Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
CJP Protest वाली रिया अहीर की Bigg Boss 20 में एंट्री पर मचा बवाल, ट्रोलिंग के बीच दी सफाई

CJP Protest वाली रिया अहीर की Bigg Boss 20 में एंट्री पर मचा बवाल, ट्रोलिंग के बीच दी सफाई

Newstrack 2 weeks ago

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में एक महिला श्रद्धालु के अनोखे दान की कहानी अब नया मोड़ ले चुकी है। तमिलनाडु के कोयंबटूर से अयोध्या पहुंचीं एस. नागलक्ष्मी ने रामलला के लिए 10 हजार रुपये दान किए, जबकि मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी और सुविधाएं बढ़ाने के लिए 4 करोड़ रुपये का चेक सौंपा।

लेकिन अब सामने आई जानकारी ने इस पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिस बैंक खाते से 4 करोड़ रुपये का चेक जारी किया गया है, उसमें सिर्फ ₹3 का बैलेंस बताया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह 4 करोड़ रुपये का चेक क्लियर होगा? फिलहाल इसकी अंतिम स्थिति बैंक की क्लियरिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

रामलला के लिए 10 हजार, कर्मचारियों के लिए 4 करोड़

एस. नागलक्ष्मी रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंची थीं। उन्होंने मंदिर के लिए 10 हजार रुपये का दान दिया। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं में सुधार के लिए ₹4 करोड़ का चेक दिया।

महिला ने यह भी अनुरोध किया कि इतनी बड़ी राशि का इस्तेमाल मंदिर में सेवा देने वाले कर्मचारियों के हित में किया जाए। इस अनोखे दान की चर्चा रामजन्मभूमि परिसर में भी हुई। चेक दिए जाने की रसीद सामने आने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है।

अब आया नया ट्विस्ट- खाते में सिर्फ ₹3!

शुरुआत में यह मामला महिला की बड़ी श्रद्धा और कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता के तौर पर सामने आया था। लेकिन अब रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मंदिर ट्रस्ट की ओर से चेक बैंक खाते में जमा कराने से पहले खाते की जानकारी जुटाई गई तो उसमें न्यूनतम बैलेंस सिर्फ ₹3 बताया गया।

यानी 4 करोड़ रुपये के चेक और खाते में मौजूद रकम के बीच भारी अंतर है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि चेक के वास्तव में बाउंस होने की पुष्टि तभी होगी, जब उसे बैंकिंग प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किया जाए और बैंक उसे भुगतान के लिए स्वीकार या अस्वीकार करे।

महिला ने क्यों दिया था सशर्त चेक?

रिपोर्टों के अनुसार, नागलक्ष्मी ने 4 करोड़ रुपये की राशि को मंदिर कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं पर खर्च करने की शर्त रखी थी। वह इस संबंध में ट्रस्ट की ओर से लिखित आश्वासन चाहती थीं।

बताया गया है कि ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने इसे सशर्त भेंट का मामला बताया। महिला इसके बाद वापस लौट गईं, लेकिन उन्होंने 4 करोड़ रुपये का चेक वापस नहीं लिया। अब ट्रस्ट के सामने यह सवाल भी है कि इस सशर्त दान को किस तरह स्वीकार किया जाए और इसकी शर्तों को कैसे लागू किया जाए।

अगर चेक बाउंस हुआ तो क्या होगा?

यहां एक जरूरी कानूनी बात समझना जरूरी है। सिर्फ चेक बाउंस होने का मतलब यह नहीं है कि तुरंत महिला को जेल हो जाएगी।

भारत में अपर्याप्त धनराशि के कारण चेक के अनादर से जुड़े मामलों में Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 लागू हो सकती है, लेकिन इसके लिए कानून में निर्धारित कई शर्तें पूरी होना जरूरी है। इसमें चेक का वैध अवधि में प्रस्तुत होना, बैंक से अनादर की सूचना मिलने के बाद निर्धारित समय में लिखित डिमांड नोटिस देना और नोटिस मिलने के बाद निर्धारित अवधि में भुगतान न करना जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

धारा 138 के तहत दोष सिद्ध होने पर दो साल तक की जेल, चेक की रकम के दोगुने तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

क्या महिला पर धोखाधड़ी का केस भी होगा?

यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि महिला के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला निश्चित रूप से दर्ज होगा। इसके लिए यह देखना होगा कि चेक किस उद्देश्य से जारी किया गया, संबंधित पक्षों के बीच क्या कानूनी दायित्व था और क्या किसी तरह की धोखाधड़ी की मंशा का प्रमाण सामने आता है।

इसलिए फिलहाल इसे "धोखाधड़ी का मामला" कहना उचित नहीं होगा। चेक की वास्तविक स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई तथ्यों तथा संबंधित संस्थाओं के फैसले पर निर्भर करेगी।

क्या CIBIL Score खराब हो जाएगा?

चेक बाउंस होने को सीधे तौर पर यह कहना कि इससे किसी व्यक्ति का CIBIL स्कोर "पूरी तरह खराब" हो जाएगा, सही नहीं है। किसी व्यक्ति की क्रेडिट प्रोफाइल पर प्रभाव परिस्थितियों और संबंधित वित्तीय रिपोर्टिंग पर निर्भर करता है।

इसलिए इस मामले में फिलहाल सबसे अहम सवाल चेक का क्लियर होना या बाउंस होना है, न कि पहले से यह मान लेना कि महिला का क्रेडिट रिकॉर्ड खराब हो गया है।

अब ट्रस्ट के सामने क्या विकल्प?

फिलहाल इस मामले में तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं:

4 करोड़ रुपये का चेक वास्तव में बैंक में प्रस्तुत होता है या नहीं।

बैंक चेक को क्लियर करता है या अपर्याप्त धनराशि के कारण वापस करता है।

सशर्त दान को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट क्या निर्णय लेता है।

अगर चेक बैंक में प्रस्तुत किया जाता है और अपर्याप्त धनराशि के कारण लौटता है, तो आगे की कार्रवाई कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होगी।

आस्था, बड़ा दान और अब बैंक बैलेंस का सवाल

एस. नागलक्ष्मी का मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने मंदिर के लिए अपेक्षाकृत छोटी राशि-10 हजार रुपये-दी, लेकिन कर्मचारियों के कल्याण के लिए 4 करोड़ रुपये का चेक दिया। अब खाते में कथित तौर पर सिर्फ ₹3 होने की खबर ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

हालांकि, जब तक बैंक की ओर से चेक के अंतिम स्टेटस की पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे बाउंस हुआ चेक कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल नजर इस बात पर है कि राम मंदिर ट्रस्ट इस सशर्त चेक को लेकर क्या फैसला करता है और बैंकिंग प्रक्रिया में इसका क्या परिणाम निकलता है।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Newstrack Journalism Hindi