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F-35 और Su-57 को टक्कर देगा 'भारत का ये घातक मिसाइल', अब 25 KM दूर से ही दुश्मन होगा ढेर, IAF ने लगाई बड़ी छलांग

F-35 और Su-57 को टक्कर देगा 'भारत का ये घातक मिसाइल', अब 25 KM दूर से ही दुश्मन होगा ढेर, IAF ने लगाई बड़ी छलांग

Newstrack 2 weeks ago

MiG-29 Upgrade India: भारतीय वायुसेना (IAF) अपने पुराने लेकिन भरोसेमंद लड़ाकू विमान मिग-29 को अब और ज्यादा ताकतवर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। दशकों से देश की हवाई सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहा यह विमान अब आधुनिक तकनीक से लैस होकर दुश्मनों के लिए और भी खतरनाक बनने जा रहा है।

ताजा जानकारी के मुताबिक, मिग-29 यूपीजी (UPG) फ्लीट को अत्याधुनिक ASRAAM (Advanced Short Range Air-to-Air Missile) से लैस किया जाएगा, जिससे इसकी मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

पुराने प्लेटफॉर्म को नई ताकत देने की रणनीति

अक्सर यह सवाल उठता है कि भारत को नए लड़ाकू विमानों जैसे राफेल या F-35 खरीदने चाहिए या नहीं। लेकिन वायुसेना की रणनीति साफ है- मौजूदा विमानों को ही इतना आधुनिक बना दिया जाए कि वे दुश्मन के लिए चुनौती बन जाएं। इसी सोच के तहत मिग-29 को अपग्रेड किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए ASRAAM मिसाइल के इंटीग्रेशन और परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

हाइब्रिड टेक्नोलॉजी से बनेगा 'किलर मशीन'

मिग-29 में सिर्फ नई मिसाइल ही नहीं जोड़ी जा रही, बल्कि पूरे सिस्टम को अपग्रेड किया जा रहा है। इसमें नए लॉन्चर, उन्नत रडार सिस्टम और पायलटों की विशेष ट्रेनिंग शामिल है। सोवियत डिजाइन वाले इस विमान में अब यूरोपीय और भारतीय तकनीक का मिश्रण देखने को मिलेगा, जिससे यह एक आधुनिक 'हाइब्रिड किलर मशीन' बन जाएगा। यह दुश्मन के रडार से बचते हुए तेजी से हमला करने में सक्षम होगा।

ASRAAM: हवा में सटीक और तेज वार

ASRAAM एक अत्याधुनिक शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसे यूरोपीय कंपनी MBDA ने विकसित किया है। इसकी खासियत इसकी लंबी रेंज, तेज रफ्तार और सटीक निशाना है। जहां पहले मिग-29 में लगी R-73 मिसाइल की रेंज करीब 10-15 किलोमीटर थी, वहीं ASRAAM 25 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हमला कर सकती है। इसकी "फायर एंड फॉरगेट" तकनीक पायलट को अतिरिक्त सहूलियत देती है, क्योंकि एक बार लक्ष्य तय होने के बाद मिसाइल खुद ही उसे ट्रैक करती है। इसकी गति ध्वनि की गति से तीन गुना यानी मच 3 से भी अधिक है।

चीन और पाकिस्तान के लिए बढ़ेगी चुनौती

भारत के इस कदम से पड़ोसी देशों की चिंता बढ़ना तय है। चीन अपने लड़ाकू विमानों में PL-10 मिसाइल का उपयोग करता है, जबकि पाकिस्तान भी इसी तकनीक के एक्सपोर्ट वर्जन का इस्तेमाल कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ASRAAM अपनी बेहतर तकनीक और अधिक रेंज के कारण इन मिसाइलों से कहीं ज्यादा प्रभावी साबित होगी। इससे भारतीय वायुसेना की ताकत में खासा इजाफा होगा।

'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बढ़ावा

इस परियोजना की एक खास बात यह भी है कि भारत केवल मिसाइल खरीदने तक सीमित नहीं है। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और MBDA के बीच हुए समझौते के तहत इन मिसाइलों की असेंबली और टेस्टिंग भारत में ही की जाएगी। हैदराबाद में इसके लिए विशेष सुविधा विकसित की जा रही है। इससे न केवल आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में मिसाइलों की उपलब्धता सुनिश्चित रहेगी।

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