Kerala Election 2026 Seat Prediction: केरल की सियासत अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहाँ सत्ता की चाबी अब सिर्फ 28 सीटों के हाथ में सिमटती दिख रही है। 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान से पहले माहौल इतना गर्म है कि हर रैली, हर बयान और हर गठबंधन इस चुनाव को 'करो या मरो' की जंग बना चुका है।
140 सीटों वाले इस मुकाबले में बहुमत का आंकड़ा 71 है, लेकिन असली खेल उन चुनिंदा सीटों पर सिमट गया है जहाँ LDF और UDF के बीच सीधी टक्कर है, और NDA भी समीकरण बिगाड़ने के मूड में है। यही वजह है कि इस बार न सिर्फ नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं, बल्कि केरल की पारंपरिक राजनीति की दिशा भी बदल सकती है।
तस्वीर यह बनती है, LDF की कोर ताकत अब भी कन्नूर बेल्ट + दक्षिण केरल के कई हिस्से हैं। UDF की सबसे सुरक्षित ताकत मलप्पुरम-IUML बेल्ट + कुछ कांग्रेस पॉकेट हैं। चुनाव का असली फैसला मध्य केरल, वायनाड, पलक्कड़ और तिरुवनंतपुरम शहरी पट्टी में होगा। NDA की वास्तविक प्रासंगिकता त्रिशूर और राजधानी-क्षेत्र में सबसे अधिक है। UDF और LDF, दोनों ने घोषणापत्र में रबर के लिए ₹300 समर्थन मूल्य जैसे कुछ समान वादे किए हैं, जबकि UDF कल्याण योजनाओं के साथ बदलाव के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है जबकि LDF निरंतरता और कल्याण योजनाओं के भरोसे चुनाव लड़ रही है। यानी एक तरफ़ कल्याण के साथ बदलाव का नारा तो दूसरी तरफ़ निरंतरता के साथ कल्याण का भरोसा की लाइन है।
LDF की पक्की या मजबूत सीटें

उदमा, कन्हंगड़, त्रिक्करिपुर, पय्यानूर, कल्लियास्सेरी, धर्मडोम, थलश्शेरी, मट्टनूर, बालुश्शेरी, बेयपोर, मलमपुझा, चेलक्करा, कुन्नमकुलम, गुरुवायूर, नट्टिका, कैपामंगलम, कोडुंगल्लूर, कलामस्सेरी, देविकुलम, अंबलप्पुझा, पथनापुरम।
यह वे सीटें हैं जहाँ या तो CPI(M)-नेतृत्व वाला संगठन बहुत गहरा है, या 2021 का मार्जिन और स्थानीय संरचना अभी भी LDF के पक्ष में मजबूत दिखते हैं। LDF अभी भी "New Kerala", कल्याण, रोजगार, आवास और पेंशन-वृद्धि जैसे वादों पर चुनाव लड़ रहा है।
LDF झुकाव वाली सीटें
तलिपरंबा, अझिकोड, कन्नूर, कुथुपरम्बा, पेराम्ब्रा, शोरनूर, ओट्टापालम, कोंगड, तरूर, अलथूर, मनलूर, वडक्कांचेरी, ओल्लूर, इरिंजलाकुडा, उदुम्बंचोला, कडुथुरुथी, वैकोम, अरूर, चेरथला, कायमकुलम, चेंगन्नूर, अरनमुला, अडूर, करुणागप्पल्ली, चडायमंगलम, कुंडरा, एरविपुरम, चथन्नूर, अटिंगल, नेडुमंगड, वामनपुरम, अरुविक्करा, पारस्सला, कट्टाक्कडा, नेय्याट्टिनकारा।
