Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story

China Canada Relations: कनाडा में चीन के विरोध में प्रदर्शन, उइगरों के दमन का मुद्दा फिर गरमाया

Newstrack 4 days ago

China Canada Relations: चीन के विदेश मंत्री वांग यी के कनाडा पहुंचने पर, एक प्रमुख उइगर अंतरराष्ट्रीय अधिकार संगठन ने कनाडा सरकार से अपील की है कि वह चीन के मानवाधिकार उल्लंघनों पर खुलकर बात करे और बिना जवाबदेही तय किए चीन के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश न करें।

वांग यी की कनाडा यात्रा

वांग यी की यह तीन दिन की यात्रा 28 से 30 मई तक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश व्यापार और रणनीतिक समझौतों के जरिए आपसी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। करीब दस साल में यह पहली बार है जब कोई चीनी विदेश मंत्री कनाडा दौरे पर आया है। कनाडा स्थित उइगर राइट्स एडवोकेसी प्रोजेक्ट (यूआरएपी) ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और विदेश मंत्री अनीता आनंद से अपील की कि वे चीनी विदेश मंत्री के साथ बैठक में पूर्वी तुर्किस्तान, जिसे चीन का शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र भी कहा जाता है, में उइगर लोगों की बड़े पैमाने पर हिरासत और निगरानी का मुद्दा उठाएं।

मानवाधिकार संगठनों का विरोध

संगठन ने यह भी कहा कि कनाडाई नेता जबरन मजदूरी, सप्लाई चेन में हो रहे शोषण और कनाडा में उइगर कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार समर्थकों को निशाना बनाने वाली चीन की बढ़ती दबाव की राजनीति पर भी बात करें। यूआरएपी का कहना है कि अगर कनाडा चीन के साथ नए समझौते और रणनीतिक साझेदारी आगे बढ़ाता है, जबकि उइगरों के खिलाफ कथित 'नरसंहार' और 'सीमा पार दमन' जारी है, तो इससे कनाडा की अपनी मानवाधिकार प्रतिबद्धताएं कमजोर पड़ सकती हैं।

संगठन ने कनाडा और चीन के बीच कानून लागू करने वाले विभागों के कुछ 'गोपनीय' सहयोग समझौतों और रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) के उन समझौतों पर भी चिंता जताई, जिनमें जानकारी साझा करने, जांच में मदद और चीनी सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल शामिल है।

आलोचकों का हवाला देते हुए संगठन ने कहा कि इन समझौतों में पारदर्शिता और संसद की निगरानी की कमी है, जिससे कमजोर समुदायों के लिए खतरा बढ़ सकता है। यूआरएपी के कार्यकारी निदेशक मेहमत तोहती ने कहा, "जब तक उइगर लोग जेलों में बंद हैं, परिवार बिछड़े हुए हैं और दमन के पीड़ित न्याय की तलाश में हैं, तब तक हम चीन सरकार के साथ रिश्तों को सामान्य नहीं बना सकते। आर्थिक सहयोग कभी भी मानवाधिकारों की कीमत पर नहीं होना चाहिए।"

हुसैन सेलिल के मामले को फिर उठाने की मांग

यूआरएपी ने कनाडाई नागरिक हुसैन सेलिल के मामले पर भी फिर से ध्यान देने की मांग की। हुसैन एक उइगर-कनाडाई नागरिक हैं, जो 2006 से चीन में कैद हैं। उन्हें उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान हिरासत में लिया गया था और बाद में चीन को सौंप दिया गया।

संगठन के मुताबिक, उनके परिवार और समर्थक लंबे समय से चीन पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह उनकी कनाडाई नागरिकता को मान्यता नहीं देता और उन्हें उचित काउंसलर सहायता भी नहीं मिल रही। तोहती ने कहा, "हुसैन सेलि‍ल की लगातार कैद इस बात की याद दिलाती है कि जब सरकार मानवाधिकारों से ज्यादा कूटनीतिक सुविधा को महत्व देती है, तब कनाडाई नागरिक भी सुरक्षित नहीं रहते।"

वीजा-फ्री यात्रा व्यवस्था पर भी जताई आपत्ति

इसके अलावा, यूआरएपी ने चीन के साथ बढ़ रही वीजा-फ्री यात्रा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। संगठन का कहना है कि जब तक चीन उइगरों पर अत्याचार, असंतुष्टों की आवाज दबाने और विदेशों में रहने वाले समुदायों को डराने-धमकाने का काम जारी रखता है, तब तक इस तरह की नजदीकी बढ़ाना सही नहीं होगा।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Newstrack Journalism Hindi