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Kids Investment Plan: अब बच्चों को म्यूचुअल फंड गिफ्ट करना आसान नहीं, टैक्स और ट्रांसफर के नियम जानिए

Kids Investment Plan: अब बच्चों को म्यूचुअल फंड गिफ्ट करना आसान नहीं, टैक्स और ट्रांसफर के नियम जानिए

Newstrack 4 days ago

Mutual Fund Gift to Child: आज के समय में कई माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पारंपरिक गिफ्ट जैसे खिलौने, कपड़े या नकद रकम देने के बजाय 0निवेश आधारित गिफ्ट चुन रहे हैं।

इनमें म्यूचुअल फंड सबसे लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरा है। वजह साफ है कि यह लंबे समय में संपत्ति बनाने का आसान और व्यवस्थित तरीका माना जाता है। अगर बच्चे के नाम जल्दी निवेश शुरू कर दिया जाए, तो पढ़ाई, करियर या शादी जैसे बड़े खर्चों के लिए मजबूत फंड तैयार किया जा सकता है।

हालांकि, बच्चों को म्यूचुअल फंड गिफ्ट करना अब पहले जितना आसान नहीं रहा। नियमों में बदलाव, डिमैट प्रक्रिया, टैक्स प्रावधान और नाबालिग खातों से जुड़े निर्देशों ने इसे थोड़ा तकनीकी बना दिया है। इसलिए यदि आप अपने बेटे या बेटी को म्यूचुअल फंड गिफ्ट करने की सोच रहे हैं, तो पहले इसके सभी जरूरी नियम समझ लेना बेहद जरूरी है।

क्यों बढ़ा है म्यूचुअल फंड गिफ्ट करने का चलन

बीते कुछ वर्षों में लोगों की सोच बदली है⁸ एमएम सिर्फ बचत नहीं, बल्कि स्मार्ट निवेश पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में माता-पिता बच्चों के नाम निवेश शुरू कर रहे हैं ताकि समय के साथ कंपाउंडिंग का फायदा मिले। यदि कम उम्र में निवेश शुरू किया जाए, तो लंबे समय में छोटी रकम भी बड़ी पूंजी में बदल सकती है। यही कारण है कि अब म्यूचुअल फंड को फाइनेंशियल गिफ्ट के रूप में देखा जा रहा है।

अब पहले जैसा आसान क्यों नहीं रहा गिफ्ट करना

पहले म्यूचुअल फंड यूनिट्स ट्रांसफर करना अपेक्षाकृत आसान माना जाता था, लेकिन अब नियम अधिक व्यवस्थित और डिजिटल हो चुके हैं। अब निवेश को एक वित्तीय संपत्ति के रूप में देखा जाता है, इसलिए इसके ट्रांसफर में दस्तावेज, पहचान सत्यापन और नियामकीय प्रक्रिया जरूरी हो गई है। इसका उद्देश्य निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाना है।

डिमैट अकाउंट क्यों जरूरी हो सकता है

यदि म्यूचुअल फंड यूनिट्स डिमैट मोड में रखी गई हैं, तो उन्हें गिफ्ट करने के 8 प्राप्तकर्ता के नाम डिमैट अकाउंट होना जरूरी हो सकता है। यदि बच्चा नाबालिग है, तो यह अकाउंट माता-पिता या अभिभावक की देखरेख में खुलता है। इसके लिए PAN, KYC, जन्म प्रमाणपत्र और बैंक डिटेल्स जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

नाबालिग बच्चे के नाम निवेश कैसे होता है

18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे अपने नाम निवेश रख सकते हैं, लेकिन उसका संचालन अभिभावक करता पी है। माता-पिता बच्चे के नाम फोलियो खोल सकते हैं और उसमें निवेश शुरू कर सकते हैं। जब बच्चा 18 वर्ष का हो जाता है, तब आवश्यक KYC अपडेट और दस्तावेज प्रक्रिया के बाद खाता उसके नियंत्रण में आ जाता है।

म्यूचुअल फंड गिफ्ट करने की प्रक्रिया क्या है

यदि आप बच्चे को म्यूचुअल फंड गिफ्ट करना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह जांचें कि यूनिट्स किस मोड में हैं। इसके बाद जरूरी दस्तावेज तैयार करें। यदि राशि बड़ी है, तो गिफ्ट डीड बनवाना बेहतर माना जाता है। इसके बाद ऑफ-मार्केट ट्रांसफर या संबंधित प्रक्रिया के जरिए यूनिट्स बच्चे के खाते में भेजी जा सकती हैं। सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरूरी है।

