BJP-Shiv Sena Clash Over BMC: देश की सबसे अमीर नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में मेयर की कुर्सी को लेकर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सरेआम आ गए हैं।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मेयर पद के कार्यकाल के बंटवारे को लेकर भारी खींचतान देखने को मिल रही है। दोनों ही दल इस शीर्ष पद पर अपना-अपना दावा मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे महाराष्ट्र का सियासी तापमान एक बार फिर काफी बढ़ गया है।
वर्षा बैठक का दिया हवाला
शिवसेना के बीएमसी समूह नेता अमेय घोले ने इस पूरे विवाद पर अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास 'वर्षा' में आयोजित महायुति की समन्वय बैठक के दौरान पावर शेयरिंग के एक विशेष फॉर्मूले पर सहमति बनी थी।
घोले के अनुसार, तय योजना के तहत पहले ढाई वर्ष तक मेयर पद बीजेपी के पास रहना था। इसके बाद के सवा साल के लिए यह पद शिवसेना को सौंपा जाना निश्चित हुआ था और कार्यकाल का अंतिम हिस्सा पुनः बीजेपी को मिलना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि गठबंधन के भीतर भले ही कोई भ्रम हो, लेकिन शिवसेना अपने निर्धारित समय पर पूरे आत्मविश्वास के साथ मेयर की कुर्सी पर अपना दावा पेश करेगी।
BJP का दो टूक जवाब
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने शिवसेना के इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में मंत्री आशीष शेलार ने अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल अनौपचारिक रूप से हुई बातचीत का कोई कानूनी या आधिकारिक महत्व नहीं होता।
शेलार ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच ऐसा कोई बड़ा समझौता हुआ होता, तो उसकी आधिकारिक घोषणा सार्वजनिक रूप से जरूर की जाती। बिना किसी लिखित या सार्वजनिक ऐलान के ऐसे दावों का कोई वजूद नहीं है।
मेयर की कुर्सी पर बरकरार सस्पेंस
बीएमसी की विभिन्न प्रशासनिक समितियों के गठन और उनके बंटवारे को लेकर हालांकि दोनों दलों के बीच चीजें तय योजना के मुताबिक ही आगे बढ़ी हैं, लेकिन असली पेंच मेयर के पद पर आकर फंस गया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आगामी समय में यह खींचतान गठबंधन के रिश्तों में और अधिक खटास पैदा कर सकती है। अब देखना यह होगा कि महायुति के शीर्ष नेता इस अंदरूनी तकरार को बातचीत के जरिए सुलझाते हैं या फिर बीएमसी की यह सियासी जंग कोई नया मोड़ लेती है।

