SIR Voter List 2026: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। दिल्ली और महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम शामिल नहीं होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को 'Vote Theft Commission' तक कह दिया और आरोप लगाया कि बीजेपी और चुनाव आयोग का लक्ष्य एक ही है-"किसी भी कीमत पर बीजेपी को चुनाव जिताना।"
महाराष्ट्र और दिल्ली में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची के आंकड़ों को लेकर विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने का दावा किया गया है, जबकि दिल्ली में करीब 47.7 लाख नाम इस चरण में शामिल नहीं हैं।
महाराष्ट्र में हर पांचवां वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का हवाला देते हुए कहा कि करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम बाहर हैं। उन्होंने इसे राज्य के लगभग हर पांचवें मतदाता के बराबर बताया।
राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों की मतदाता संख्या की तुलना करते हुए सवाल उठाया-
लोकसभा चुनाव 2024: 9.29 करोड़ वोटर
विधानसभा चुनाव 2024: 9.70 करोड़ वोटर
SIR ड्राफ्ट 2026: 7.78 करोड़ वोटर
उन्होंने पूछा कि आखिर इनमें से सही मतदाता सूची कौन सी थी?
महाराष्ट्र की ड्राफ्ट सूची में करीब 78.86 प्रतिशत मतदाताओं का enumeration दर्ज किया गया है। राहुल गांधी ने मतदाताओं की संख्या में आई इस बड़ी गिरावट को लेकर चुनाव आयोग से सवाल किए हैं।
बंगाल SIR का उदाहरण देकर राहुल का हमला
राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में हुए SIR का भी जिक्र किया। उनका दावा है कि ट्रिब्यूनल में हुई सुनवाई के बाद ड्राफ्ट सूची से हटाए गए करीब 91 प्रतिशत नाम वापस जोड़ दिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसका मतलब है कि 10 में से करीब 9 नाम गलत तरीके से हटाए गए थे और बाद में उन्हें वापस शामिल किया गया।
राहुल गांधी ने इसे 'वोट चोरी' करार देते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी इस मुद्दे को उठाया था और अब भी उनका आरोप वही है।
दिल्ली में 47 लाख नाम गायब होने का दावा
दिल्ली के ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में करीब 1.5 करोड़ मतदाताओं की आबादी में से लगभग 47 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में तंज कसते हुए कहा कि सरकार देश की आबादी को लेकर बेवजह चिंतित है। उनके मुताबिक, SIR के जरिए चुनाव आयोग देश की आबादी को 140 करोड़ से घटाकर 50 करोड़ कर देगा।
हालांकि, ड्राफ्ट सूची में नाम का न होना अंतिम रूप से मताधिकार खत्म होने के बराबर नहीं है। SIR प्रक्रिया के दौरान दावे और आपत्तियां दाखिल करने का प्रावधान होता है।
दिल्ली में किस आधार पर हटे नाम?
SIR के तहत दिल्ली के पुराने मतदाता रिकॉर्ड की तुलना में ड्राफ्ट सूची में बड़ी संख्या में नाम शामिल नहीं किए गए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली के करीब 29.86 प्रतिशत पुराने मतदाताओं को 'absent/permanently shifted/others' श्रेणी में रखा गया है। वहीं करीब 1.95 प्रतिशत को मृत और 0.98 प्रतिशत को किसी अन्य स्थान पर नामांकित बताया गया है।
इससे विपक्ष को चुनाव आयोग पर सवाल उठाने का मौका मिला है।
कर्नाटक और तेलंगाना के CM भी उठा चुके हैं सवाल
SIR को लेकर केवल दिल्ली और महाराष्ट्र में ही राजनीतिक विवाद नहीं है। पिछले सप्ताह कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों ने भी इस प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी।
दोनों राज्यों की ओर से आशंका जताई गई कि कम enumeration, दस्तावेजों से जुड़ी दिक्कतों और सीमित समय के कारण कई पात्र मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।
SIR पर बढ़ रहा राजनीतिक टकराव
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं की पहचान करना है। हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी हटने का खतरा है।
महाराष्ट्र और दिल्ली के ड्राफ्ट आंकड़ों के बाद यह विवाद और तेज हो गया है। अब सबकी नजरें दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया और अंतिम मतदाता सूची पर हैं। यही तय करेगी कि ड्राफ्ट में बाहर किए गए कितने नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल होते हैं।

