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केरल में सियासी भूचाल! UDF की सुनामी में LDF डगमगाया, NDA बना किंगमेकर?

केरल में सियासी भूचाल! UDF की सुनामी में LDF डगमगाया, NDA बना किंगमेकर?

Newstrack 4 days ago

Kerala Assembly Election 2026: केरल विधानसभा चुनाव 2026 एक बार फिर पारंपरिक राजनीति की सीमाओं को तोड़ता दिख रहा है। ताज़ा ज़मीनी संकेतों, पिछले नतीजों और मौजूदा चुनावी हलचल को जोड़कर देखें तो मुकाबला बेहद कड़ा है, लेकिन झुकाव UDF की ओर दिखाई देता है।

LDF अपनी मजबूत पकड़ वाले इलाकों में टिके रहने की कोशिश में है, वहीं NDA कई सीटों पर खेल बिगाड़ने की स्थिति में आ गया है, जिससे यह चुनाव सीधा नहीं, बल्कि त्रिकोणीय तनाव से भरा निर्णायक मुकाबला बन गया है।

केरल की जिला-दर-जिला और फिर 140 विधानसभा सीटों की श्रेणीबद्ध राजनीतिक सूची- यह 'पक्की', 'झुकाव वाली' और 'टॉस-अप' सीटें कोई आधिकारिक सर्वे नहीं हैं। यह 2021 विधानसभा नतीजों, 2024 लोकसभा के विधानसभा-खंड रुझानों, मौजूदा प्रचार, उम्मीदवार-प्रोफ़ाइल, और पिछले कुछ दिनों में दिखे स्थानीय चुनावी संकेतों को जोड़कर किया गया विश्लेषणात्मक चुनावी मानचित्र है।

केरल में लोकसभा और विधानसभा का वोटिंग व्यवहार अलग होता है। इसलिए इसे अंतिम नतीजा नहीं बल्कि सबसे उपयोगी राजनीतिक पढ़ाई समझना चाहिए। केरल में 140 विधानसभा सीटें हैं। मतदान 9 अप्रैल, 2026 को है और मतगणना 4 मई, 2026 को तय है।

कासरगोड

कासरगोड की 5 सीटें, मंजेश्वरम, कासरगोड, उदमा, कन्हंगड़ और त्रिक्करिपुर, उत्तर केरल की मिनी-लैब हैं। मंजेश्वरम में भाजपा की भूमिका साधारण तीसरे नंबर की नहीं। बल्कि समीकरण उलटने वाली है। कासरगोड शहर व उसके आसपास UDF का आधार है; उदमा, कन्हंगड़ और त्रिक्करिपुर में LDF की परंपरागत संगठनात्मक ताकत अधिक दिखाई देती है। इस जिले में मंजेश्वरम टॉस-अप, कासरगोड UDF-झुकाव, और उदमा, कन्हंगड़, त्रिक्करिपुर LDF-झुकाव से पक्की की ओर हैं। यह जिला UDF को लोकसभा जैसी बढ़त दे सकता है, पर विधानसभा में LDF पूरी तरह पीछे नहीं है।

कन्नूर

कन्नूर की 11 सीटें, पय्यानूर, कल्लियास्सेरी, तालीपरंबा, इरिक्कूर, अज़ीकोड, कन्नूर, धर्मडोम, थलश्शेरी, कुट्टुपरंबा, मट्टनूर और पेरावूर, अब भी LDF के सबसे गहरे इलाकों में गिनी जाती हैं। लेकिन पहले जैसी अभेद्य नहीं रहीं। धर्मडोम पिनराई विजयन का क्षेत्र होने के कारण LDF के लिए प्रतिष्ठा-सीट है। तालीपरंबा और नादापुरम जैसे इलाकों में सुरक्षा व बूथ-प्रबंधन को लेकर अदालत तक मामला गया है। और पेरावूर को हालिया रिपोर्टों में हाई-स्टेक्स रीमैच कहा गया है। पय्यानूर, कल्लियास्सेरी, धर्मडोम, मट्टनूर, थलश्शेरी LDF-पक्की/मजबूत, तालीपरंबा, अज़ीकोड, कन्नूर, कुट्टुपरंबा LDF-झुकाव, जबकि इरिक्कूर और पेरावूर UDF-झुकाव हैं। तालीपरंबा को विशेष रूप से टॉस-अप से LDF हल्का झुकाव मान सकते हैं।

