BJP MLA Raju Kumar Singh Jailed: देश की राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने जश्न के नाम पर सरेआम कानून की धज्जियां उड़ाने वाले रसूखदारों को एक बहुत बड़ा और कड़ा संदेश दिया है. दिल्ली की चर्चित राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को बिहार के साहेबगंज से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक राजू कुमार सिंह को साल 2018 के बहुचर्चित हर्ष फायरिंग मामले में पूरे 4 साल की कड़ी सजा सुनाकर जेल भेज दिया है.
इस बेपरवाह और खूनी जश्न की वजह से एक निर्दोष महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. कानून का चाबुक चलाते हुए स्पेशल जज विशाल गोगने ने न सिर्फ विधायक को सलाखों के पीछे भेजा, बल्कि उन पर 25 लाख रुपये का तगड़ा जुर्माना भी ठोक दिया. अदालत ने साफ किया कि इस जुर्माने से मिलने वाली पूरी रकम मृतिका के बेसहारा परिवार को आर्थिक मुआवजे के तौर पर सौंपी जाएगी.
जश्न बना मातम और चली गई जान
यह पूरा खौफनाक मामला दिल्ली के आलीशान इलाके फतेहपुर बेरी में स्थित एक बड़े फार्महाउस का है, जहां साल 2018 में न्यू ईयर यानी नए साल का जश्न मनाने के लिए एक बेहद शानदार पार्टी रखी गई थी. इसी हाई-प्रोफाइल पार्टी में 56 वर्षीय विधायक राजू कुमार सिंह ने जोश में आकर अपनी बंदूक से अंधाधुंध हर्ष फायरिंग कर दी थी. इस लापरवाही की वजह से वहां मौजूद अर्चना गुप्ता नाम की एक महिला को सीधे गोली लग गई, जिससे उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई. अदालत ने अपने पूरे 97 पन्नों के ऐतिहासिक फैसले में बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि त्योहारों और खुशियों के मौकों पर शान दिखाने के लिए की जाने वाली यह हर्ष फायरिंग आज हमारे देश में एक भयंकर और जानलेवा बीमारी बन चुकी है, जो आए दिन हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए बर्बाद कर देती है.
विधायक की बेदाग रिकॉर्ड वाली दलील फेल
कानून के शिकंजे में बुरी तरह फंसे बिहार के कद्दावर नेता राजू कुमार सिंह ने खुद को बचाने के लिए अदालत के सामने कई तरह की मिन्नतें की थीं. उन्होंने जज साहब से प्रोबेशन के आधार पर रिहाई की गुहार लगाते हुए यह दलील दी थी कि उनका इरादा किसी की जान लेने का बिल्कुल भी नहीं था. इसके साथ ही उन्होंने अपनी राजनीतिक साख का हवाला देते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि और विधायक के तौर पर उनका अब तक का पूरा इतिहास एकदम साफ-सुथरा और बेदाग रहा है. हालांकि, स्पेशल कोर्ट ने विधायक की इन सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कई बार विधायक रह चुके एक जिम्मेदार व्यक्ति की ऐसी भयंकर लापरवाही को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जा सकता है.
कानून ने सिखाया रसूखदारों को सबक
अदालत ने तमाम पुख्ता सबूतों, चश्मदीद गवाहों के बयानों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर यह पूरी तरह मान लिया कि आरोपी विधायक राजू कुमार सिंह की बंदूक से निकली गोली की वजह से ही अर्चना गुप्ता की असमय मौत हुई थी. इस संगीन जुर्म के लिए कोर्ट ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 पार्ट-II यानी गैर-इरादतन हत्या के तहत दोषी पाते हुए 4 साल की साधारण कैद की सजा सुनाई. इसके साथ ही उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत सरकारी लाइसेंस की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन करने का भी दोषी ठहराया गया, जिसके लिए उन्हें 2 महीने की अलग से जेल काटनी होगी. राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले में अपना अंतिम फैसला 7 जुलाई, 2026 को सुनाया.

