
Iran internet blackout: मध्य पूर्व में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का सबसे बड़ा असर आम ईरानी नागरिकों पर पड़ रहा है। इस युद्ध के बीच ईरान में लंबे समय से चल रहा इंटरनेट ब्लैकआउट अब एक गंभीर मानवीय और सामाजिक संकट का रूप ले चुका है।
इंटरनेट की निगरानी करने वाली संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में लगाया गया यह इंटरनेट प्रतिबंध 20 दिनों से अधिक समय तक जारी रहा, जो आधुनिक डिजिटल समाज में सबसे लंबे राष्ट्रीय स्तर के इंटरनेट ब्लैकआउट्स में से एक माना जा रहा है।
यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि आज के दौर में इंटरनेट लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, संचार और बैंकिंग जैसी कई जरूरी सेवाएं इंटरनेट पर निर्भर हैं। ऐसे में अचानक पूरे देश का वैश्विक नेटवर्क से कट जाना करोड़ों लोगों के लिए भारी परेशानी का कारण बन गया है। यहां तक कि ईरानी नववर्ष 'नवरोज' के दौरान भी देश के लोग दुनिया से कटे रहे, जिससे त्योहार का उत्साह भी फीका पड़ गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंटरनेट बंद होने के बाद लोग वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) के जरिए कनेक्ट होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने इन सेवाओं पर भी कड़ी रोक लगा दी है। नतीजतन, अधिकांश VPN काम नहीं कर रहे हैं और आम लोगों के पास बाहरी दुनिया से जुड़ने का कोई प्रभावी माध्यम नहीं बचा है। कुछ लोग स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट इंटरनेट का सहारा लेने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ईरान में यह सेवा आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित है। रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग चोरी-छिपे स्टारलिंक डिश का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक सैकड़ों सैटेलाइट डिश जब्त की जा चुकी हैं और ऐसे उपयोगकर्ताओं की तलाश जारी है।
इस बीच, सरकार ने एक सीमित घरेलू नेटवर्क यानी 'इंट्रानेट' को सक्रिय कर रखा है। यह एक तरह का निजी इंटरनेट होता है, जिसका उपयोग केवल चुनिंदा लोगों और संस्थानों को ही करने दिया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी एजेंसियों, कुछ मीडिया संगठनों और करीब 10 हजार लोगों को ही इस इंट्रानेट की सुविधा मिल रही है। यह संख्या देश की कुल आबादी के मुकाबले बेहद कम है, जिससे यह साफ होता है कि आम जनता लगभग पूरी तरह डिजिटल रूप से अलग-थलग पड़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह ब्लैकआउट न केवल तकनीकी दृष्टि से बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी बेहद गंभीर है। लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से कारोबार प्रभावित हो रहे हैं, सूचना का प्रवाह रुक गया है और लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी सीमित हो गई है। ईरान में चल रहा यह इंटरनेट ब्लैकआउट आधुनिक दौर में सूचना नियंत्रण का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। जहां एक ओर सरकार सुरक्षा और नियंत्रण का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर आम जनता इसकी भारी कीमत चुका रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह प्रतिबंध कब हटता है और देश फिर से वैश्विक डिजिटल दुनिया से जुड़ पाता है या नहीं।