वायनाड

वायनाड की 3 सीटें, मनंतवाडी, सुल्तान बथेरी, कल्पेट्टा, 2024 लोकसभा में UDF के लिए बहुत अनुकूल रहीं। लेकिन विधानसभा में मामला इतना सरल नहीं है। कल्पेट्टा में मुंडक्कई-चूरलमला भूस्खलन के बाद पुनर्वास सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है; रिपोर्टें बता रही हैं कि 20 महीने बाद भी पुनर्वास राजनीति का केंद्रीय प्रश्न बना हुआ है। इसलिए यहाँ सहानुभूति, सरकारी डिलीवरी और स्थानीय नेतृत्व, तीनों साथ चल रहे हैं। मनंतवाडी UDF-झुकाव, सुल्तान बथेरी UDF-झुकाव, कल्पेट्टा टॉस-अप/UDF-हल्का झुकाव। वायनाड का समग्र मूड UDF के साथ दिखता है, पर LDF को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

कोझिकोड

कोझिकोड की 13 सीटें, वटकारा, कुट्टियाडी, नादापुरम, कोयिलांडी, पेराम्ब्रा, बालुश्शेरी, एलाथूर, कोझिकोड उत्तर, कोझिकोड दक्षिण, बेयपोर, कून्नमंगलम, कोडुवल्ली, तिरुवंबाडी, मालाबार के सबसे मिश्रित स्वभाव वाली पट्टी हैं। शहर और कस्बे UDF को लाभ दे सकते हैं, पर बेयपोर और कुछ वाम कैडर क्षेत्र LDF को मजबूती देते हैं। नादापुरम को लेकर भी कानूनी व सुरक्षा की खबरें आईं। बेयपोर, बालुश्शेरी LDF-झुकाव, कोझिकोड उत्तर, कोझिकोड दक्षिण, वटकारा, कोयिलांडी, तिरुवंबाडी UDF-झुकाव, कुट्टियाडी, नादापुरम, पेराम्ब्रा, एलाथूर, कून्नमंगलम, कोडुवल्ली टॉस-अप/हल्का झुकाव वाली सीटें हैं। इस जिले में UDF वोट में आगे हो सकता है। लेकिन सीट का अंतर बहुत बड़ा होना निश्चित नहीं।

मलप्पुरम

मलप्पुरम की 16 सीटें, कोंडोट्टी, एरनाड, निलंबूर, वंडूर, मंजेरी, पेरिन्थलमन्ना, मंकडा, मलप्पुरम, वेंगरा, वल्लीक्कुन्नु, तिरुरंगाड़ी, तनूर, तिरुर, कोट्टक्कल, थवनूर, पोनानी, UDF की रीढ़ हैं, खासकर IUML के संगठन और मुस्लिम समाज के मजबूत झुकाव के कारण। यहाँ भाजपा की सीधी जीत की संभावना कम है। लेकिन उसका उभार मुस्लिम वोट को और अधिक समेकित कर सकता है। वेंगरा, वल्लीक्कुन्नु, तिरुरंगाड़ी, पोनानी, मलप्पुरम, मंजेरी, कोंडोट्टी, एरनाड UDF-पक्की/बहुत मजबूत, निलंबूर, पेरिन्थलमन्ना, मंकडा, तनूर, तिरुर, कोट्टक्कल, थवनूर UDF-झुकाव, और वंडूर UDF-झुकाव लेकिन LDF की कुछ गुंजाइश वाली सीट है। मलप्पुरम जिले में LDF के लिए असली लड़ाई जीत की नहीं, नुकसान कम करने की है।

पलक्कड़

पलक्कड़ की 12 सीटें, त्रिथला, पत्तांबी, शोरनूर, ओट्टापालम, कोन्गाड, मन्नारकाड, मलमपुझा, पलक्कड़, तरूर, चित्तूर, नेन्मारा, अलाथूर, मालाबार के भीतर सबसे अलग चुनावी समाज बनाती हैं। यहाँ भाजपा का असर केरल के औसत से ज्यादा दिखता है, खासकर पलक्कड़ शहरी सीट और कुछ हिंदू-सघन, मध्यमवर्गीय क्षेत्रों में। LDF का कैडर और UDF का सामाजिक फैलाव दोनों मौजूद हैं, इसलिए यह शुद्ध त्रिकोणीय जिला है। मलमपुझा LDF-पक्की, शोरनूर, ओट्टापालम, अलाथूर, तरूर LDF-झुकाव, त्रिथला, पत्तांबी UDF-झुकाव, मन्नारकाड UDF-झुकाव, पलक्कड़ टॉस-अप/NDA-फैक्टर, कोन्गाड LDF-हल्का झुकाव, चित्तूर और नेन्मारा टॉस-अप। यह जिला राज्य-स्तरीय स्विंग का छोटा नमूना है।

