Mohan Bhagwat News: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में बने राम मंदिर को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि राम मंदिर का निर्माण सिर्फ किसी एक संस्था या व्यक्ति की वजह से नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों के समर्थन से संभव हो पाया है।
उनके इस बयान को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति और वैचारिक बहस तेज हो गई है।
'सामूहिक प्रयास से बना राम मंदिर'
सोमवार को नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने यह बातें कहीं। यह कार्यक्रम अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की अगुवाई करने वाले लोगों के सम्मान के लिए रखा गया था। इस आयोजन को नागपुर के रेशिमबाग स्थित डॉ हेडगेवार स्मारक समिति ने आयोजित किया था, जहां भागवत ने विस्तार से अपने विचार रखे।
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या का राम मंदिर भगवान राम की इच्छा से बना है, लेकिन यह तभी संभव हुआ जब पूरे समाज ने मिलकर प्रयास किया। उन्होंने भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने का उदाहरण देते हुए कहा कि यह काम भले ही भगवान की उंगली पर टिका हो, लेकिन वह उंगली तब तक नहीं उठती जब तक लोग अपना योगदान नहीं देते। उसी तरह राम मंदिर भी सामूहिक प्रयास का परिणाम है, जिसमें हर किसी ने अपनी भूमिका निभाई।
'हिंदू राष्ट्र पर क्या बोले भागवत'
भागवत ने यह भी कहा कि सिर्फ जनता का सहयोग ही नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की प्रतिबद्धता भी इस निर्माण में बेहद जरूरी थी। उन्होंने कहा कि अगर मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं होती तो मंदिर का निर्माण संभव नहीं हो पाता। उनका कहना था कि फैसला लेना एक बात है, लेकिन उसे जमीन पर उतारने के लिए मजबूत नींव और दृढ़ नेतृत्व की जरूरत होती है। इस पूरे प्रक्रिया में देश के हर व्यक्ति का योगदान रहा है, तभी यह काम पूरा हो सका।
अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने हिंदू राष्ट्र को लेकर चल रही बहस पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पहले इस विचार का मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन अब वही लोग मानने लगे हैं कि भारत हिंदुओं की भूमि है। उन्होंने साफ कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही एक वास्तविकता है।
सूरज के उदाहरण से समझाया अपना पक्ष
भागवत ने अपनी बात को समझाने के लिए एक उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जैसे सूरज पूर्व दिशा में उगता है और इसके लिए किसी घोषणा की जरूरत नहीं होती, उसी तरह भारत का हिंदू राष्ट्र होना भी एक सच्चाई है, जिसे अलग से घोषित करने की जरूरत नहीं है। उनके इस बयान ने एक बार फिर इस मुद्दे पर नई बहस को जन्म दे दिया है।
अब आगे क्या जिम्मेदारी?
वहीं मोहन भागवत ने इस कार्यक्रम में यह भी कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर निर्माण में भूमिका निभाई, उन्होंने अपना काम पूरी जिम्मेदारी के साथ पूरा कर दिया है। अब आगे की जिम्मेदारी समाज की है कि वह अपने कर्तव्यों को समझे और उसी भावना के साथ काम करे। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण में जुड़े लोगों ने उम्मीद से बढ़कर काम किया है और अब समय है कि बाकी लोग भी अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाएं।