इन सीटों पर LDF आगे दिखता है, लेकिन कई जगह सत्ता विरोधी रुझान स्थानीय उम्मीदवार या UDF की टैक्टिकल वोटिंग मार्जिन कम कर सकती है। दक्षिण केरल में LDF अभी भी संरचनात्मक रूप से मजबूत है, भले 2024 लोकसभा में UDF ने बढ़त ली हो।
UDF की पक्की याबहुत मजबूत सीटें

कासरगोड, कोंडोट्टी, एरनाड, मंजेरी, पेरिन्थलमन्ना, मलप्पुरम, वेंगरा, वल्लीक्कुन्नु, तिरुरंगाड़ी, पोन्नानी, पुथुप्पल्ली।
यह UDF की रीढ़ वाली सीटें हैं, खासकर मलप्पुरम-IUML प्रभाव क्षेत्र और कुछ कांग्रेस-आधारित पॉकेट में। UDF का घोषणापत्र भी महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा, 5 लाख घर, ₹3000 सामाजिक पेंशन, ₹700 ASHA मजदूरी, ₹300 रबर आधार मूल्य और स्वास्थ्य व युवा योजनाओं पर केंद्रित है। जिससे इन इलाकों में उसकी स्थिति मजबूत हुई है।
UDF की ओर झुकाव वाली सीटें
मंजेश्वरम, इरिक्कुर, पेरावूर, मनंथवाडी, सुल्तान बथेरी, कल्पेट्टा, वटकारा, कोयिलांडी, कोझिकोड नॉर्थ, कोझिकोड साउथ, थिरुवम्बाडी, निलंबूर, वंडूर, मन्कड़ा, तनूर, तिरुर, कोट्टक्कल, त्रिथला, पट्टाम्बी, पेरुम्बवूर, परवूर, एर्नाकुलम, थ्रिक्काकरा, पिरवोम, थोडुपुझा, एट्टुमानूर, कोट्टायम, चंगनाश्शेरी, कंजिराप्पल्ली, अलप्पुझा, हरिपाड, तिरुवल्ला, कोल्लम, वट्टियूरकावु।
इन सीटों में UDF को 2024 लोकसभा की हवा, अल्पसंख्यक-सामुदायिक संगठित समर्थन, शहरी व मध्यमवर्गीय झुकाव, या स्थानीय उम्मीदवार का लाभ मिलता दिख रहा है। वायनाड की सीटों पर पुनर्वास, स्वास्थ्य, सड़क और मानव-वन्यजीव संघर्ष मुख्य मुद्दे हैं।
NDA की संभावित या प्रभाव वाली सीटें
पलक्कड़, त्रिशूर, पुथुक्कड़, कझक्कूट्टम, तिरुवनंतपुरम, नेमोम, कोवलम।
यहाँ NDA को या तो सीधी सीट-संभावना है, या वह LDF-UDF दोनों का समीकरण बिगाड़ने की हालत में है। त्रिशूर में भाजपा की 2024 लोकसभा सफलता ने उसे मनोवैज्ञानिक बढ़त दी है। राजधानी क्षेत्र, खासकर कझक्कूट्टम, नेमोम और तिरुवनंतपुरम, उसके लिए सबसे अहम प्रयोग-क्षेत्र बन गया है।
अनिश्चित सीटें
कुट्टियाड़ी, नादापुरम, एलाथूर, कुन्नमंगलम, कोडुवल्ली, मन्नारकाड, चित्तूर, नेन्मारा, चालाकुडी, अंगमाली, अलुवा, वायपिन, कोच्चि, त्रिप्पुनिथुरा, कुन्नाथुनाड, मुवत्तुपुझा, कोठमंगलम, इडुक्की, पीरुमडे, पाला, कुट्टनाड, मावेलिक्करा, रन्नी, पुनलूर, चावरा, कोट्टारक्करा, वर्कला।
इन सीटों में उम्मीदवार, मतदान प्रतिशत और रणनीतिक मतदान, स्थानीय असंतोष, और तीसरे मोर्चे की काट-सब कुछ अंतिम नतीजे को पलट सकता है। कझक्कूट्टम, कल्पेट्टा, त्रिशूर और राजधानी क्षेत्र की सीटें खास तौर पर रुझान तय करने वाली मानी जा रही हैं।