त्रिशूर

त्रिशूर की 13 सीटें, चेलक्करा, कुन्नमकुलम, गुरुवायूर, मनलूर, वडक्कांचेरि, ओल्लूर, त्रिशूर, नट्टिका, कैपामंगलम, इरिंजलाकुडा, पुथुक्कड़, चालाकुडी, कोडुंगल्लूर, इस चुनाव का सबसे विस्फोटक जिला है, क्योंकि 2024 में भाजपा ने त्रिशूर लोकसभा जीतकर समीकरण बदल दिए। हाल की खबरों में कथित 'फूड किट' विवाद ने भी इस जिले को और सुर्खियों में ला दिया। लेकिन विधानसभा में भाजपा की लोकसभा-जीत अपने-आप कई सीटों में नहीं बदलती। चेलक्करा, कुन्नमकुलम, गुरुवायूर, नट्टिका, कैपामंगलम, कोडुंगल्लूर LDF-झुकाव, मनलूर, ओल्लूर, इरिंजलाकुडा, चालाकुडी टॉस-अप, त्रिशूर और पुथुक्कड़ त्रिकोणीय टॉस-अप, वडक्कांचेरि LDF-हल्का झुकाव। भाजपा की सबसे बड़ी परीक्षा यही है कि वह त्रिशूर लोकसभा-लाभ को विधानसभा में कितनी सीटों तक ले जा पाती है।

एर्नाकुलम

एर्नाकुलम की 14 सीटें, पेरुंबवूर, अंगमाली, आलुवा, कलामस्सेरी, परवूर, वायपिन, कोच्चि, त्रिप्पुनित्थुरा, एर्नाकुलम, त्रिक्काकरा, कून्नाथुनाड, पिरवोम, मुवट्टुपुझा, कोठामंगलम-UDF की स्वाभाविक शहरी-आकांक्षी ताकत और LDF की संगठित उपस्थिति, दोनों को समेटती हैं। इसी जिले में अमित शाह ने वक्फ मुद्दे पर रैली की और NDA ने ईसाई तथा हिंदू परिवारों के संपत्ति-संबंधी सवालों को जोर से उठाया। इसलिए यहाँ चुनाव सिर्फ विकास या सत्ता विरोधी रुझान नहीं, बल्कि शहरीकरण , चर्च-संपर्क, वक्फ-विवाद व वर्गीय वोट का मिश्रण है। त्रिक्काकरा, एर्नाकुलम, परवूर, पिरवोम UDF-झुकाव से मजबूत, कोच्चि, त्रिप्पुनित्थुरा, आलुवा, अंगमाली, पेरुंबवूर टॉस-अप/UDF हल्का झुकाव, कलामस्सेरी LDF-झुकाव, वायपिन, कून्नाथुनाड, मुवट्टुपुझा, कोठामंगलम टॉस-अप। एर्नाकुलम में UDF को बढ़त लेनी चाहिए, लेकिन साफ स्वीप कठिन है।

इडुक्की

इडुक्की की 5 सीटें, देविकुलम, उदुम्बंचोला, थोडुपुझा, इडुक्की, पीरुमेड, किसान, पहाड़ी अर्थव्यवस्था, वन्यजीव संघर्ष और चर्च-प्रभाव का इलाका हैं। कांग्रेस ने रबर, भूमि-पट्टे और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे मुद्दों को जोरों से उठाया है। लेकिन LDF के पास सरकारी डिलीवरी और कुछ इलाकों में गहरे स्थानीय नेटवर्क हैं। मेरी पढ़ाई: देविकुलम LDF-झुकाव, उदुम्बंचोला LDF-हल्का झुकाव, थोडुपुझा UDF-झुकाव, इडुक्की टॉस-अप, पीरुमेड टॉस-अप/UDF हल्का झुकाव। यह जिला पूरे मध्य-त्रावणकोर का वह हिस्सा है जहाँ स्थानीय उम्मीदवार अंतिम क्षण में बहुत फर्क डाल सकता है।

