Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
Bharat Tiwari Case: FIR के बाद भी SDPO राजेश शर्मा की नई तैनाती पर बवाल! न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल

Bharat Tiwari Case: FIR के बाद भी SDPO राजेश शर्मा की नई तैनाती पर बवाल! न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल

Newstrack 2 weeks ago

Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार में पुलिस महकमे के बड़े तबादलों के बीच डीएसपी राजेश शर्मा की नई तैनाती ने एक बार फिर गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है। भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में हत्या की एफआईआर दर्ज होने के बावजूद उन्हें नई जिम्मेदारी दिए जाने पर सवालों की बौछार हो रही है।

मृतक के परिजनों ने इस फैसले को सीधे-सीधे "न्याय का मजाक" और "जांच पर दबाव" करार दिया है। भरत तिवारी के परिजनों ने डीएसपी राजेश शर्मा की नई तैनाती को "इनाम पोस्टिंग" बताया है।

कौन हैं डीएसपी राजेश शर्मा?

राजेश शर्मा बिहार पुलिस के उन अधिकारियों में शामिल हैं जो लंबे समय से चर्चा और विवाद दोनों के केंद्र में रहे हैं। उन्होंने करियर की शुरुआत सब-इंस्पेक्टर के रूप में की थी और बाद में प्रमोशन पाकर डीएसपी (SDPO) बने। लेकिन उनका पुलिस करियर लगातार सवालों से घिरा रहा है। अलग-अलग समय पर उन पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं, जिनमें कथित एनकाउंटर मामलों में भूमिका को लेकर भी विवाद शामिल है। अब भरत तिवारी केस ने एक बार फिर उनकी कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

नई पोस्टिंग पर क्यों उठा विवाद?

बिहार सरकार द्वारा हाल ही में 12 आईपीएस और 53 डीएसपी अधिकारियों का तबादला किया गया था। इसी सूची में राजेश शर्मा को मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। नई तैनाती के बाद विवाद तेज हो गया है। भरत तिवारी के परिवार का आरोप है कि जिस अधिकारी के खिलाफ गंभीर धाराओं में हत्या की एफआईआर दर्ज है, उसे जांच पूरी होने से पहले नई जिम्मेदारी देना न्याय की भावना के खिलाफ है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि यह कदम "जांच को प्रभावित करने वाला" और "अनुचित लाभ" देने जैसा है।

क्या हुआ था भरत तिवारी एनकाउंटर में?

17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भरत तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। तभी से यह मामला लगातार विवादों में है। कहा जा रहा है भारत तिवारी ने जब पोलिस के सामने सरेंडर कर दिया तब पोलिस ने निहत्थे व्यक्ति पर जानबूझ कर कई राउन्ड गोली चलाकर घायल कर दिया था। बाद में भारत तिवारी की मौत हो गई थी। परिजनों का कहना है कि पोलिस ने पहले 3 गोलियां मारी थी, लेकिन हत्या के इरादे से पोलिस वाहन के अंदर 2 गोलियां उनके पेट व कमर के निचले हिस्से में मारी, जिससे अधिक खून बहने से उनकी मौत हो गई थी।

पुलिस का पक्ष:

पुलिस का दावा है कि कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ हुई, पोलिस ने आत्मरक्षा में गोलियां चलाई जिसमें भरत तिवारी की मौत हो गई।

परिजनों का आरोप:

परिजनों का कहना है कि भरत फेसबुक लाइव कर रहा था और उसने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद उसे धक्का देकर गिराया गया और गोली मार दी गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि तत्कालीन एसडीपीओ राजेश शर्मा मौके पर मौजूद थे और उन्होंने गोली चलाने का आदेश दिया था।

पुराने विवादों का भी जिक्र

परिवार और स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जाते रहे हैं कि राजेश शर्मा का नाम लगभग 19 साल पहले मुजफ्फरपुर के एक कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में भी सामने आ चुका है। हालांकि, इन आरोपों पर अलग-अलग स्तर पर जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहने की बात कही जाती रही है।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Newstrack Journalism Hindi