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बोडोलैंड का 'सियासी दंगल'! BJP-कांग्रेस रेस में ही नहीं, BPF-UPPL के बीच होगी कांटे की टक्कर

बोडोलैंड का 'सियासी दंगल'! BJP-कांग्रेस रेस में ही नहीं, BPF-UPPL के बीच होगी कांटे की टक्कर

Newstrack 0 months ago

Assam Assembly Election 2026: ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित बोडोलैंड क्षेत्र असम की राजनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) के नाम से जाना जाता है, जो एक स्वायत्त प्रशासनिक इकाई है।

इस क्षेत्र में कोकराझार, चिरांग, उदालगुड़ी, बक्सा और तामुलपुर जैसे पांच जिले शामिल हैं। यहां विधानसभा की कुल 15 सीटें हैं, जो आगामी 9 अप्रैल को होने वाले चुनावों में निर्णायक साबित हो सकती हैं। बोडोलैंड के मुद्दे असम के अन्य हिस्सों से अलग हैं, इसलिए यहां की राजनीति भी विशिष्ट मानी जाती है।

बोडोलैंड की राजनीति को समझने के लिए इसके ऐतिहासिक संदर्भ को जानना जरूरी है। यह क्षेत्र लंबे समय से बोडो जनजाति की पहचान, अधिकार और स्वायत्तता की मांग का केंद्र रहा है। 1980 के दशक में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) के नेतृत्व में अलग बोडोलैंड राज्य की मांग ने जोर पकड़ा। यह आंदोलन कई बार हिंसक भी हुआ। 1993 में पहला बोडो समझौता हुआ, लेकिन इससे स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। बाद में 2003 में भारत सरकार, असम सरकार और बोडो लिबरेशन टाइगर्स के बीच समझौते के बाद बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) का गठन हुआ, जिससे इस क्षेत्र को स्वायत्त शासन मिला। वर्ष 2020 के नए समझौते ने BTR को और सशक्त किया, जिससे यहां प्रशासनिक ढांचा मजबूत हुआ।

चुनावी मुद्दों की बात करें तो यहां पहचान की राजनीति सबसे प्रमुख है, जिसमें बोडो और गैर-बोडो समुदायों के बीच संतुलन अहम रहता है। इसके अलावा जमीन पर अतिक्रमण हटाने, शांति और सुरक्षा बनाए रखने, और विकास जैसे सड़क, शिक्षा व रोजगार के मुद्दे भी प्रमुख हैं। 2020 के बोडो समझौते के क्रियान्वयन को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है। चुनावी समीकरण इस बार काफी रोचक नजर आ रहे हैं। BTR की 15 सीटों पर मुख्य मुकाबला क्षेत्रीय दलों के बीच है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) गठबंधन में हैं, जहां BJP 5 सीटों पर और BPF 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दूसरी ओर, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL), जो पहले BJP की सहयोगी थी, इस बार सभी 15 सीटों पर अकेले चुनाव मैदान में उतरी है। इससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

विपक्ष की बात करें तो कांग्रेस 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि बाकी दो सीटों पर उसके सहयोगी दल राजोर दल और टीएमसी (जी) उम्मीदवार उतार रहे हैं। इसके अलावा झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की एंट्री ने भी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। राजनीतिक परिदृश्य में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि BPF के नेता हाग्रामा मोहिलारी, जो पहले विपक्ष में थे, अब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ खड़े हैं। वहीं UPPL के नेता प्रमोद बोरो भी क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखते हैं और उनकी पार्टी BJP से अलग होकर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में बोडोलैंड का यह चुनाव न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति, बल्कि पूरे असम की सत्ता संतुलन को प्रभावित कर सकता है। अब सबकी नजरें 9 अप्रैल और उसके नतीजों पर टिकी हैं, जो इस क्षेत्र की भविष्य की दिशा तय करेंगे।

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