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Moradabad News:  नदी में गिरी बाइक, दो बच्चों की जान बची; मां-बच्चा तेज बहाव में बहे

Moradabad News: नदी में गिरी बाइक, दो बच्चों की जान बची; मां-बच्चा तेज बहाव में बहे

Newstrack 2 weeks ago

Medog Dam: नेपाल में आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ के बाद अब सवाल सिर्फ तबाही के आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं। हिमालय के ऊंचे इलाकों में चीन के बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण और दुनिया की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल मेडोग डैम को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

सवाल यह है कि क्या तिब्बत में हो रहा निर्माण हिमालयी ढलानों और ग्लेशियरों की संवेदनशीलता बढ़ा रहा है? क्या मेडोग डैम जैसी विशाल परियोजना का इस तरह की आपदाओं से कोई सीधा संबंध है, या फिर सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे वास्तविक वैज्ञानिक तथ्यों के सामने बेकार हैं?

नेपाल में अचानक कैसे आई इतनी बड़ी बाढ़?

26 अगस्त को नेपाल के उत्तरी हिस्से में अचानक आई बाढ़ ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। रासुवा जिले के आसपास का इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। तेज पानी के साथ चट्टानें और मलबा नीचे आया, जिससे सड़कें, पुल और दूसरी संरचनाएं बह गईं। शुरुआती विशेषज्ञ आकलनों में इस घटना को ग्लेशियर से जुड़ी अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से जोड़कर देखा जा रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में जब बर्फ, चट्टान और पानी अचानक नीचे की ओर खिसकते हैं, तो नदी कुछ ही मिनटों में सामान्य प्रवाह से बेहद खतरनाक रूप ले सकती है।

यही वजह है कि विशेषज्ञों का कहना है कि, इस आपदा को सिर्फ सामान्य मानसूनी बाढ़ मानना सही नहीं होगा।

मेडोग डैम का नाम क्यों सामने आया?

मेडोग डैम चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में यारलुंग त्सांगपो नदी पर प्रस्तावित एक विशाल जलविद्युत परियोजना है। चीन ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है और इसकी संभावित क्षमता करीब 60,000 मेगावाट बताई जाती है।

इस परियोजना की विशालता ही इसे खास बनाती है। प्रस्तावित बांध भारत की सीमा के अपेक्षाकृत करीब है और जिस यारलुंग त्सांगपो नदी पर इसे बनाया जाना है, वही नदी भारत में प्रवेश करने के बाद ब्रह्मपुत्र कहलाती है।

इसी कारण मेडोग डैम को लेकर भारत और बांग्लादेश में पहले से ही पानी, पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।

क्या डैम निर्माण से ग्लेशियर अस्थिर हो सकते हैं?

हिमालय दुनिया के सबसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में से एक है। यहां सड़क, सुरंग, बांध और जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर खुदाई और चट्टानों में बदलाव होता है। विशेषज्ञों की चिंता यह है कि अत्यधिक निर्माण गतिविधियां कुछ इलाकों में प्राकृतिक जल निकासी और ढलानों की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन किसी खास बाढ़ को किसी निर्माण परियोजना से जोड़ने के लिए भूवैज्ञानिक और जलवैज्ञानिक प्रमाण जरूरी होते हैं।

नेपाल की मौजूदा बाढ़ के मामले में अभी ऐसा निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह कहा जा सके कि मेडोग डैम का निर्माण ही इस आपदा की मुख्य वजह था।

चीन के निर्माण को लेकर चिंता क्यों गंभीर है?

विशेषज्ञों का कहना है कि, मेडोग डैम अभी प्रस्तावित परियोजना है। इसलिए नेपाल में आई इस बाढ़ के लिए सीधे डैम से पानी छोड़े जाने की बात भी सही नहीं होगी।

लेकिन चिंता पूरी तरह बेबुनियाद भी नहीं है। तिब्बत के ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में चीन बड़े पैमाने पर सड़क, सुरंग और हाइड्रोपावर परियोजनाओं का विस्तार कर रहा है। ऐसे इलाकों में किसी भी बड़े निर्माण के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन बेहद जरूरी हो जाता है।

इसके अलावा हिमालय पर जलवायु परिवर्तन का असर भी दिखाई दे रहा है। ग्लेशियरों के पिघलने, बर्फ की स्थिति बदलने और ग्लेशियल झीलों के बढ़ने से अचानक बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है।

क्या मेडोग डैम नेपाल की बाढ़ की मुख्य वजह है?

विशेषज्ञों का कहना है कि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर नेपाल की इस त्रासदी को पूरी तरह से मेडोग डैम के निर्माण की वजह ठहराना सही नहीं माना जा सकता। लेकिन मेडोग डैम को लेकर पर्यावरणीय और भू-राजनीतिक सवाल जरूर गंभीर हैं। अभी तक सामने आए आकलन ग्लेशियर से जुड़ी घटना, भूस्खलन और अचानक भारी मात्रा में पानी-मलबा नीचे आने की ओर इशारा कर रहे हैं।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Newstrack Journalism Hindi