क्या ट्रांसफर पर चार्ज भी लगता है

कुछ मामलों में डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट या ब्रोकर ट्रांसफर पर शुल्क ले सकते हैं। यह शुल्क संस्था के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसके अलावा GST या अन्य चार्ज भी लग सकते हैं। इसलिए ट्रांसफर शुरू करने से पहले पूरी फीस संरचना जान लेना बेहतर रहता है।

गिफ्ट देने पर क्या टैक्स लगता है

माता-पिता और बच्चों के बीच गिफ्ट को करीबी रिश्तेदारी की श्रेणी में माना जाता है। ऐसे में सामान्य परिस्थितियों में गिफ्ट देने के समय तुरंत टैक्स देनदारी नहीं बनती। यानी सिर्फ यूनिट्स ट्रांसफर करने पर टैक्स नहीं देना पड़ सकता, लेकिन वास्तविक स्थिति व्यक्ति विशेष और नियमों पर निर्भर करती है।

असली टैक्स कब लगता है

जब भविष्य में बच्चा उन म्यूचुअल फंड यूनिट्स को बेचता है, तब कैपिटल गेन टैक्स लागू हो सकता है। इसमें खरीद कीमत, होल्डिंग पीरियड और फंड के प्रकार के आधार पर टैक्स तय होता है। इसलिए पुराने निवेश गिफ्ट करने से पहले टैक्स प्रभाव समझना जरूरी है।

क्लबिंग रूल क्या है

यदि बच्चा नाबालिग है और निवेश से कोई आय होती है, तो कई मामलों में वह आय माता-पिता की आय में जोड़ी जा सकती है। इसे क्लबिंग ऑफ इनकम कहा जाता है। इसलिए यदि निवेश का उद्देश्य टैक्स प्लानिंग है, तो इस नियम को समझना बहुत जरूरी है।

SIP के जरिए बच्चे के लिए निवेश क्यों बेहतर माना जाता है

एकमुश्त रकम देने के बजाय SIP के जरिए निवेश करना अधिक आसान और अनुशासित तरीका माना जाता है। हर महीने छोटी रकम लगाकर लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाया जा सकता है। बाजार में उतार-चढ़ाव होने पर भी SIP निवेशक को औसत लागत का फायदा देती है।

बच्चों के लिए कौन सा फंड चुनें

यदि निवेश अवधि लंबी है, तो इक्विटी फंड बेहतर विकल्प हो सकता है। मध्यम अवधि के लिए हाइब्रिड फंड चुना जा सकता है। कम जोखिम चाहने वालों के लिए डेट फंड उपयोगी हो सकते हैं। फंड चुनते समय सिर्फ रिटर्न नहीं, बल्कि जोखिम, खर्च अनुपात और लक्ष्य को भी देखना चाहिए।

किन गलतियों से बचना चाहिए

कई लोग सिर्फ टैक्स बचत देखकर निवेश कर देते हैं, जो गलत हो सकता है। दस्तावेजों में नाम या जन्मतिथि की गलती आगे परेशानी दे सकती है। कम अवधि के लक्ष्य के लिए ज्यादा जोखिम वाले फंड चुनना भी सही नहीं माना जाता। बड़ी राशि निवेश करने से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना बेहतर रहता है।

नकद गिफ्ट बेहतर है या म्यूचुअल फंड

यदि बच्चे को तुरंत किसी जरूरत के लिए पैसे चाहिए, तो नकद गिफ्ट उपयोगी हो सकता है। लेकिन यदि उद्देश्य भविष्य के लिए धन बनाना है, तो म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प माना जाता है। नकद राशि खर्च हो सकती है, जबकि निवेश समय के साथ बढ़ सकता है।

बच्चों को म्यूचुअल फंड गिफ्ट करना भावनात्मक के साथ-साथ समझदारी भरा वित्तीय निर्णय भी हो सकता है। यह उनके भविष्य को मजबूत बनाने का शानदार तरीका है। हालांकि अब इसमें नियम, टैक्स, KYC और ट्रांसफर प्रक्रिया को समझना जरूरी है। सही जानकारी और सही योजना के साथ किया गया छोटा निवेश भी बच्चे के बड़े सपनों की मजबूत नींव बन सकता है।

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