Nepal Flood Disaster Row: हिमालय की वादियों में बसे पड़ोसी देश नेपाल में एक भीषण प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर के अचानक खिसकने और टूटने की वजह से पहाड़ियों से बर्फ, पत्थर, कीचड़ और पानी का ऐसा खौफनाक सैलाब आया जिसने पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया।
इस प्रलयकारी फ्लैश फ्लड में कई गांव बह गए और सड़कें तथा पुल पूरी तरह नष्ट हो गए। इस भीषण त्रासदी में अब तक 470 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
12 घंटे से भी कम समय में मदद
इस भीषण त्रासदी की खबर मिलते ही भारत ने अपनी दरियादिली और पड़ोसी धर्म का फर्ज निभाते हुए रिकॉर्ड समय में सहायता सामग्री पहुंचाई। आपदा आने के महज 12 घंटे के भीतर भारतीय वायुसेना का सी-130जे मालवाहक विमान 10 टन आपातकालीन राहत सामग्री लेकर काठमांडू के लिए रवाना हो गया।
बुधवार रात को ही पहली खेप नेपाल पहुंच गई। इसके बाद गुरुवार और शुक्रवार तक भारत ने दवाइयां, भोजन और अन्य जरूरी सामान मिलाकर कुल 62 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंचा दी। भारत की इस त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि किसी भी बड़े संकट के समय भारत ही क्षेत्र का सबसे पहला मददगार बनकर सामने आता है।
पीएम मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और इस आपदा में मारे गए लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। प्रधानमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में भारत हर संभव मानवीय और तकनीकी सहायता देने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसी बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में पूरा भारत देश और वहां की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
दुनिया भर से मदद का ऐलान
नेपाल में मची इस तबाही के बाद दुनिया के कई बड़े देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने आर्थिक और तकनीकी मदद देने की घोषणाएं की हैं। अमेरिका ने 5 लाख डॉलर और आपदा सलाहकार भेजने की बात कही है, तो वहीं ब्रिटेन ने 50 लाख पाउंड और विश्व बैंक ने भारी आर्थिक मदद की पेशकश की है। चीन ने भी आपातकालीन सहायता और नकदी देने का आश्वासन दिया है। हालांकि, जब दूसरे देश कागजी प्रक्रियाओं और मदद जुटाने की व्यवस्था करने में लगे हुए थे, तब भारत ने भौतिक रूप से सबसे पहले राहत सामग्री जमीन पर पहुंचाकर पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर दी है।

