Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
Jhansi News: बुंदेलखंड के साहित्य में इतिहास बोध पर शोध परियोजना को मंजूरी

Jhansi News: बुंदेलखंड के साहित्य में इतिहास बोध पर शोध परियोजना को मंजूरी

Newstrack 2 weeks ago

बुंदेलखंड के साहित्य में इतिहास बोध पर शोध परियोजना को मंजूरी (Photo- Social Media)

Approval of Research Project on History Perception in Literature of Bundelkhand

Jhansi News: बुंदेलखंड के साहित्य में इतिहास बोध को लेकर एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना को भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद ने मंजूरी दी है।

परिषद की ओर से प्रोफेसर मुन्ना तिवारी के शोध प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए परियोजना के लिए तीन लाख रुपये की अग्रिम ग्रांट भी मंजूर की गई है। शोध कार्य की प्रगति और गुणवत्ता के आधार पर आने वाले चरणों में ग्रांट की राशि बढ़ाए जाने की संभावना है।

वास्तविकता और कल्पना के संबंधों का होगा अध्ययन

बुंदेलखंड के साहित्य में इतिहास बोध : वास्तविकता और कल्पना विषय पर स्वीकृत इस शोध परियोजना की जिम्मेदारी प्रोफेसर मुन्ना तिवारी को सौंपी गई है। प्रोफेसर तिवारी पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड एप्लाइड सोशल साइंसेज के समन्वयक और हिंदी विभाग के आचार्य हैं।

परियोजना के तहत बुंदेलखंड के साहित्य में मौजूद इतिहास बोध का अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही ऐतिहासिक घटनाओं और पात्रों के साहित्यिक पुनर्सृजन तथा वास्तविकता और कल्पना के बीच के संबंधों को भी शोध के माध्यम से समझने का प्रयास किया जाएगा। इस शोध के जरिए बुंदेलखंड की समृद्ध साहित्यिक और ऐतिहासिक विरासत को नए अकादमिक दृष्टिकोण से देखने की कोशिश की जाएगी।

कुलपति ने दी बधाई

शोध परियोजना को मंजूरी मिलने पर कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडेय ने प्रोफेसर मुन्ना तिवारी को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की साहित्यिक और ऐतिहासिक विरासत पर केंद्रित इस तरह के शोध कार्य अकादमिक जगत को नई दिशा देने के साथ बुंदेलखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

साहित्य और इतिहास के अंतर्संबंधों पर नए आयाम

प्रोफेसर मुन्ना तिवारी ने कहा कि इस शोध परियोजना के माध्यम से बुंदेलखंड के साहित्य और इतिहास के अंतर्संबंधों को लेकर नए शोध आयाम विकसित होंगे। इसके साथ ही क्षेत्र की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, अध्ययन और दस्तावेजीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Newstrack Journalism Hindi