
Karachi News: पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर कराची इस वक्त एक ऐसी अनजानी दहशत के साये में है, जिसने लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। कल्पना कीजिए कि आप अपने घर की छत पर टहल रहे हों या सड़क पर बस का इंतजार कर रहे हों, और अचानक एक गोली आपके सीने को चीरती हुई निकल जाए, जबकि आस-पास कोई हमलावर दिखाई भी न दे।
कराची में इन दिनों कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर देखने को मिल रहा है। 'अंधाधुंध फायरिंग' की घटनाओं ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है। आलम यह है कि लोग अब न तो गलियों में सुरक्षित हैं और न ही अपने बेडरूम के अंदर। पिछले महज 72 घंटों के भीतर आधा दर्जन से ज्यादा लोग इन 'अनाम गोलियों' का शिकार हो चुके हैं, जिससे कराची की सड़कों पर मौत का सन्नाटा पसर गया है।
आसमान से बरसती मौत
कराची की ये घटनाएं किसी फिल्मी विलेन की साजिश जैसी लग रही हैं क्योंकि इन गोलियों का कोई ठिकाना नहीं है। पुलिस और प्रशासन इस बात से हैरान हैं कि आखिर ये गोलियां चल कहाँ से रही हैं। सबसे दिल दहला देने वाली घटना 22 साल के अयान के साथ हुई, जो कोरंगी इलाके में अपने काम से जा रहा था और अचानक एक गोली उसके सीने में आकर धंस गई। इसके अलावा हिंसा की इस सनक ने मासूम बच्चों और बेगुनाह बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा। चाकीवाड़ा में 12 साल का मुजम्मिल बस स्टॉप पर खड़ा था जब उसे गोली लगी, वहीं पापोश नगर में 74 साल के नसीर साहब भी इस रहस्यमयी फायरिंग का शिकार हो गए। शहर के अलग-अलग कोनों जैसे लियाकताबाद, ओरंगी टाउन और नॉर्थ कराची से लगातार ऐसी ही खबरें आ रही हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर उनका गुनाह क्या है कि उन्हें घर बैठे गोली मार दी जा रही है?
पुलिस की लाचारी और जनता का बढ़ता गुस्सा
हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक तरफ लाशें गिर रही हैं और लोग घायल हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कराची पुलिस का दावा है कि शहर में अपराध दर में कमी आई है। पुलिस का यह बयान जलती आग में घी डालने जैसा काम कर रहा है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां इन गोलियों के 'सोर्स' यानी स्रोत का पता लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं। किसी को नहीं पता कि यह किसी गैंगवार का हिस्सा है, हवाई फायरिंग की लापरवाही है या फिर कोई सिरफिरा शिकारी शहर को निशाना बना रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे जांच कर रहे हैं, लेकिन अपराधी उनकी पकड़ से कोसों दूर हैं। कानून-व्यवस्था की इस धज्जियां उड़ती देख स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर सरकार और एजेंसियां अपनी नींद से नहीं जागीं, तो कराची पूरी तरह श्मशान बन जाएगा।
दहशत के साये में कराची
कराची के नागरिक अब एक-दूसरे को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दे रहे हैं। 4 अप्रैल से 6 अप्रैल के बीच हुई इन 9 बड़ी घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। महिलाओं से लेकर युवाओं तक, हर कोई इस वक्त खौफ में है। नजमा और जमीला बेगम जैसी महिलाएं अपने ही मोहल्लों में घायल हो गईं, जो बताता है कि अपराधी कितने बेखौफ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति न केवल मानवीय संकट है, बल्कि पाकिस्तान की गिरती कानून-व्यवस्था का सबसे बड़ा सबूत भी है। अगर तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं की गई और इन अज्ञात हमलावरों को बेनकाब नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में कराची में गृह युद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। फिलहाल तो कराची का हर नागरिक आसमान की तरफ देखकर यही दुआ कर रहा है कि अगली गोली उसके नाम की न हो।
