Nepal Flood Rescue: नेपाल में आई प्राकृतिक तबाही और खौफनाक जलप्रलय के बीच फंसी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार बेहद मुस्तैद नजर आ रही है। शुक्रवार को राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर उस समय एक बेहद भावुक और राहत भरा माहौल देखने को मिला, जब विदेश मंत्री एस जयशंकर खुद काठमांडू से सुरक्षित बचाकर लाए गए 21 भारतीय नागरिकों का स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे।
नेपाल की बेकाबू बाढ़ के खौफनाक साए से निकलकर सुरक्षित वतन वापस लौटे ये सभी 21 नागरिक तमिलनाडु के निवासी बताए जा रहे हैं।
सुरक्षित वापसी पर जताया संतोष
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विशेष रूप से हवाई अड्डे पर पहुंचकर सभी भारतीयों से उनका कुशलक्षेम जाना और उनके खौफनाक अनुभवों को करीब से सुना। उन्होंने कहा कि बाढ़ के भीषण संकट के बीच से निकलकर अपने नागरिकों को पूरी तरह सुरक्षित देखना बेहद सुकून देने वाला पल है।
उन्होंने बताया कि जलप्रलय के बाद ये लोग किसी तरह काठमांडू पहुंचे थे, जिसके तुरंत बाद भारतीय दूतावास ने सक्रियता दिखाते हुए उनकी भारत वापसी के लिए विशेष उड़ानों का इंतजाम किया। जिस विमान से नेपाल में राहत सामग्री भेजी जा रही है, उसी के जरिए इन यात्रियों को सकुशल स्वदेश लाया गया।
315 भारतीयों की तलाश जारी, 85 को अब तक सुरक्षित निकाला गया
मीडिया से बात करते हुए विदेश मंत्री ने नेपाल में फंसे अन्य भारतीयों के बारे में भी अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस समय सरकार का सबसे पहला और मुख्य लक्ष्य नेपाल के अलग-अलग दुर्गम हिस्सों में मौजूद हर एक भारतीय से जल्द से जल्द संपर्क स्थापित करना है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 315 ऐसे भारतीय नागरिक हैं जिनसे अभी संपर्क होना बाकी है, हालांकि यह आंकड़ा लगातार बदल रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रयासों से अब तक 85 भारतीयों को जोखिम भरे इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।
नेपाली सेना का जताया आभार
वतन लौटे नागरिकों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि किस तरह बाढ़ के पानी ने अचानक तबाही मचाई और उन्हें अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। यात्रियों ने नेपाली सेना के अदम्य साहस और त्वरित सहायता के लिए उनका दिल से शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में पहुंचकर उन्हें नई जिंदगी दी।
एस जयशंकर ने जानकारी दी कि उन्होंने सुबह ही नेपाल के विदेश मंत्री से बात करके हर संभव मदद की पेशकश की है। नेपाल सरकार अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार इस सहायता को स्वीकार कर रही है, जबकि भारत की पहली प्राथमिकता अपने हर नागरिक को सुरक्षित घर वापस लाना है।

