Khalnayak Returns Story: संजय दत्त की फिल्म खलनायक जिसके गाने और डायलॉग आज भी दर्शकों द्वारा पसंद किया जाता है। फिल्म एक बार फिर से बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रही है। फिल्म दुबारा सिनेमाघरों में नहीं रिलीज होगी।
बल्कि 33 साल बाद खलनायक मूवी का सीक्वल बनने जा रहा है। फिल्म की चर्चा काफी दिनों से थी। लेकिन अब जाकर फिल्म के सीक्वल पर मुहर लग चुका है। संजय दत्त और फिल्म के निर्माताओं ने खलनायक के सीक्वल की अनॉउंसमेंट एक टीजर के साथ और संजय दत्त के नए लुक के साथ किया है। Khalnayak Returns का टीजर देखने के बाद से ही दर्शकों को फिल्म का बेसब्री से इंतजार है। तो वहीं अब जाकर Khalnayak Returns की कहानी पर से पर्दा उठ चुका है।
खलनायक रिटर्न्स की कहानी क्या होगी ( Sanjay Dutt Khalnayak Returns Movie Story)-
खलनायक के सीक्वल की अनॉउंसमेंट करते समय संजय दत्त ने बताया कि उनको फिल्म के सीक्वल को बनाने का आइडिया तब आया। जब वो जेल में थे। रिपोर्ट कि माने तो Khalnayak Returns की कहानी 4000 कैदियों की वास्तविक कहानी है। जब संजय दत्त जेल में थे। तब उन्होंने इस फिल्म की कहानी पर काम किया। और अब वो इस कहानी को बड़े पर्दे पर उतारने के लिए तैयार हैं। इसके बारे खुद संजय दत्त ने अपने टीजर लॉच के समय जानकारी शेयर की थी। उस दौरान सुभाष घई, मान्यता दत्त भी थे।
खलनायक रिटर्न्स में माधुरी दीक्षित होंगी या नहीं (Is Madhuri Dixit In Khalnayak Returns)-
संजय दत्त से जब पूछा गया कि इस फिल्म में माधुरी दीक्षित होंगी की नहीं इसपर संजय दत्त ने खुलकर नहीं बताया है। जैसा कि सभी को पता है कि संजय दत्त और माधुरी दीक्षित एक समय था जब एक-दूसरे के प्यार में पूरी तरह से डूब गए थे। लेकिन जब संजय दत्त पर मुंबई बम धमाकों के दौरान हथियार रखने का आरोप लगा था। उसके बाद उनका रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चला और टूट गया। लेकिन इसके बाद दोनों ने साथ में फिल्मों में काम किया है। दोनों ने कलंक और टोटल धमाल में साथ में काम किया है। अब खलनायक मूवी के सीक्वल में सजंय दत्त माधुरी दीक्षित को रिप्लेस करते हैं। या फिर उनकी जगह किसी अन्य एक्ट्रेस को लॉच करते हैं। ये तो वक्त ही बताएगा। क्योंकि अभी तक Khalnayak Returns की कास्ट अनॉउंस नहीं की गई है।
खलनायक मूवी के बारे में (About Khalnayak Movie)-
मूल फिल्म कई कारणों से अविस्मरणीय थी। "खलनायक" का मूल तत्व एक ऐसा अभिनय था जो वास्तविक जीवन से मिलता-जुलता प्रतीत होता था। 90 के दशक की शुरुआत में, संजय दत्त के पर्दे के बाहर के व्यक्तित्व पर लगातार सवाल उठते रहते थे। अभिनेता के व्यक्तित्व के परेशान करने वाले और विवादास्पद पहलुओं ने बल्लू के किरदार को एक स्वाभाविक और वास्तविक रूप दिया। बल्लू न तो कोई शातिर दिमाग वाला व्यक्ति था और न ही कोई काल्पनिक खलनायक। वह अस्थिर, आवेगशील और भावनात्मक उतार-चढ़ाव में लगभग बचकाना था। सुभाष घई की कहानी कहने की शैली ने उसकी इसी अप्रत्याशितता को उजागर किया, जिससे बल्लू एक कथानक का पात्र मात्र नहीं, बल्कि एक गहन मनोवैज्ञानिक उपस्थिति बन गया।

