Faridabad school student death: हरियाणा के फरीदाबाद में 11वीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा की स्कूल की तीसरी मंजिल से गिरकर मौत का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। डबुआ-गाजीपुर रोड स्थित नवोदय विद्या निकेतन स्कूल की छात्रा जानवी की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है।
छात्रा के परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार , उसे कथित तौर पर सजा के तौर पर कई घंटे तेज धूप में खड़ा किया गया था। मामले को लेकर पुलिस और शिक्षा विभाग से जवाब मांगा गया है।
छात्रा को धूप में खड़ा करने का आरोप
मृतका के पिता प्रमोद कुमार का आरोप है कि कक्षा में बिरयानी खाने को लेकर हुए विवाद के बाद एक शिक्षिका ने उनकी बेटी को कथित तौर पर करीब चार घंटे तक तेज धूप में खड़ा रहने की सजा दी थी। परिवार का कहना है कि इस घटना से छात्रा मानसिक रूप से आहत हुई और इसके बाद उसने स्कूल की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी।
गंभीर रूप से घायल छात्रा को उपचार के लिए बीके अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार और स्थानीय स्तर पर स्कूल प्रबंधन की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे।
NHRC ने लिया मामले का संज्ञान
घटना को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने कहा कि बच्चों को स्कूल में शारीरिक या मानसिक दंड देना कानून के तहत प्रतिबंधित है। उन्होंने शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून की धारा 17 और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम की धारा 75 का उल्लेख करते हुए मामले में कार्रवाई की आवश्यकता बताई।
आयोग ने संबंधित पुलिस और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर की प्रक्रिया को लेकर जवाब मांगा है।
स्कूल प्रिंसिपल ने आरोपों से किया इनकार
वहीं, स्कूल के प्रिंसिपल आरके शर्मा ने छात्रा को सजा देने के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि छात्रा बाथरूम जाने का बहाना बनाकर कक्षा से बाहर गई थी। स्कूल प्रबंधन की ओर से लगाए गए इन दावों और छात्रा के परिवार के आरोपों के बीच अब जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
CCTV फुटेज और छात्रों के बयान अहम
डबुआ थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब NHRC के हस्तक्षेप के बाद स्कूल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज, घटनाक्रम से जुड़े रिकॉर्ड और सहपाठियों के बयानों को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि छात्रा के साथ घटना से पहले क्या हुआ था और स्कूल परिसर में उसकी गतिविधियों का पूरा क्रम क्या था।
यह घटना स्कूलों में बच्चों के साथ अनुशासन के नाम पर किए जाने वाले व्यवहार और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। मामले में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि छात्रा की मौत के लिए किन परिस्थितियों और लोगों की जिम्मेदारी तय होती है।

