Haryana News: हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन बुधवार को कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक मोर्चा खोल दिया। कानून व्यवस्था, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावे की चोरी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा की ओर पैदल मार्च किया।
इस दौरान पुलिस और कांग्रेस विधायकों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विधायकों को रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में कई जगह बैरिकेडिंग की और बल प्रयोग किया। पार्टी का दावा है कि इस दौरान कई विधायकों को चोटें भी आई हैं। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विधानसभा के अंदर भी जमकर हंगामा हुआ और कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
विधानसभा की ओर मार्च करते कांग्रेस विधायक
मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायक कई मुद्दों को लेकर विधानसभा की तरफ पैदल मार्च करने निकले। कांग्रेस ने इस मार्च के जरिए सरकार के सामने अपनी नाराजगी दर्ज कराने की कोशिश की। कांग्रेस का कहना है कि मार्च का मुख्य मुद्दा राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और नीट आंदोलन के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कार्रवाई था।
पार्टी ने सरकार से इन मामलों में जवाब मांगने की बात कही। मार्च के दौरान पुलिस ने कांग्रेस विधायकों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए। इसके बाद पुलिस और विधायकों के बीच बहस और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ देर बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
हुड्डा ने पुलिस पर लगाया बल प्रयोग का आरोप
हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सोशल मीडिया पर मार्च की तस्वीरें और वीडियो साझा किए। इनमें पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग कर विधायकों को रोकने की कोशिश दिखाई दे रही है। हुड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक जब राम मंदिर चढ़ावे की चोरी और छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई के विरोध में आवाज उठाने जा रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान कई विधायकों को चोटें आईं।
हुड्डा ने सरकार की कार्रवाई को दमनकारी बताते हुए कहा कि देश के नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। उनके मुताबिक, किसी भी जनप्रतिनिधि के खिलाफ बल प्रयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही नहीं है।
'पुलिस की वर्दी में गुंडे भेजे गए'
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके और दूसरे कांग्रेस विधायकों के साथ जिस तरह धक्का-मुक्की की गई, उससे ऐसा लग रहा था जैसे सरकार ने पुलिस की वर्दी में गुंडे भेज रखे हों। उन्होंने जंतर-मंतर और विधानसभा मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि जनता के मुद्दों पर आवाज उठाना विपक्ष का अधिकार है।
हुड्डा ने सरकार से पुलिस और लाठियों के दम पर विधानसभा चलाना बंद करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को विधानसभा भवन में प्रवेश करने से रोकना केवल विधायकों का नहीं, बल्कि हरियाणा की जनता का अपमान है।
हुड्डा ने बताया 'काला दिन'
कांग्रेस नेता ने पूरे घटनाक्रम को संविधान और लोकतंत्र के लिए 'काला दिन' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया। हुड्डा ने कहा कि चाहे दिल्ली का जंतर-मंतर हो या विधानसभा का मार्च, जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अधिकार है।
उन्होंने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर खबर लिखे जाने तक हरियाणा सरकार और भाजपा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
सदन के अंदर भी विपक्ष ने किया हंगामा
विधानसभा के बाहर हुए घटनाक्रम का असर सदन की कार्यवाही पर भी दिखाई दिया। कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के गेट पर अपने साथ हुई कथित धक्का-मुक्की और बदसलूकी का मुद्दा सदन में उठाया।
हुड्डा ने आरोप लगाया कि विधानसभा के गेट पर सुरक्षाकर्मियों ने कांग्रेस विधायकों के साथ गलत व्यवहार किया और उन्हें अपमानित किया। इस मुद्दे पर विपक्षी विधायक लगातार सरकार से जवाब मांगते रहे। हंगामा बढ़ने के बाद विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण को सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
सड़क से सदन तक सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश
मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से साफ है कि विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस ने एक तरफ विधानसभा के बाहर पैदल मार्च के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया, वहीं दूसरी तरफ सदन के अंदर भी इन मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। फिलहाल, पहले दिन का सत्र हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच रहा। आने वाले दिनों में कांग्रेस और सरकार के बीच इन मुद्दों को लेकर टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

