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NRI के लिए नया टैक्स अलर्ट! घर-फ्लैट बेचते ही लगेगा TDS, जानिए कैसे बचें

NRI के लिए नया टैक्स अलर्ट! घर-फ्लैट बेचते ही लगेगा TDS, जानिए कैसे बचें

Newstrack 1 week ago

NRI Property Sale Tax Alert India: भारत में घर, फ्लैट, प्लॉट या अन्य संपत्ति बेचने वाले एनआरआई (Non-Resident Indians) के लिए टैक्स नियम अब पहले से ज्यादा अहम हो गए हैं। कई बार जानकारी की कमी के कारण लोग जरूरत से ज्यादा टैक्स भर देते हैं या उनकी बिक्री की रकम लंबे समय तक अटक जाती है।

खासतौर पर TDS, कैपिटल गेन टैक्स, ITR फाइलिंग और छूट के नियम समझना जरूरी है। अगर कोई एनआरआई भारत में प्रॉपर्टी बेचने की योजना बना रहा है, तो पहले पूरी जानकारी लेना बेहद जरूरी है।

भारत में NRI के लिए प्रॉपर्टी बेचने पर क्यों बढ़ी चिंता

भारत में बड़ी संख्या में एनआरआई ने घर, जमीन, फ्लैट और कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश किया हुआ है। अब कई लोग इन संपत्तियों को बेचकर पैसा विदेश भेजना चाहते हैं या दोबारा निवेश करना चाहते हैं। लेकिन यहां सबसे बड़ा फर्क यह है कि भारतीय निवासी और एनआरआई के लिए टैक्स नियम अलग-अलग हैं। यही वजह है कि कई बार एनआरआई को सामान्य व्यक्ति की तुलना में ज्यादा टैक्स कटौती का सामना करना पड़ता है।

सबसे पहले समझिए कैपिटल गेन क्या होता है

जब कोई व्यक्ति किसी प्रॉपर्टी को खरीदकर बाद में ज्यादा कीमत पर बेचता है, तो खरीद और बिक्री मूल्य के बीच जो लाभ होता है, उसे कैपिटल गेन कहा जाता है। इसी लाभ पर सरकार टैक्स लगाती है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी ने 50 लाख रुपये में फ्लैट खरीदा और 80 लाख रुपये में बेच दिया, तो सामान्य रूप से 30 लाख रुपये का लाभ माना जाएगा। इसी पर टैक्स तय होगा।

कितने समय तक रखने पर कौन सा टैक्स लगेगा

प्रॉपर्टी कितने समय तक अपने पास रखी गई, यह बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर संपत्ति 24 महीने से ज्यादा समय तक रखी गई है, तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट माना जाता है और उस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। वहीं अगर 24 महीने से पहले बेच दिया गया, तो यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और टैक्स दर अलग हो सकती है।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर कितना टैक्स देना होगा

अगर कोई प्रॉपर्टी लंबे समय तक रखने के बाद बेची जाती है, तो उस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। हालिया नियमों के अनुसार कुछ मामलों में 12.5 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है, जबकि पुराने मामलों में 20 फीसदी टैक्स के साथ इंडेक्सेशन लाभ मिल सकता है। किस मामले में कौन सा नियम लागू होगा, यह प्रॉपर्टी खरीदने की तारीख और अन्य शर्तों पर निर्भर करता है।

इंडेक्सेशन क्या होता है और क्यों जरूरी है

इंडेक्सेशन एक ऐसा लाभ है जिसमें महंगाई को ध्यान में रखकर प्रॉपर्टी की खरीद कीमत बढ़ाकर मानी जाती है। इससे टैक्स योग्य लाभ कम हो जाता है और टैक्स कम देना पड़ता है। खासतौर पर पुरानी प्रॉपर्टी बेचने वालों के लिए यह काफी फायदेमंद माना जाता है। हालांकि नए नियमों के कारण कई मामलों में यह लाभ सीमित हो गया है।

