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मोदी- शाह की रणनीति के आगे फेल हुआ ममता का 'खेल'...15 साल बाद ममता युग का अंत, जानें TMC की हार के 5 बड़े कारण

मोदी- शाह की रणनीति के आगे फेल हुआ ममता का 'खेल'...15 साल बाद ममता युग का अंत, जानें TMC की हार के 5 बड़े कारण

Newstrack 5 days ago

West Bengal Election Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार राजनीतिक तस्वीर बदलती नजर आ रही है। शुरुआती रुझानों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी राज्य में बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है और सत्ताधारी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पर बढ़त बना चुकी है।

अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो यह पहली बार होगा जब बंगाल में बीजेपी की सरकार बनेगी और करीब 15 साल से सत्ता में रही ममता बनर्जी की सरकार का अंत हो सकता है।

मोदी-शाह की रणनीति का असर

बीजेपी की इस बढ़त को नरेंद्र मोदी की 'गारंटी' और अमित शाह की चुनावी रणनीति का परिणाम माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने कई रैलियां कर 'परिवर्तन' का संदेश दिया और केंद्र की योजनाओं को राज्य में लागू करने का वादा किया। वहीं अमित शाह ने करीब दो हफ्ते तक बंगाल में रहकर सीट-दर-सीट रणनीति तैयार की, जिसका असर अब नतीजों में दिखाई दे रहा है।

वादों की टक्कर: ममता बनाम मोदी

इस चुनाव में वादों की सीधी टक्कर देखने को मिली। जहां टीएमसी ने बेरोजगारी भत्ता 1500 रुपये देने की बात कही, वहीं बीजेपी ने 3000 रुपये देने का वादा किया। महिलाओं के लिए भी बीजेपी ने 3000 रुपये मासिक सहायता का ऐलान कर 'नारी सम्मान' को बड़ा मुद्दा बनाया, जबकि टीएमसी की लक्ष्मी भंडार योजना पहले से लागू थी। सरकारी कर्मचारियों के लिए 7वां वेतन आयोग लागू करने, 33% महिला आरक्षण, समान नागरिक संहिता (UCC) और घुसपैठ पर सख्ती जैसे मुद्दों को भी बीजेपी ने जोर-शोर से उठाया। इसके साथ ही सिंगूर को फिर से औद्योगिक हब बनाने और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को पूरी तरह लागू करने का वादा किया गया।

संगठन और बूथ मैनेजमेंट बना गेमचेंजर

बीजेपी की सफलता के पीछे उसकी मजबूत संगठनात्मक रणनीति भी अहम मानी जा रही है। पार्टी ने करीब 82 हजार में से 71 हजार बूथों पर अपनी पकड़ मजबूत की। केंद्रीय नेतृत्व की सीधी निगरानी में हर सीट पर अलग योजना बनाई गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साइलेंट सपोर्ट और जमीनी कार्यकर्ताओं की सक्रियता ने भी चुनावी समीकरण बदलने में बड़ी भूमिका निभाई।

बदलता राजनीतिक समीकरण

बीजेपी ने इस चुनाव में सिर्फ बड़े नेताओं या स्टार प्रचारकों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया। साथ ही सामाजिक समीकरण साधते हुए अलग-अलग समुदायों तक पहुंच बनाई।

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