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EPFO New Rule: PF वालों के लिए खुशखबरी! 15 जुलाई से पहले खाते में आएगा ब्याज, EPFO ने बदल दिए बड़े नियम

EPFO New Rule: PF वालों के लिए खुशखबरी! 15 जुलाई से पहले खाते में आएगा ब्याज, EPFO ने बदल दिए बड़े नियम

Newstrack 4 days ago

EPFO New Rule: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने देशभर के करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत भरी घोषणा की है। लंबे वक़्त से पीएफ ब्याज का इंतजार कर रहे खाताधारकों के लिए अच्छी खबर है कि 15 जुलाई तक लगभग 34 करोड़ पीएफ खातों में 8.25 प्रतिशत ब्याज जमा किया जाएगा।

इसके तहत करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये का ब्याज सीधे खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इसके साथ ही EPFO ने अपनी सेवाओं को तेज, पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए CITES 2.01 (Centralised IT Enabled Services) नामक नया केंद्रीकृत आईटी सिस्टम भी लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था से पीएफ क्लेम, बैलेंस, ट्रांसफर और पेंशन जैसी सेवाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएंगी।

15 जुलाई तक खातों में पहुंचेगा ब्याज

EPFO के अनुसार, इस बार कर्मचारियों को पीएफ ब्याज के लिए पहले की तरह कई महीनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। संगठन ने जानकारी दी है कि 15 जुलाई तक सभी पात्र खातों में 8.25 प्रतिशत की दर से ब्याज जमा करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इससे करोड़ों कर्मचारियों को समय पर ब्याज का लाभ मिलेगा और वित्तीय योजनाएं बनाने में भी आसानी होगी।

CITES 2.01 से बदल जाएगी EPFO की पूरी व्यवस्था

EPFO ने देशभर के सभी पीएफ रिकॉर्ड को अब एक केंद्रीकृत डेटाबेस में स्थानांतरित कर दिया है। पहले प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय का अलग-अलग डेटा होता था, जिसके कारण कई सेवाओं में देरी होती थी। अब सभी रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे।

इस बदलाव के बाद सदस्य देश के किसी भी अधिकृत EPFO कार्यालय से अपनी सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। इससे रिकॉर्ड खोजने, अपडेट करने और क्लेम प्रोसेस करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।

अब एक ही पोर्टल पर मिलेंगी सभी सुविधाएं

नई प्रणाली लागू होने के बाद कर्मचारियों को कई सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। अब सदस्य आसानी से अपना PF बैलेंस, क्लेम स्टेटस, सर्विस रिकॉर्ड और पेंशन से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे।

सबसे खास बात यह है कि क्लेम दाखिल करने से पहले ही सिस्टम दस्तावेजों या जानकारी में किसी भी कमी की पहचान कर देगा। इससे गलत क्लेम जमा होने और उसके रिजेक्ट होने की संभावना काफी कम हो जाएगी।

ऑटो क्लेम की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये

EPFO ने ऑटो क्लेम सेटलमेंट को भी पहले से अधिक आसान बना दिया है। अब पूरी तरह KYC सत्यापित खातों के लिए 5 लाख रुपये तक के एडवांस क्लेम स्वतः स्वीकृत किए जा सकेंगे। पहले यह सीमा केवल 1 लाख रुपये थी।

यदि किसी क्लेम में अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता होगी, तो सदस्य को ऑनलाइन सूचना दी जाएगी और वह घर बैठे डिजिटल माध्यम से जवाब भी दे सकेगा। इससे कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

PF निकासी के नियम हुए और सरल

EPFO ने पीएफ निकासी से जुड़े पुराने 13 नियमों को घटाकर केवल तीन प्रमुख श्रेणियों में बदल दिया है। इसके अलावा सदस्य अब अपनी पात्रता के अनुसार कुल पीएफ बैलेंस का 75 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे।

नई व्यवस्था में क्लेम स्वीकृत होने के दिन ही राशि सीधे बैंक खाते में भेज दी जाएगी। साथ ही ब्याज की गणना अंतिम स्वीकृति तिथि तक की जाएगी। पहले ब्याज केवल पिछले महीने के अंतिम दिन तक ही जोड़ा जाता था।

नौकरी बदलने वालों को भी बड़ी राहत

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों को मिलेगा। यदि कर्मचारी का UAN आधार से लिंक है, तो नौकरी बदलने पर उसका पीएफ अकाउंट अपने आप नए नियोक्ता से जुड़ जाएगा।

अब इसके लिए अलग से ट्रांसफर आवेदन देने या पुराने एवं नए नियोक्ता की मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। कर्मचारी की पूरी सेवा अवधि भी स्वतः ट्रांसफर हो जाएगी, जिससे भविष्य में पेंशन और अन्य लाभों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

पेंशनधारकों को भी मिलेगा फायदा

नई डिजिटल व्यवस्था का लाभ EPS पेंशनधारकों को भी मिलेगा। अब वे देश के किसी भी EPFO कार्यालय में लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकेंगे। साथ ही Centralised Pension Payment System (CPPS) लागू होने के बाद पेंशन भारत के किसी भी बैंक खाते में प्राप्त की जा सकेगी, चाहे पेंशन का मामला किसी भी क्षेत्रीय कार्यालय से संबंधित क्यों न हो।

कर्मचारियों के लिए क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि CITES 2.01 लागू होने से EPFO की सेवाएं पहले से कहीं अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनेंगी। समय पर ब्याज जमा होना, ऑनलाइन क्लेम प्रक्रिया, ऑटो ट्रांसफर, आसान निकासी और केंद्रीकृत रिकॉर्ड जैसी सुविधाएं करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित होंगी। इससे न केवल प्रक्रिया में देरी कम होगी, बल्कि कर्मचारियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। आने वाले समय में यह व्यवस्था देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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