Bihar Man Builds E-Cycle: दुनिया भर में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने रोजमर्रा की जिंदगी को महंगा बना दिया है।
ऐसे मुश्किल समय में बिहार के कटिहार से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। यहां के एक साधारण युवक पवन यादव ने अपनी मेहनत और तकनीकी समझ के दम पर एक ऐसी ई-साइकिल तैयार की है, जो सिर्फ 7 रुपये में 100 किलोमीटर तक चल सकती है। यह इनोवेशन न सिर्फ सस्ती यात्रा का विकल्प देता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।
छोटे शहर का बड़ा इनोवेशन
कटिहार के शिवाजी नगर मोहल्ले के रहने वाले पवन यादव ने यह साबित कर दिया कि इनोवेशन के लिए बड़े शहर या बड़ी डिग्री जरूरी नहीं होती। मैट्रिक तक पढ़ाई करने वाले पवन ने अपने अनुभव और जिज्ञासा के बल पर ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो आज बड़े-बड़े इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स को भी चुनौती देता नजर आ रहा है।
उनकी यह ई-साइकिल अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है और लोग इसे देखने और समझने के लिए उनके पास पहुंच रहे हैं।
विदेश में सीखा हुनर, गांव में किया इस्तेमाल
पवन यादव का सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। वह पहले दुबई में एक निजी कंपनी में इलेक्ट्रिक मैकेनिक के रूप में काम करते थे। वहां उन्होंने इलेक्ट्रिक सिस्टम, बैटरी और मोटर से जुड़ी तकनीकों को करीब से सीखा। हालांकि, विदेश की जिंदगी उन्हें ज्यादा समय तक रास नहीं आई और उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने गांव लौटने का फैसला किया। गांव आने के बाद उन्होंने अपनी छोटी फैक्ट्री शुरू की, जहां वे लोहे के फर्नीचर और ग्रिल बनाकर अपना जीवनयापन करने लगे। इसी दौरान उनके मन में कुछ नया करने का विचार आया, जो समाज के काम भी आ सके।
आधुनिक लिथियम बैटरी तकनीक का इस्तेमाल
पवन द्वारा बनाई गई यह ई-साइकिल लिथियम बैटरी पर आधारित है, जो आज की सबसे उन्नत बैटरी तकनीकों में से एक मानी जाती है। यह बैटरी न केवल हल्की होती है, बल्कि तेजी से चार्ज होती है और लंबे समय तक चलने की क्षमता भी रखती है। इसी वजह से साइकिल को बार-बार चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती और उपयोगकर्ता आसानी से लंबी दूरी तय कर सकता है। साइकिल में मोटर और कंट्रोल सिस्टम इस तरह से फिट किया गया है कि इसे चलाना बेहद आसान हो जाता है, यहां तक कि कम अनुभव वाले लोग भी इसे आसानी से चला सकते हैं।
महज 7 रुपए में 100 किलोमीटर की दूरी
इस ई-साइकिल की सबसे बड़ी खासियत इसका खर्च है, जो इसे आम आदमी के लिए बेहद खास बनाता है। पवन के अनुसार,
सिर्फ 7 रुपए की बिजली खर्च करके यह साइकिल 100 किलोमीटर तक चल सकती है। अगर इसे रोजमर्रा के खर्च से तुलना करें, तो जहां पेट्रोल बाइक में 100 किलोमीटर चलने के लिए 100 से 150 रुपए तक का खर्च आ सकता है, वहीं यह साइकिल उस खर्च को लगभग नगण्य कर देती है।
यह उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है, जिन्हें रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
कम समय में चार्ज, ज्यादा समय तक उपयोग
इस साइकिल की बैटरी को फुल चार्ज होने में लगभग तीन घंटे का समय लगता है। यह समय भी काफी कम है, जिससे इसे दिन में आसानी से चार्ज किया जा सकता है।
एक बार चार्ज होने के बाद यह लंबी दूरी तय करती है, जिससे बार-बार चार्जिंग की झंझट भी नहीं रहती। यह खासियत इसे छात्रों, डिलीवरी वर्कर्स और छोटे व्यवसायियों के लिए बेहद उपयोगी बनाती है।
कम लागत में तैयार हुआ मजबूत मॉडल
पवन यादव ने इस ई-साइकिल को तैयार करने में करीब 45 हजार रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह खुद डिजाइन किया और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके तैयार किया।
यह लागत बाजार में मिलने वाली कई ई-बाइक्स के मुकाबले काफी कम है, जो अक्सर 70 हजार से 1 लाख रुपए तक की होती हैं।
अगर इसे बड़े स्तर पर बनाया जाए, तो इसकी कीमत और भी कम की जा सकती है।
प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल
आज के समय में बढ़ता प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन चुका है। ऐसे में पवन की यह ई-साइकिल एक साफ और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आती है।
इससे न तो धुआं निकलता है और न ही किसी प्रकार का कार्बन उत्सर्जन होता है।
इस तरह यह पर्यावरण को बचाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है और भविष्य की ग्रीन ट्रांसपोर्ट व्यवस्था का हिस्सा बन सकती है।
आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन
पवन का कहना है कि उन्होंने इस साइकिल को खासतौर पर उन लोगों के लिए बनाया है, जिनकी आय सीमित है और जो महंगे ईंधन का खर्च नहीं उठा सकते।
गांवों और छोटे शहरों में रहने वाले लोग, मजदूर, छात्र और छोटे दुकानदार इसके जरिए अपने खर्च को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
यह साइकिल न सिर्फ एक साधन है, बल्कि आर्थिक राहत का जरिया भी बन सकती है।
स्थानीय स्तर पर मिल रही सराहना
पवन के इस प्रयास को स्थानीय लोगों से खूब सराहना मिल रही है। लोग इसे एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं और चाहते हैं कि सरकार इस तरह के इनोवेशन को बढ़ावा दे।
उनका मानना है कि अगर ऐसे युवाओं को सही दिशा और सहयोग मिले, तो यह न केवल रोजगार के अवसर पैदा करेगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाएगा।
सरकारी सहयोग की उम्मीद और बड़ा सपना
पवन यादव प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया' अभियान से प्रेरित हैं और चाहते हैं कि उन्हें किसी सरकारी योजना या निजी कंपनी का सहयोग मिले। उनका सपना है कि वह इस ई-साइकिल को और बेहतर बनाकर बड़े स्तर पर उत्पादन करें और इसे पूरे देश में उपलब्ध कराएं।
अगर उन्हें सही प्लेटफॉर्म मिलता है, तो उनका यह इनोवेशन भारत में सस्ती और स्वच्छ परिवहन क्रांति ला सकता है।

