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मोबाइल पर बजे 'सायरन' ने कैसे उड़ाई अखिलेश की नींद? खोल दिया सरकार के 'डिजास्टर अलर्ट' काला-चिट्ठा

मोबाइल पर बजे 'सायरन' ने कैसे उड़ाई अखिलेश की नींद? खोल दिया सरकार के 'डिजास्टर अलर्ट' काला-चिट्ठा

Newstrack 2 weeks ago

Akhilesh Yadav on government disaster alert: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी।

उन्होंने ईवीएम (EVM) की निष्पक्षता से लेकर पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों तक, कई ऐसे मुद्दों पर बात की जिससे सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग दोनों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अखिलेश यादव के बयानों में एक अजीब सी बेचैनी साफ झलक रही थी, खासकर जब उन्होंने सरकार द्वारा भेजे गए 'डिजास्टर अलर्ट' (आपदा चेतावनी) को ईवीएम हैकिंग से जोड़ दिया। उनके इस तर्क ने तकनीक और चुनाव की सुचिता पर एक नई बहस छेड़ दी है।

बंद मोबाइल और स्मार्ट तकनीक: अखिलेश का 'हैकिंग' वाला तर्क

अखिलेश यादव ने हाल ही में मोबाइल फोन पर आए सरकारी अलर्ट का जिक्र करते हुए एक बहुत ही गंभीर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि कल अचानक कई लोगों के मोबाइल पर आपदा से जुड़ा एक संदेश आया। यह संदेश तब भी सुनाई दिया जब फोन बंद थे या रिंगर ऑफ था। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा, "सोचिए, जब तकनीक इतनी स्मार्ट और ताकतवर हो गई है कि वह बंद मोबाइल तक पहुंच सकती है, तो क्या वह ईवीएम को हैक नहीं कर सकती?" उनका सीधा इशारा इस बात की ओर था कि अगर सरकार रिमोट तरीके से हर नागरिक के फोन को नियंत्रित कर सकती है, तो चुनावी मशीनरी की सुरक्षा पर भरोसा कैसे किया जाए। उन्होंने आगे जोड़ा कि जब स्मार्ट मीटरों में बेईमानी और रीडिंग में हेराफेरी संभव है, तो ईवीएम में गड़बड़ी करना कोई बड़ी बात नहीं है। सपा प्रमुख के अनुसार, भाजपा जनता और विपक्ष के मन में 'डर' पैदा करके चुनाव जीतना चाहती है।

बंगाल चुनाव और चुनाव आयोग पर संगीन आरोप

अखिलेश यादव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल मशीनों पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक और निष्पक्ष संस्था है, लेकिन यूपी के पिछले अनुभवों ने हमें कुछ और ही सिखाया है। उन्होंने रामपुर और उत्तर प्रदेश के अन्य उपचुनावों का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर एक खास तरह का 'ट्रायल' या 'रिहर्सल' किया था। अखिलेश का दावा है कि यूपी में पहले यह तय किया गया कि किसे पीठासीन अधिकारी बनाना है, किस सिपाही या इंस्पेक्टर को किस बूथ पर तैनात करना है और कौन सा अधिकारी पूरे चुनाव की निगरानी करेगा। अब वही 'यूपी मॉडल' बंगाल के चुनावों में भी दोहराया गया है।

ममता बनर्जी की जीत पर अटूट भरोसा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के कल आने वाले नतीजों से पहले अखिलेश यादव पूरी तरह से ममता बनर्जी के समर्थन में खड़े नजर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में पैरामिलिट्री फोर्स और अधिकारियों की तैनाती का एक समानांतर ढांचा खड़ा कर दिया गया था ताकि भाजपा को फायदा पहुंचाया जा सके। हालांकि, तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अखिलेश को यकीन है कि बंगाल में 'खेला' नहीं, बल्कि 'दीदी' का जादू चलेगा। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, "ममता दीदी अकेली लड़ रही हैं और वे जीतेंगी भी। दीदी कल भी थीं, आज भी हैं और कल भी रहेंगी।" अखिलेश के मुताबिक, बंगाल का चुनाव अब केवल पार्टियों का चुनाव नहीं, बल्कि जनता का चुनाव बन चुका है और जनता ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। अब कल के नतीजे तय करेंगे कि अखिलेश की यह बेचैनी और दावे कितने सच साबित होते हैं।

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