कोट्टायम

कोट्टायम की 9 सीटें-पाला, कडुथुरुथी, वैकोम, एट्टुमानूर, कोट्टायम, पुथुप्पल्ली, चंगनाश्शेरी, कंजिराप्पल्ली, पूंजार-ईसाई समाज, केरल कांग्रेस की धारा-राजनीति, किसान-हित और व्यक्तिगत नेतृत्व का जिला है। 2024 लोकसभा में UDF को यहाँ मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली, लेकिन LDF के पास केरल कांग्रेस(M) के कारण अब भी गहरी पैठ है। पुथुप्पल्ली UDF-पक्की, कोट्टायम, एट्टुमानूर, कंजिराप्पल्ली UDF-झुकाव, पाला, चंगनाश्शेरी, पूंजार टॉस-अप, कडुथुरुथी LDF-झुकाव, वैकोम LDF-झुकाव। यह जिला सत्ता की दिशा तय करने वाले जिलों में है। क्योंकि यहाँ छोटा स्विंग भी 3-4 सीटें उलट सकता है।

अलप्पुझा

अलप्पुझा की 9 सीटें-अरूर, चेरथला, अलप्पुझा, अंबलप्पुझा, कुट्टनाड, हरिपाड, कायमकुलम, मावेलिक्करा, चेंगन्नूर-2021 में LDF का मजबूत जिला था, पर 2024 लोकसभा ने UDF को नया मनोबल दिया। अंबलप्पुझा में 'कॉमरेड बनाम कॉमरेड' जैसा असामान्य संघर्ष भी खबरों में रहा। तटीय अर्थव्यवस्था, मछुआरा समाज, सहकारी राजनीति, बाढ़/कटाव, और स्थानीय नेतृत्व यहाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अंबलप्पुझा, कायमकुलम, चेंगन्नूर, अरूर LDF-झुकाव, चेरथला टॉस-अप/LDF हल्का झुकाव, अलप्पुझा टॉस-अप, कुट्टनाड टॉस-अप/UDF हल्का झुकाव, हरिपाड UDF-झुकाव, मावेलिक्करा टॉस-अप। यह जिला 2021 जैसा एकतरफा LDF नहीं दिखता।

पथनमथिट्टा

पथनमथिट्टा की 5 सीटें-तिरुवल्ला, रन्नी, अरनमुला, कोन्नी, अडूर-सबरीमला, रबर, किसान, ईसाई समाज और भाजपा की वैचारिक सक्रियता का मिश्रण हैं। कांग्रेस ने इस क्षेत्र में भूमि-पट्टे, रबर समर्थन मूल्य और मानव-वन्यजीव संघर्ष को उछाला है। भाजपा यहाँ वैचारिक रूप से दिखती ज्यादा है, जीतती अभी कम है, लेकिन उसका असर UDF-LDF margins पर पड़ता है। मेरी पढ़ाई: तिरुवल्ला UDF-झुकाव, रन्नी टॉस-अप, अरनमुला LDF-झुकाव, कोन्नी टॉस-अप, अडूर LDF-झुकाव। पथनमथिट्टा में सीट-दर-सीट तस्वीर बहुत जटिल है; यहाँ 'किसका वोट कहाँ ट्रांसफर हुआ' अंतिम क्षण में मायने रखेगा।

कोल्लम

कोल्लम की 11 सीटें-करुणागप्पल्ली, चावरा, कून्नाथूर, कोट्टारक्करा, पथनापुरम, पुनलूर, चडयामंगलम, कुंडरा, कोल्लम, एरविपुरम, चथन्नूर-वाम परंपरा और स्थानीय नेतृत्व दोनों का जिला है। लोकसभा में UDF को लाभ मिला, पर विधानसभा में LDF को यहाँ से पूरी तरह काटना कठिन है। पथनापुरम LDF-पक्की/मजबूत, कुंडरा, एरविपुरम, चडयामंगलम, करुणागप्पल्ली LDF-झुकाव, कोल्लम UDF-झुकाव, चावरा टॉस-अप, कून्नाथूर LDF-हल्का झुकाव, कोट्टारक्करा टॉस-अप, पुनलूर टॉस-अप, चथन्नूर टॉस-अप/UDF हल्का झुकाव। कोल्लम में क्षेत्रीय मज़बूत उम्मीदवार और दल-बदल की राजनीति अंतिम परिणाम को बहुत प्रभावित कर सकती है।

