
Trump Iran deadline ultimatum: मिडिल ईस्ट की जंग अब उस मुकाम पर पहुंच गई है जहां हर एक मिनट कीमती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'मंगलवार रात 8 बजे' (ईस्टर्न टाइम) तक का आखिरी अल्टीमेटम दिया है।
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को नहीं खोला और समझौता नहीं किया, तो वे ईरान के हर पुल और पावर प्लांट को मलबे में तब्दील कर देंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या ट्रंप एक बार फिर अपनी डेडलाइन बढ़ाकर 'यू-टर्न' लेंगे, या इस बार सच में ईरान पर 'कयामत की बारिश' होगी?
ट्रंप का 'इंफ्रास्ट्रक्चर डे' और 'हवा में' मंडराता बारूद
व्हाइट हाउस के गलियारों में इस संभावित हमले को 'इंफ्रास्ट्रक्चर डे' का नाम दिया गया है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के ऊर्जा ढांचे को तबाह करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। ट्रंप ने अपनी रैलियों और सोशल मीडिया पर साफ कहा है कि अगर बात नहीं बनी तो "ईरान के पास न पुल बचेंगे, न पावर प्लांट और न ही कुछ और।" वे इसे 'नरक की आग' (Hell) कह रहे हैं। हालांकि, रक्षा अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप अभी भी एक 'ग्रैंड डील' की ताक में हैं, जो उन्हें बिना युद्ध के ही विजेता बना दे।
डेडलाइन का सस्पेंस: यू-टर्न की कितनी उम्मीद?
डोनाल्ड ट्रंप का इतिहास रहा है कि वे आखिरी वक्त तक दबाव बनाते हैं और फिर चौंकाने वाला फैसला लेते हैं। इससे पहले भी उन्होंने 23 मार्च और फिर 6 अप्रैल की डेडलाइन बदली थी। सूत्रों का कहना है कि उनकी टीम, जिसमें जेडी वैंस और जेरेड कुशनर शामिल हैं, समझौते के पक्ष में है। अगर ईरान बातचीत में जरा भी 'ईमानदारी' दिखाता है, तो ट्रंप हमले को रोककर बातचीत की खिड़की खुली रख सकते हैं। लेकिन नेतन्याहू और खाड़ी देशों का भारी दबाव है कि ईरान को अब और मोहलत न दी जाए।
ईरान की तैयारी: 'ह्यूमन चेन' और 'पाताल' में सुरक्षा
इधर तेहरान ने भी घुटने टेकने से इनकार कर दिया है। ईरानी अधिकारियों ने युवाओं से अपील की है कि वे पावर प्लांट्स के चारों ओर 'ह्यूमन चेन' (मानव श्रृंखला) बनाएं ताकि हमलों को रोका जा सके। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह ट्रंप के अल्टीमेटम के आगे नहीं झुकेगा और उसे किसी अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) के बजाय युद्ध के स्थायी खात्मे की गारंटी चाहिए। इजरायली सेना ने तो ईरानी नागरिकों को ट्रेन तक न चलाने की चेतावनी दे दी है, जो इस बात का संकेत है कि हमला किसी भी वक्त हो सकता है।
होर्मुज की नाकेबंदी और दुनिया की नजरें
पूरी दुनिया की नजरें 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर टिकी हैं। यह वो संकरा समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। ईरान ने इसे बंद कर रखा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। ट्रंप की मुख्य शर्त यही है कि इस रास्ते को तुरंत खोला जाए। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुतरेस ने चेतावनी दी है कि नागरिक ढांचे पर हमला करना 'युद्ध अपराध' हो सकता है, लेकिन ट्रंप ने दो टूक कह दिया है कि उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है।
ब सबकी सांसें मंगलवार रात 8 बजे की उस टिक-टिक पर अटकी हैं। क्या यह रात ईरान के लिए 'पत्थर युग' की शुरुआत होगी, या ट्रंप की कूटनीति एक बार फिर युद्ध को टालने का कोई रास्ता निकाल लेगी? आने वाले कुछ घंटे इतिहास बदलने वाले हैं।
