Bus Rape Cases in India: दिल्ली-एनसीआर समेत देश भर में सार्वजनिक परिवहन के भीतर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर और तीखे सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के अजमेरी गेट जा रही एक चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ चालक और कंडक्टर द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला प्रकाश में आया है।
पुलिस द्वारा दर्ज मामले के अनुसार, पीड़िता नोएडा जाने के उद्देश्य से बस में सवार हुई थी, परंतु ग्रेटर नोएडा के समीप वाहन के मुख्य चालकों ने ही मानवता को तार-तार करते हुए इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद पीड़िता को लगभग 47 किलोमीटर दूर कश्मीरी गेट के समीप फेंक दिया गया। यद्यपि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों दरिंदों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, लेकिन इस घटना ने लगभग 14 वर्ष पूर्व घटे निर्भया कांड के उस भयावह मंजर की यादें ताजा कर दी हैं।
2012 का निर्भया कांड: देश को झकझोरने वाली वह काली रात
16 दिसंबर 2012: राजधानी दिल्ली के दक्षिणी इलाके में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा अपने मित्र के साथ एक निजी बस में सवार हुई थी। बस के भीतर मौजूद छह दरिंदों ने उसके साथ वीभत्स सामूहिक दुष्कर्म किया और अमानवीय बर्बरता की सीमाएं पार कर दीं। गंभीर रूप से घायल पीड़िता ने 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के बाद देश भर में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसके फलस्वरूप कानून में बड़े और कड़े संशोधन किए गए। परंतु इसके बावजूद सार्वजनिक वाहनों में दरिंदगी का यह सिलसिला नहीं रुका।
वर्ष 2013: कानून सख्त होने के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रही थीं घटनाएं
12 जनवरी 2013 (गुरदासपुर, पंजाब): निर्भया कांड के एक माह के भीतर गुरदासपुर में बस से अपने गांव लौट रही 29 वर्षीय महिला को बस चालक व परिचालक ने अगवा कर लिया और सुनसान स्थान पर ले जाकर पांच अन्य साथियों के साथ मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
जनवरी 2013 (मुंबई, महाराष्ट्र): मुंबई के एक स्कूल बस के भीतर चार वर्षीय मासूम बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न की गंभीर घटना सामने आई, जिसमें पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज किया।
15 मार्च 2013 (इंदौर, मध्य प्रदेश): देवास से इंदौर जा रही एक निजी बस में सवारी उतर जाने के बाद 37 वर्षीय महिला को अकेली पाकर चालक, कंडक्टर व उसके साथी ने बस को सुनसान जगह ले जाकर उसके साथ हैवानियत की। तीनों आरोपी बाद में पकड़े गए।
13 अप्रैल 2013 (सुल्तानपुरी, दिल्ली): घर के बाहर खड़ी चार्टर्ड बस के चालक ने 10 वर्षीय मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर बस के अंदर बंद कर दिया और यौन उत्पीड़न किया। आरोपी पर पोक्सो कानून के तहत कार्रवाई हुई।
6 सितंबर 2013 (बदलापुर, महाराष्ट्र): ठाणे जिले के एक स्कूल परिसर में खड़ी बस की पिछली सीट पर चार वर्षीय बच्ची के साथ बस क्लीनर संदीप केरवे ने यौन हमला किया। आरोपी को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर गिरफ्तार कर लिया।
वर्ष 2014 से 2015: लिफ्ट देने के बहाने और स्कूल बसों में मासूमों को बनाया शिकार
16 मार्च 2014 (धारूहेड़ा, हरियाणा): लिफ्ट देने के नाम पर 36 वर्षीय महिला को बस में बैठाकर चालक और उसके साथी ने असलहे के बल पर सुनसान इलाके में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया।