तिरुवनंतपुरम

तिरुवनंतपुरम की 14 सीटें-वर्कला, अटिंगल, चिरायिनकीझु, नेडुमंगड, वामनपुरम, कझक्कूट्टम, वट्टियोरकावु, तिरुवनंतपुरम, नेमोम, अरुविक्करा, पारस्सला, कट्टाक्कडा, कोवलम, नेय्याट्टिनकारा-पूरे राज्य का सबसे हाई-वोल्टेज त्रिकोणीय जिला है। कझक्कूट्टम पर हाल की रिपोर्ट साफ कहती है कि यह इस चुनाव की स्पष्ट सीटों में है; भाजपा ने यहाँ वी. मुरलीधरन को उतारा है और मुकाबले को LDF-बनाम-BJP रंग दिया है। अमित शाह ने कट्टाक्कडा में AI हब, महिला सहायता, मुफ्त एलपीजी और भ्रष्टाचार-विरोधी वादों के साथ राजधानी क्षेत्र पर खास जोर दिया, जबकि पीएम मोदी ने भी राजधानी में रोडशो किया। वामनपुरम, कट्टाक्कडा, अरुविक्करा LDF-झुकाव, नेमोम टॉस-अप/NDA फैक्टर, कझक्कूट्टम टॉस-अप LDF बनाम BJP, वट्टियोरकावु UDF-झुकाव, तिरुवनंतपुरम टॉस-अप, कोवलम टॉस-अप, नेय्याट्टिनकारा LDF-हल्का झुकाव, पारस्सला LDF-झुकाव, नेडुमंगड LDF-झुकाव, वर्कला टॉस-अप, अटिंगल, चिरायिनकीझु LDF-झुकाव। राजधानी जिला NDA की सबसे वास्तविक सीट-संभावना वाला इलाका है।

इस बार का विश्लेषण

LDF की अपेक्षाकृत पक्की या मजबूत सीटें: उदमा, कन्हंगड़, त्रिक्करिपुर, पय्यानूर, कल्लियास्सेरी, धर्मडोम, मट्टनूर, थलश्शेरी, मलमपुझा, चेलक्करा, कुन्नमकुलम, गुरुवायूर, नट्टिका, कैपामंगलम, कोडुंगल्लूर, कलामस्सेरी, देविकुलम, अंबलप्पुझा, पथनापुरम। इन सीटों पर 2021 की संगठनात्मक मजबूती, 2024 में भी पूरी तरह ढहाव न होना, या स्थानीय वाम चेहरों की पकड़ LDF को बढ़त देती है।

LDF झुकाव वाली सीटें

तालीपरंबा, अज़ीकोड, कन्नूर, कुट्टुपरंबा, बेयपोर, बालुश्शेरी, शोरनूर, ओट्टापालम, अलाथूर, तरूर, कोन्गाड, वडक्कांचेरि, मनलूर, ओल्लूर, कडुथुरुथी, वैकोम, अरूर, चेरथला, कायमकुलम, चेंगन्नूर, अरनमुला, अडूर, करुणागप्पल्ली, कुंडरा, चडयामंगलम, कून्नाथूर, अटिंगल, चिरायिनकीझु, नेडुमंगड, वामनपुरम, अरुविक्करा, पारस्सला, कट्टाक्कडा, नेय्याट्टिनकारा, इडुक्की के कुछ हिस्से। इन सीटों पर LDF आगे है, लेकिन यहाँ एन्टी इनकम्बेंसी या UDF स्विंग मार्जिन घटा सकता है।

UDF की मजबूत सीटें

मलप्पुरम, मंजेरी, वेंगरा, वल्लीक्कुन्नु, तिरुरंगाड़ी, पोनानी, कोंडोट्टी, एरनाड, पुथुप्पल्ली। इन इलाकों में या तो IUML-संचालित अल्पसंख्यक सामाजिक आधार UDF के पक्ष में ठोस है, या कांग्रेस की व्यक्तिगत-संगठनात्मक पकड़ बहुत गहरी है।

UDF-झुकाव वाली सीटें: कासरगोड, इरिक्कूर, पेरावूर, मनंतवाडी, सुल्तान बथेरी, कोझिकोड उत्तर, कोझिकोड दक्षिण, वटकारा, कोयिलांडी, तिरुवंबाडी, निलंबूर, पेरिन्थलमन्ना, मंकडा, तनूर, तिरुर, कोट्टक्कल, थवनूर, त्रिथला, पत्तांबी, त्रिक्काकरा, एर्नाकुलम, परवूर, पिरवोम, थोडुपुझा, कोट्टायम, एट्टुमानूर, कंजिराप्पल्ली, हरिपाड, तिरुवल्ला, कोल्लम, वट्टियोरकावु। इन सीटों पर UDF को 2024 की हवा, सामाजिक गठजोड़ या उम्मीदवार-लाभ मिला हुआ है, मगर कई जगह मुकाबला अभी भी पूरी तरह बंद नहीं हुआ।

