West Bengal Assembly Election Results 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुस्लिम वोटबैंक हमेशा निर्णायक रहा है। करीब 30% आबादी के समर्थन से वाम दलों ने 34 साल तक सत्ता संभाली, और उनके पतन के बाद यही वोट बड़े पैमाने पर ममता बनर्जी के साथ चला गया।
लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में यह समीकरण बदलता दिख रहा है। मुस्लिम वोटों में बिखराव के संकेत मिल रहे हैं, जिसका सीधा असर तृणमूल कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ा है। शुरुआती रुझानों में ममता बनर्जी की पकड़ कमजोर होती दिख रही है, जबकि भाजपा पहली बार राज्य में बहुमत की ओर बढ़ती नजर आ रही है।
मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में यह बदलाव साफ दिख रहा है। जहां पहले टीएमसी को मजबूत समर्थन मिलता था, वहीं इस बार भाजपा को बढ़त मिलना वोटों के ध्रुवीकरण और बंटवारे का संकेत है।
विश्लेषकों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे कई क्षेत्रीय नेताओं और दलों की भूमिका रही है। हुमायूं कबीर, जिन्होंने अलग पार्टी बनाकर कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे, मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने में सफल रहे। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भले बड़ी जीत हासिल करती न दिख रही हो, लेकिन उसने एक वैकल्पिक राजनीतिक नैरेटिव जरूर खड़ा किया, जिससे टीएमसी के प्रति असंतोष बढ़ा।
इसके अलावा, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) और पीरजादा नौशाद सिद्दीकी जैसे नेताओं ने भी खासकर ग्रामीण इलाकों में असर डाला। इन दलों और नेताओं ने यह धारणा बनाने की कोशिश की कि टीएमसी मुस्लिमों को सिर्फ वोटबैंक के रूप में देखती है। इस नैरेटिव का असर चुनावी रुझानों में दिखाई दे रहा है।
कुल मिलाकर, मुस्लिम वोटबैंक का यह बिखराव ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है और यही कारण है कि बंगाल की सत्ता इस बार उनके हाथों से फिसलती नजर आ रही है।