29 मार्च 2014 (अंबरनाथ, महाराष्ट्र): स्कूल बस के भीतर सात वर्षीय मासूम छात्रा के साथ स्कूल के ही 32 वर्षीय खेल शिक्षक ने घिनौनी करतूत की, जिसके बाद पुलिस ने पोक्सो कानून में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया।
23 अगस्त 2015 (बक्सा, असम): गोरेश्वर में बस यात्रा समाप्त होने के बाद अकेली बची 13 वर्षीय आदिवासी बच्ची को दो युवकों ने अपनी हवस का शिकार बनाया और सुनसान स्थान पर फेंक दिया।
16 सितंबर 2015 (भोपाल, मध्य प्रदेश): मिनी बस के भीतर 43 वर्षीय महिला को बंधक बनाकर चालक और उसके दो साथियों की मदद से कंडक्टर ने दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
5 नवंबर 2015 (होसकोटे, कर्नाटक): काम पर जा रही 19 वर्षीय युवती को मिनी बस में अकेला पाकर चालक रवि ने क्लीनर मंजूनाथ को स्टीयरिंग सौंप दी और युवती के साथ दरिंदगी की। दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
वर्ष 2016 से 2017: दिव्यांग महिला से लेकर नवजात की हत्या तक की खौफनाक वारदातें
1 फरवरी 2016 (पुष्प विहार, दिल्ली): भीषण ठंड से बचाव के लिए निजी बस में शरण लेने वाली 30 वर्षीय मूक-बधिर महिला के साथ बस के भीतर दुष्कर्म किया गया, जिसे स्थानीय बच्चे की सूझबूझ से पुलिस ने मौके पर आरोपी को दबोच लिया।
7 मार्च 2016 (बरेली, उत्तर प्रदेश): शीशगढ़ इलाके में 28 वर्षीय महिला को उसके 14 दिन के नवजात शिशु के साथ बस से दोबारा खींचकर चालक व परिचालक ने सामूहिक दुष्कर्म किया। इस दौरान दरिंदों ने नवजात को नीचे फेंक दिया जिससे उसकी मौत हो गई। 2022 में अदालत ने दोनों को 20-20 साल की कैद की सजा सुनाई।
6 मई 2016 (कोडरमा, झारखंड): अकेली बची 20 वर्षीय युवती को बस का मुख्य रास्ता बदलकर सुनसान जगह ले जाया गया और चालक-परिचालक ने हैवानियत की।
5 जून 2017 (ओमलूर, तमिलनाडु): परिजनों से विवाद के बाद बस में रुकी 15 वर्षीय किशोरी के साथ बस चालक, कंडक्टर और दो साथियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। चारों आरोपियों पर पोक्सो में मामला दर्ज हुआ।
27 जून 2017 (नागभीड़, महाराष्ट्र): चंद्रपुर में चलती बस के अंदर 19 वर्षीय युवती के साथ यौन उत्पीड़न का वीडियो सीसीटीवी में कैद हुआ, जिसके आधार पर आरोपी रवींद्र बावनथड़े को पकड़ा गया।
वर्ष 2018 से 2020: लक्जरी बसों और स्लीपर कोचों में बढ़ता अपराध का दायरा
5 मार्च 2018 (उत्तर कोलकाता, पश्चिम बंगाल): तीन वर्षीय मासूम को टॉफी का लालच देकर खड़ी लक्जरी बस में ले जाकर 45 वर्षीय क्लीनर ने यौन हमला किया। बच्ची के भाई के शोर मचाने पर ग्रामीणों ने आरोपी को दबोचा।
8 जुलाई 2019 (पुरी, ओडिशा): बस में अपना स्टॉप छूट जाने के कारण फंसी 15 वर्षीय आदिवासी किशोरी को बस हेल्पर नारायण मलिक ने झांसा देकर बस में रोका और रात भर उसके साथ दरिंदगी की।
8 दिसंबर 2019 (कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश): स्कूल बस में 15 वर्षीय छात्रा के साथ चालक द्वारा यौन उत्पीड़न किया गया, जिसे लड़की के पिता (जो उसी बस में अटेंडेंट थे) ने देख लिया और पुलिस को सूचित किया।
25 दिसंबर 2019 (राजगढ़, मध्य प्रदेश): ब्यावरा बस स्टैंड पर खड़ी बस के भीतर 15 वर्षीय किशोरी के साथ हेल्पर ने दुष्कर्म किया जबकि चालक बाहर पहरा देता रहा।
17 जून 2020 (लखनऊ-मथुरा मार्ग, उत्तर प्रदेश): एसी स्लीपर बस में अपने दो बच्चों के साथ सफर कर रही 25 वर्षीय महिला के साथ तड़के 2 से 3 बजे के बीच चालक ने दुष्कर्म किया। उस समय बस में दर्जनों यात्री सो रहे थे।
वर्ष 2021 से 2023: स्कूल बसों से लेकर अंतरराज्यीय स्लीपर कोचों में दरिंदगी
3 फरवरी 2021 (खारघर, नवी मुंबई): खड़ी बस के भीतर 19 वर्षीय युवती के साथ दो व्यक्तियों द्वारा दुष्कर्म का मामला सामने आया।