NDA के लिए सबसे संभावित प्रभावक्षेत्र

मंजेश्वरम, पलक्कड़, त्रिशूर, पुथुक्कड़, कझक्कूट्टम, नेमोम, तिरुवनंतपुरम, कोवलम, कभी-कभी कट्टाक्कडा के कुछ pockets, और राजधानी-क्षेत्र की कुछ शहरी सीटें। इनमें भी मैं NDA की स्पष्ट जीत की सबसे वास्तविक संभावना कझक्कूट्टम, नेमोम, पलक्कड़, त्रिशूर-क्षेत्रीय प्रभाव में देखता हूँ, लेकिन इनमें से अधिकांश को अभी भी टॉस-अप ही कहना ज्यादा ईमानदार होगा।

टॉस-अप सीटें, जहाँ अंतिम लड़ाई तय नहीं

मंजेश्वरम, कल्पेट्टा, कुट्टियाडी, नादापुरम, पेराम्ब्रा, एलाथूर, कून्नमंगलम, कोडुवल्ली, वंडूर, पलक्कड़, चित्तूर, नेन्मारा, त्रिशूर, पुथुक्कड़, चालाकुडी, इरिंजलाकुडा, वायपिन, कोच्चि, त्रिप्पुनित्थुरा, कून्नाथुनाड, मुवट्टुपुझा, कोठामंगलम, उदुम्बंचोला, पीरुमेड, पाला, चंगनाश्शेरी, पूंजार, अलप्पुझा, कुट्टनाड, मावेलिक्करा, रन्नी, कोन्नी, चावरा, कोट्टारक्करा, पुनलूर, चथन्नूर, वर्कला, कझक्कूट्टम, तिरुवनंतपुरम, नेमोम, कोवलम। यही वे सीटें हैं जहाँ 2026 का वास्तविक नतीजा लिखा जाएगा।

अब अगर इस पूरे मानचित्र को संक्षेप में पढ़ें, तो तस्वीर यह बनती है कि मलप्पुरम-केन्द्रित मुस्लिम बेल्ट UDF की सबसे सुरक्षित ताकत है। कन्नूर-आधारित वाम कोर अब भी LDF की सबसे बड़ी सुरक्षा-दीवार है; मध्य केरल-विशेषकर त्रिशूर, एर्नाकुलम, कोट्टायम, इडुक्की-सरकार का वास्तविक निर्णायक इलाका है। और तिरुवनंतपुरम जिला NDA की सबसे बड़ी आशा है। UDF के लिए सत्ता का रास्ता यह है कि वह मलप्पुरम और वायनाड की बढ़त को एर्नाकुलम-कोट्टायम-त्रिशूर में सीटों में बदले। LDF के लिए रास्ता यह है कि वह दक्षिण और कन्नूर कोर को बचाए रखे और मध्य केरल में नुकसान सीमित करे। NDA के लिए रास्ता यह है कि त्रिशूर लोकसभा-जीत और राजधानी-क्षेत्र के उभार को 2-5 विधानसभा सीटों के ठोस परिणाम में बदले।

एक संतुलित आकलन में 2026 का केरल चुनाव अभी भी UDF-झुकाव वाला कड़ा मुकाबला है। लेकिन यह 2011 जैसी सीधी सत्ता-परिवर्तन कहानी भी नहीं है और 2021 जैसी LDF-लैंडस्लाइड कहानी भी नहीं। सबसे वास्तविक तस्वीर यह लगती है कि UDF बहुमत की दहलीज तक पहुँच सकता है या उसे पार कर सकता है, LDF 2021 की तुलना में पीछे जाएगा लेकिन मजबूत प्रतिद्वंद्वी बना रहेगा, और NDA वोट-शेयर व कुछ शहरी सीटों में निर्णायक भूमिका निभाएगा। केरल की राजनीति अभी भी मूलतः द्विध्रुवीय है, पर 2026 इस बात की परीक्षा है कि वह कितनी तेजी से त्रिकोणीय हो रही है।

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