Afzal Ansari House Unsealed: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके डालीबाग में स्थित समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी की 6700 वर्ग फीट की आलीशान कोठी को प्रशासन ने सीलमुक्त कर दिया है।
अदालत के स्पष्ट आदेशों के अनुपालन में गाजीपुर और लखनऊ जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के तहत यह आवासीय संपत्ति कानूनी तौर पर अंसारी परिवार को सुपुर्द कर दी गई। गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी खुद अपने परिजनों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर मौजूद रहे।
राजस्व टीम की मौजूदगी में पूरी हुई सील खोलने की वैधानिक प्रक्रिया
अदालत के निर्देशों के तहत डालीबाग स्थित आवासीय परिसर पर पहुंची तहसील और राजस्व विभाग की टीम ने विधिवत पंचनामा तैयार कर सील हटाने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान अफजाल अंसारी और उनके परिवार के सदस्य वहां मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर जमीन की आवश्यक पैमाइश कराई, दस्तावेजों का मिलान किया और सुपुर्दगी से जुड़े सभी औपचारिक कागजात तैयार किए। पूरी कानूनी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद संपत्ति का वास्तविक दखल औपचारिक रूप से अंसारी परिवार को सौंप दिया गया।

अक्टूबर 2022 में गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क हुआ था बंगला
यह भूखंड और आलीशान मकान अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम पर दर्ज है। तकरीबन 6700 वर्ग फीट में फैली इस संपत्ति को गाजीपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर 23 से 28 अक्टूबर 2022 के बीच उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कुर्क किया गया था। उस समय गाजीपुर पुलिस ने लखनऊ आकर भवन को सील कर दिया था और इसकी देखरेख व प्रशासनिक निगरानी का जिम्मा लखनऊ नगर आयुक्त को सौंपा गया था।

स्पेशल कोर्ट का फैसला: अपराध से अर्जित नहीं है यह रिहायशी संपत्ति
प्रशासनिक कुर्की के खिलाफ फरहत अंसारी ने अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ी। मामले की सुनवाई करते हुए गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने स्पष्ट किया कि डालीबाग स्थित यह कोठी किसी भी आपराधिक गतिविधि या संगठित अपराध के जरिए अर्जित नहीं की गई है। अदालत ने इसे वैध संपत्ति करार देते हुए गाजीपुर के जिलाधिकारी को 30 दिनों के भीतर सील खुलवाकर मकान फरहत अंसारी को सौंपने का निर्देश दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद हरकत में आया प्रशासनिक अमला
तय समय सीमा में आदेश का पालन न होने पर फरहत अंसारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सी.डी. सिंह की एकल पीठ के समक्ष अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने पक्ष रखा, जिसके बाद अदालत ने गाजीपुर के डीएम को पांच सप्ताह के भीतर सकारण आदेश पारित करने की सख्त हिदायत दी। न्यायिक सख्ती के बाद गाजीपुर प्रशासन ने लखनऊ नगर आयुक्त और तहसील प्रशासन को सील हटाने के निर्देश भेजे, जिसके बाद अब परिवार को जमीन और मकान का दखल मिल सका है।