20 सितंबर 2021 (दिल्ली-यूपी मार्ग): अपनी मां के साथ यात्रा कर रही 14 वर्षीय किशोरी के साथ बस कंडक्टर और हेल्पर ने रात के अंधेरे में दुष्कर्म किया।
12 मार्च 2022 (धार, मध्य प्रदेश): कुक्षी से मनावर जा रही महिला का स्टॉप जानबूझकर पार कर सुनसान जगह पर बस रोककर कंडक्टर ने दुष्कर्म किया।
7 जून 2022 (बेतिया, बिहार): पटना जाने वाली बस में 17 वर्षीय नाबालिग को नशीला पेय पिलाकर चार बस कर्मियों ने सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य वारदात को अंजाम दिया।
8 सितंबर 2022 (भोपाल, मध्य प्रदेश): साढे तीन वर्ष की नर्सरी की छात्रा के साथ स्कूल बस चालक ने यौन हमला किया, जिसमें बस की महिला अटेंडेंट को भी सह-आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया।
16 नवंबर 2022 (शिवपुरी, मध्य प्रदेश): 22 वर्षीय यात्री महिला को डरा-धमकाकर बस की पिछली सीट पर ले जाकर कंडक्टर धर्मेंद्र लोधी ने दुष्कर्म किया।
19 नवंबर 2023 (जयपुर, राजस्थान): 40 वर्षीय महिला को अगवा कर निजी बस के भीतर चालक राजेंद्र कुमार द्वारा दुष्कर्म करने का मामला दर्ज हुआ।
19 नवंबर 2023 (जाजपुर, ओडिशा): 16 वर्षीय छात्रा को बहला-फुसलाकर स्लीपर बस में ले जाकर 45 वर्षीय व्यक्ति ने दुष्कर्म किया।
दिसंबर 2023 (यूपी-जयपुर मार्ग): राजस्थान की ओर जा रही बस में 20 वर्षीय दलित महिला के साथ दो चालकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म का मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा।
वर्ष 2024 से 2026: उत्तराखंड डिपो, डिपो की खड़ी बसों और हालिया घटनाओं का सच
8 जनवरी 2024 (भरतपुर, राजस्थान): जयपुर से भरतपुर जा रही बस में यात्रा कर रही 25 वर्षीय विवाहिता के साथ बयाना पहुंचने पर कंडक्टर जितेंद्र सिंह गुर्जर ने दुष्कर्म किया।
12 अगस्त 2024 (देहरादून, उत्तराखंड): आईएसबीटी देहरादून पर खड़ी उत्तराखंड रोडवेज की सरकारी बस में दिल्ली से आई 16 वर्षीय किशोरी के साथ चालक, कंडक्टर व कर्मचारियों समेत 5 लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया।
9 फरवरी 2025 (फरीदाबाद, हरियाणा): 56 वर्षीय घरेलू कामगार महिला को लिफ्ट के बहाने बस में बैठाकर चालक व कंडक्टर ने सुनसान जगह पर दुष्कर्म किया।
25 फरवरी 2025 (पुणे, महाराष्ट्र): स्वारगेट बस डिपो में पुलिस थाने से महज 100 मीटर दूर खड़ी महाराष्ट्र परिवहन की शिवशाही बस के भीतर 26 वर्षीय महिला के साथ दत्तात्रय गाडे ने दुष्कर्म किया।
31 मार्च 2025 (दावणगेरे, कर्नाटक): मंदिर से लौट रही महिला को अकेली पाकर चालक, कंडक्टर व हेल्पर बस को वीराने में ले गए और सामूहिक दुष्कर्म किया।
11 मई 2026 (रानी बाग-नांगलोई, दिल्ली): निजी स्लीपर बस में महिला के साथ चालक व कंडक्टर द्वारा सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया।
4 अगस्त 2026 (ग्रेटर नोएडा-दिल्ली): ग्रेटर नोएडा से अजमेरी गेट जा रही स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग से चालक व कंडक्टर द्वारा 47 किलोमीटर लंबे सफर में हैवानियत की गई और पीड़िता को कश्मीरी गेट पर फेंक दिया गया।
यह पूरी समयसीमा यह स्पष्ट दर्शाती है कि केवल कठोर कानून बना देने से सार्वजनिक परिवहन सुरक्षित नहीं हो जाता। बस चालकों व परिचालकों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन, वाहनों में सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता, जीपीएस ट्रैकिंग और रात के समय कड़ी पुलिस पेट्रोलिंग जैसे बुनियादी कदम जब तक धरातल पर कड़ाई से लागू नहीं होंगे, तब तक देश की बेटियां सफर के दौरान खुद को असुरक्षित महसूस करती रहेंगी।

