Chandauli News: चंदौली जनपद में मुख्यमंत्री द्वारा महिलाओं, वृद्धजनों और आम यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के दावे हवा हवाई देखने को मिले। जिले में रोडवेज बसों की कमी यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
चंदौली डिपो के नाम पर करीब 51 बसें आवंटित होने के बावजूद मुख्यालय पर यात्रियों को पर्याप्त रोडवेज बसें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसका सबसे अधिक खामियाजा महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
शुक्रवार को मुख्यालय पर कई बहनें अपने घर जाने के लिए रोडवेज बस का इंतजार करती रहीं, लेकिन काफी देर तक इंतजार के बाद भी उन्हें एक भी रोडवेज बस के दर्शन नहीं हुए। बसों के अभाव में यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। निजी बस संचालकों की मनमानी का आलम यह है कि यात्रियों से मनमाना किराया वसूले जाने के साथ ही क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जा रहा है।
स्थिति इतनी खराब है कि कई यात्री निजी बसों की छत पर बैठकर यात्रा करने को मजबूर नजर आते हैं। इससे हादसे की आशंका भी बनी रहती है। खासकर महिलाओं और वृद्ध यात्रियों के लिए यह स्थिति और अधिक असुविधाजनक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चंदौली डिपो के नाम पर 51 बसों का आवंटन होने के बाद भी इनका समुचित संचालन धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। कुछ रोडवेज बसें ही मुगलसराय से वाराणसी तक आगमन और प्रस्थान कर रही हैं, जबकि चंदौली मुख्यालय से अन्य क्षेत्रों के लिए यात्रियों को पर्याप्त बस सेवा नहीं मिल पा रही है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा महिलाओं और वृद्ध महिलाओं सहित आम जनता को सुगम एवं सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही जाती रही है। रक्षा बंधन के पर्व पर महिलाओं को रोडवेज बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ना सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को उजागर करता है।
यात्रियों ने परिवहन विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि चंदौली डिपो के नाम पर आवंटित बसों का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि महिलाओं, बुजुर्गों और आम यात्रियों को निजी वाहनों की मनमानी से राहत मिल सके।
इस संबंध में रोडवेज विभाग के एआरएम सूबेदार सिंह ने बताया कि चंदौली में डिपो नहीं होने से रोडवेज बसों के संचालन में असुविधा हो रही है हालांकि वर्तमान समय में 10 बसे चल रही है लेकिन कैंट पर अधिक भीड़ होने के कारण उन बसों को कैंट बुला लिया गया है,जिससे जनपद के यात्रियों को असुविधा होती होगी। सबसे बड़ी बात है कि राजघाट पुल से रोडवेज बसों को नहीं चलने दिया जाता है जिससे बनारस से चंदौली तक रोडवेज चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

