
Noida Minor Gangrape Case: ग्रेटर नोएडा में एक नाबालिग लड़की के साथ बस ड्राइवर और कंडक्टर द्वारा कथित यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी एनएचआरसी (NHRC) ने कड़ा स्वतः संज्ञान लिया है।
घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के साथ-साथ कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
4 अगस्त को क्या हुआ था?
यह घटना 4 अगस्त की बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली नाबालिग लड़की अपने परिवार के एक सदस्य से मिलने नोएडा के सेक्टर 63 जाने के लिए घर से निकली थी
सफर के दौरान वह अपने निर्धारित स्टॉप पर उतरने के बजाय गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक के पास उतर गई। इसके बाद नोएडा सेक्टर 63 जाने के लिए उसने एक बस पकड़ी।
आरोप है कि इसी बस में ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ कथित तौर पर दरिंदगी की। आरोपियों पर वाहन के भीतर ही नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम देने का आरोप है।
दिल्ली में छोड़कर फरार हुए आरोपी
आरोप है कि वारदात के बाद आरोपियों ने नाबालिग को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास छोड़ दिया गया और आरोपी वहां से फरार हो गए।
मामला सामने आने के बाद अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है।
NHRC ने 3 बड़े अधिकारियों को भेजा नोटिस
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्टों में सामने आए तथ्यों पर चिंता जताई है। आयोग का कहना है कि अगर रिपोर्ट में सामने आए तथ्य सही हैं, तो यह नाबालिग के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और कानून के राज पर भी बड़ा आघात है।
मामले में एनएचआरसी ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा के पुलिस कमिश्नर और मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक को औपचारिक नोटिस जारी किया है।
तीनों अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है।
जांच से लेकर पीड़िता की सुरक्षा तक मांगा जवाब
एनएचआरसी ने अधिकारियों से मामले में अब तक हुई पुलिस जांच की अद्यतन स्थिति बताने को कहा है। इसके साथ ही पीड़िता के स्वास्थ्य, पुनर्वास और सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी गई है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि नियमानुसार पीड़िता को दिए गए मुआवजे का क्या विवरण है।
घटना के बाद लोगों में भारी गुस्सा
मामला सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और आम लोगों में भारी रोष है। सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
लोगों की मांग है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी इस घटना पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एक नाबालिग बच्ची के साथ स्लीपर बस में ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक सामूहिक दुष्कर्म हुआ और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
उन्होंने कहा कि बस नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली का रिंग रोड और बॉर्डर पार करती हुई आगे बढ़ गई, लेकिन किसी चेकपोस्ट पर उसे रोका नहीं गया।

बस में लगे पर्दों पर भी राहुल गांधी ने उठाया सवाल
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में बस की सीटों पर लगे पर्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पर्दों की वजह से बस के अंदर क्या हो रहा था, यह बाहर से दिखाई नहीं देता था।
उन्होंने सवाल उठाया कि निर्भया कांड के बाद इतने साल गुजरने और इतनी घटनाएं सामने आने के बावजूद ऐसी बसों की जांच और निगरानी से जुड़े नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा है।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि आखिर कितनी महिलाओं और बच्चियों के साथ ऐसी घटनाएं होने के बाद केंद्र और राज्य सरकारें व्यवस्था को ठीक करेंगी।
दिल्ली और यूपी पुलिस की जवाबदेही पर सवाल
राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या अमित शाह के अधीन दिल्ली पुलिस और आदित्यनाथ के अधीन यूपी पुलिस की जवाबदेही तय की जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस अपराध पर भी पर्दा डाल दिए जाने की आशंका है।
अब एनएचआरसी की रिपोर्ट पर नजर
नाबालिग से कथित दरिंदगी के इस मामले में अब एनएचआरसी की ओर से मांगी गई रिपोर्ट अहम हो गई है। आयोग ने पुलिस जांच की स्थिति, पीड़िता के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के साथ ही मुआवजे की जानकारी भी मांगी है।
दिल्ली, नोएडा और मैनपुरी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर जवाब देना है। ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि जांच की मौजूदा स्थिति क्या है और पीड़िता की सुरक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास और मुआवजे को लेकर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए गए हैं।

