामिल हैं। इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, मलेशिया, नीदरलैंड, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
एक समाचार एजेंसी के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि लापता करीब 100 भारतीय नागरिकों का अब पता लगा लिया गया है। इसके बावजूद नेपाल में भारतीय नागरिकों की तलाश और राहत कार्य को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार 178 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं।
ग्लेशियर ढहने से शुरू हुई तबाही
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (US Geological Survey) ने गुरुवार को इस भीषण आपदा की वजह को लेकर अहम जानकारी दी। एजेंसी के मुताबिक ग्लेशियर के ढहने (Glacial Collapse) के बाद भूकंपीय गतिविधि हुई और इसके चलते नेपाल और तिब्बत के निचले इलाकों में विनाशकारी असर पड़ा।
शुरुआत में माना जा रहा था कि भूकंप के कारण हिमस्खलन (Avalanche) हुआ, जिसके बाद नेपाल में भीषण बाढ़ आई। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के हवाले से इस संभावना का जिक्र किया था।
हालांकि अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार जिस भूकंपीय गतिविधि को शुरुआत में भूकंप माना गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद हुए मलबे के बहाव से जुड़ी थी। इसी घटना के बाद निचले इलाकों में भारी तबाही हुई।
बिहार और यूपी में हाई अलर्ट
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड (Nepal Flash Floods) के बाद पड़ोसी बिहार और उत्तर प्रदेश में भी अलर्ट जारी किया गया है। बुधवार को दोनों राज्यों में गंडक नदी बेसिन (Gandak River Basin) से जुड़े कई जिलों में नुकसान की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दीं।
संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी हालात को लेकर बात की।
अमित शाह ने कहा कि जिन सीमावर्ती इलाकों में नेपाल की बाढ़ का असर पड़ सकता है, वहां राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ (NDRF) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव टीमों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
भारत ने नेपाल के लिए भेजी राहत सामग्री
नेपाल में तबाही के बीच भारत ने राहत और बचाव के लिए मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री यानी एचएडीआर (HADR) भेजी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत ने नेपाल की मदद के लिए 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री के साथ जरूरी दवाएं भेजी हैं।
गुरुवार को भारत ने बाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए राहत सामग्री की दूसरी खेप भी भेजी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि एचएडीआर सामग्री, दवाओं और खाने के पैकेट की 37.5 टन की दूसरी खेप नेपाल को सौंप दी गई है।
यह राहत सामग्री नेपाल में बाढ़ राहत और रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई है।
अमेरिका ने भी की आपातकालीन मदद की घोषणा
नेपाल में आई इस घातक बाढ़ को लेकर अमेरिकी सरकार ने भी दुख जताया है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक अमेरिका ने नेपाल में राहत कार्यों के लिए 5 लाख डॉलर की आपातकालीन सहायता देने की बात कही है।
विदेश मंत्रालय ने बनाया कंट्रोल रूम
नेपाल में बाढ़ के बाद पैदा हुए हालात को देखते हुए भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी एक कंट्रोल रूम स्थापित किया है। यह कदम नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों और वहां से जुड़ी स्थिति पर नजर रखने के लिए उठाया गया है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। एक तरफ लापता लोगों की तलाश में टीमें कीचड़ और मलबे के बीच काम कर रही हैं, तो दूसरी तरफ भारत समेत कई देश राहत सहायता पहुंचा रहे हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती उन सैकड़ों लोगों तक पहुंचना है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल सका है।

