
KP Sharma Oli Hospitalized: नेपाल की राजनीति में पिछले 48 घंटों के भीतर जो कुछ भी हुआ है, उसने पूरे हिमालयी राष्ट्र की नींव हिलाकर रख दी है। नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के पद संभालने के महज 24 घंटे के भीतर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार कर लिया गया।
लेकिन रविवार को इस कहानी में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब हिरासत में लिए गए केपी शर्मा ओली की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें दिल की धड़कन तेज होने (Palpitations) की शिकायत के बाद आनन-फानन में काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। ओली की गिरफ्तारी और फिर उनकी नाजुक सेहत ने नेपाल में राजनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
अस्पताल में भर्ती ओली
त्रिभुवन हॉस्पिटल के डॉक्टरों की एक विशेष टीम ओली की हालत पर पल-पल नजर रख रही है। अस्पताल द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, 72 वर्षीय ओली का स्वास्थ्य काफी जटिल है। उनका पहले भी किडनी ट्रांसप्लांट हो चुका है और वे वर्तमान में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायराइड और गालस्टोन जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात उनका 'एट्रियल फिब्रिलेशन' है, जिसकी वजह से उनके दिल की धड़कनें अनियंत्रित हो रही हैं। यही वजह है कि जब रविवार को उन्हें जिला अदालत में पेश करना था, तो वे शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हो सके और उन्हें अस्पताल के बिस्तर से ही 'वर्चुअली' जज के सामने पेश होना पड़ा।
अदालत का कड़ा रुख
काठमांडू जिला अदालत के न्यायाधीश आनंद प्रसाद श्रेष्ठ ने रविवार को इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपना फैसला सुनाया। पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की 10 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने फिलहाल पूछताछ के लिए 5 दिन की पुलिस हिरासत की अनुमति दी है। रमेश लेखक को अदालत में सशरीर पेश किया गया, जबकि ओली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। अब अगले पांच दिनों तक नेपाल पुलिस की विशेष टीम इन दोनों दिग्गज नेताओं से उन फैसलों को लेकर कड़ी पूछताछ करेगी, जिन्होंने पिछले साल नेपाल की सड़कों को खून से लाल कर दिया था।
क्या है 'GEN-Z' प्रोटेस्ट का वह खूनी दाग?
यह पूरा मामला पिछले साल 9 सितंबर को हुए 'GEN-Z' प्रदर्शनों से जुड़ा है। उस समय केपी शर्मा ओली देश के प्रधानमंत्री थे और रमेश लेखक गृह मंत्रालय की कमान संभाल रहे थे। युवाओं के इस बड़े आंदोलन को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग किया था, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। मानवाधिकारों के उल्लंघन के इन आरोपों की जांच के लिए सुशीला कार्की के नेतृत्व में एक आयोग बनाया गया था। आयोग की रिपोर्ट ने सीधे तौर पर ओली और लेखक को इस 'दमनकारी कार्रवाई' के लिए जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की सिफारिश की। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर बालेन शाह सरकार ने शनिवार सुबह दोनों को हिरासत में ले लिया।
बालेन शाह का 'हथौड़ा' और नेपाल का भविष्य
नेपाल की राजनीति में बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना और आते ही सबसे ताकतवर कम्युनिस्ट नेता ओली पर हाथ डालना, यह साफ संकेत है कि देश में 'पुराने बनाम नए' की जंग शुरू हो चुकी है। ओली न केवल पूर्व पीएम हैं, बल्कि वे नेपाल की सबसे बड़ी पार्टियों में से एक, यूएमएल (UML) के अध्यक्ष भी हैं। उनके समर्थकों का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है, जबकि सरकार इसे न्याय की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। अब सबकी नजरें अस्पताल की रिपोर्ट और पुलिस की पूछताछ पर टिकी हैं कि क्या ओली जेल जाएंगे या बीमारी उनकी ढाल बनेगी।
