Musallahpur Hat Patna Story:संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की प्रतिष्ठित परीक्षा हो, सेना में भर्ती की चुनौती हो या पुलिस और अन्य सरकारी नौकरियों की प्रतिस्पर्धी परीक्षाएं, बिहार के युवा हमेशा बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।
यही कारण है कि देश के प्रशासनिक, सैन्य और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर बिहार की मजबूत मौजूदगी दिखाई देती है। इन सफलताओं के पीछे जिन शैक्षणिक केंद्रों की बड़ी भूमिका रही है, उनमें पटना का मुसल्लहपुरहाट सबसे प्रमुख नाम है। इन दिनों खान सर के कोचिंग संस्थान पर कथित हमले और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई के कारण यह इलाका फिर चर्चा में है। लेकिन मुसल्लहपुरहाट का अस्तित्व किसी विवाद से कहीं ज्यादा अपनी खूबियों के चलते लोकप्रिय है। इस जगह की खासियत की बात करें तो पिछले 25 वर्षों में यह क्षेत्र हजारों युवाओं के सपनों को दिशा देने वाला बिहार का सबसे बड़ा कोचिंग हब बन चुका है। जहां हर साल दूर-दराज के जिलों से छात्र अपने भविष्य को गढ़ने की मंसा के साथ पहुंचते हैं।
कम खर्च, बेहतर शैक्षणिक माहौल और प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यापक तैयारी की सुविधा ने इसे आज भी लाखों अभ्यर्थियों के लिए उम्मीद और अवसर का सबसे बड़ा केंद्र बना रखा है। आखिर कैसे एक सामान्य बाजार वाला इलाका शिक्षा की राजधानी बन गया और क्यों आज भी गरीब छात्रों की पहली पसंद बना हुआ है, आइए जानते हैं।
मुसल्लहपुरहाट क्यों चर्चा में है?
हाल ही में चर्चित शिक्षक खान सर ने अपने कोचिंग संस्थान पर कथित हमले का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के संचालक रोशन आनंद समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया। मामले की जांच जारी है। इस घटना ने एक बार फिर मुसल्लहपुरहाट के कोचिंग उद्योग, छात्रों की भीड़ और संस्थानों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को चर्चा के केंद्र में ला दिया।
क्या है मुसल्लहपुरहाट का इतिहास?
मुसल्लहपुरहाट पटना के पुराने इलाकों में गिना जाता है। पहले यह क्षेत्र स्थानीय हाट-बाजार और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाना जाता था। समय के साथ यहां छात्रावास, लॉज और किराये के मकानों की संख्या बढ़ी। वर्ष 2000 के आसपास जब इस इलाके में जमीन अपेक्षाकृत सस्ती थी, तब कई शिक्षकों ने यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थान शुरू किए। समय के साथ-साथ बढ़ती लोकप्रियता और शिक्षा के बढ़ते स्तर के परिणामस्वरूप धीरे-धीरे इन संस्थानों में छात्रों की संख्या बढ़ती गई और आसपास के महेंद्रू, भीखना पहाड़ी, नया टोला, बहादुरपुर, बाजार समिति, कोइरी टोला, लंगड़टोली और नहर पार तक कोचिंग संस्थानों का विस्तार हो गया। आज यह पूरा इलाका बिहार के सबसे बड़े शैक्षणिक केंद्रों में शामिल माना जाता है।
25 वर्षों में कोचिंग हब बन चुका है ये इलाका
करीब 25 साल पहले जहां कुछ ही कोचिंग संस्थान थे, वहीं आज मुसल्लहपुरहाट और आसपास के दो किलोमीटर के दायरे में 200 से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। हर साल बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश से हजारों छात्र यहां पहुंचते हैं। कोचिंग उद्योग के बढ़ने से यहां लॉज, पीजी, पुस्तक दुकानें, स्टेशनरी, भोजनालय, चाय की दुकानें और छोटे कारोबार भी तेजी से विकसित हुए। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिला और इलाके की पहचान पूरी तरह बदल गई।
क्यों बन रहा है गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों की पहली पसंद
मुसल्लहपुरहाट की सबसे बड़ी ताकत इसकी कम खर्च वाली व्यवस्था है। यहां आज भी छात्रों को अपेक्षाकृत कम किराये पर कमरे और लॉज मिल जाते हैं। कई छात्र एक ही कमरे में मिलकर रहते हैं, जिससे रहने का खर्च और कम हो जाता है। कम कीमत में भोजन, पुस्तकें, नोट्स, लाइब्रेरी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी लगभग हर सुविधा एक ही इलाके में उपलब्ध होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र सबसे अधिक यहीं आते हैं।
किन परीक्षाओं की तैयारी के लिए मशहूर है यह इलाका?
मुसल्लहपुरहाट विशेष रूप से सरकारी नौकरियों की तैयारी कराने वाले संस्थानों के लिए प्रसिद्ध है। यहां सिपाही भर्ती, दारोगा, रेलवे, शिक्षक भर्ती, बीपीएससी, एसएससी, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बड़े स्तर पर कराई जाती है।
इसी वजह से यहां पूरे साल छात्रों की चहल-पहल बनी रहती है और परीक्षा सीजन में भीड़ कई गुना बढ़ जाती है।
खान सर के बाद और बढ़ी पहचान
कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई के बढ़ते चलन ने मुसल्लहपुरहाट के कई शिक्षकों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। इनमें सबसे चर्चित नाम खान सर का है। जिनके पढ़ाने के सरल तरीके ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना दिया।
इसके अलावा ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के संचालक रोशन आनंद, गुरु रहमान, द प्लेटफॉर्म एजुकेशन सेंटर, मेंटर एडसर्व, कृष्णा कोचिंग सेंटर, मेहता गणित, आनंद रीजनिंग क्लासेज और भारतीय अकादमी जैसे कई संस्थान भी बड़ी संख्या में छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं।
एक पूरी छात्र अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरे हैं ये संस्थान
मुसल्लहपुरहाट में हर दिन हजारों छात्र पढ़ाई, लाइब्रेरी, कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं। इनके कारण यहां किराये के मकान, हॉस्टल, टिफिन सेवा, पुस्तक बाजार, फोटोकॉपी सेंटर, इंटरनेट कैफे और छोटे व्यापार तेजी से फल-फूल रहे हैं।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस छात्र आधारित अर्थव्यवस्था ने हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया है। यही कारण है कि यह इलाका सिर्फ कोचिंग सेंटरों का समूह नहीं, बल्कि शिक्षा पर आधारित एक बड़े आर्थिक तंत्र के रूप में विकसित हो चुका है।
पटना के दूसरे कोचिंग हब से कितना अलग?
पटना में बोरिंग रोड, कंकड़बाग और सगुना मोड़ भी तेजी से कोचिंग केंद्र के रूप में विकसित हुए हैं। हालांकि इन इलाकों में रहने और पढ़ाई का खर्च अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है। इसके विपरीत मुसल्लहपुरहाट आज भी कम खर्च में बेहतर तैयारी की सुविधा उपलब्ध कराने वाला इलाका माना जाता है। यही वजह है कि ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र सबसे पहले इसी क्षेत्र का रुख करते हैं।