NRI के लिए सबसे बड़ा झटका भारी TDS

एनआरआई के लिए सबसे बड़ी परेशानी वास्तविक टैक्स नहीं बल्कि TDS कटौती होती है। जब कोई भारतीय निवासी व्यक्ति NRI से प्रॉपर्टी खरीदता है, तो भुगतान से पहले टैक्स काटना जरूरी होता है। यह नियम आयकर अधिनियम की धारा 195 के तहत लागू होता है। कई मामलों में यह कटौती 20 फीसदी से 30 फीसदी तक पहुंच सकती है।

कितना TDS कट सकता है

अगर प्रॉपर्टी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में आती है, तो करीब 20 फीसदी या उससे ज्यादा TDS कट सकता है। वहीं शॉर्ट टर्म मामलों में टैक्स स्लैब के हिसाब से 30 फीसदी तक कटौती संभव है। इसके ऊपर surcharge और cess भी जुड़ सकता है, जिससे कुल राशि और बढ़ जाती है।

उदाहरण से समझिए नुकसान कैसे होता है

अगर किसी NRI ने भारत में 1 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी बेची है, तो खरीदार बड़ी राशि TDS के रूप में काट सकता है। कई बार वास्तविक लाभ कम होता है, लेकिन TDS ज्यादा कट जाता है। ऐसे में एनआरआई की बड़ी रकम लंबे समय तक फंस जाती है और बाद में रिफंड के लिए ITR फाइल करना पड़ता है।

खरीदार की क्या जिम्मेदारी होती है

अगर कोई व्यक्ति NRI से प्रॉपर्टी खरीद रहा है, तो उसे भी नियमों का पालन करना जरूरी है। खरीदार को सही दर से TDS काटना, सरकार के खाते में जमा करना, जरूरी रिटर्न भरना और प्रमाण पत्र जारी करना होता है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो उस पर ब्याज, जुर्माना और नोटिस आ सकता है।

क्या TDS कम कराया जा सकता है

कई मामलों में NRI TDS कम कराने के लिए आवेदन कर सकता है। अगर वास्तविक टैक्स देनदारी कम बनती है, तो आयकर विभाग से Lower Deduction Certificate लिया जा सकता है। इसके बाद खरीदार कम TDS काट सकता है और बड़ी रकम फंसने से बच जाती है।

ITR फाइल करना क्यों जरूरी है

कई लोग सोचते हैं कि TDS कट गया तो काम खत्म हो गया, लेकिन ऐसा नहीं है। प्रॉपर्टी बेचने के बाद आयकर रिटर्न भरना जरूरी होता है। इसमें वास्तविक कैपिटल गेन दिखाया जाता है, टैक्स की गणना होती है और अगर ज्यादा TDS कटा है तो रिफंड भी क्लेम किया जा सकता है।

टैक्स बचाने के कानूनी तरीके

सरकार कुछ धाराओं के तहत टैक्स राहत भी देती है। धारा 54 के तहत पुराना घर बेचकर नया घर खरीदने पर राहत मिल सकती है। धारा 54F में कुछ अन्य संपत्तियों पर छूट मिल सकती है। वहीं धारा 54EC के तहत तय बॉन्ड्स में निवेश करके भी टैक्स बचाया जा सकता है।

विदेश पैसा भेजने के नियम भी समझें

अगर एनआरआई प्रॉपर्टी बेचने के बाद पैसा विदेश भेजना चाहता है, तो इसके लिए बैंकिंग और FEMA नियम लागू होते हैं। टैक्स क्लियरेंस, CA Certificate, Form 15CA और 15CB जैसे दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए बिक्री से पहले बैंक और टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।

किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है

प्रॉपर्टी बेचने से पहले एनआरआई को पैन कार्ड, पासपोर्ट, खरीद डीड, बिक्री समझौता, बैंक डिटेल, टैक्स रिकॉर्ड और जरूरत पड़ने पर पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। सही कागज होने पर प्रक्रिया आसान हो जाती है।

आम गलतियां जो भारी पड़ सकती हैं

कई एनआरआई बिना टैक्स सलाह लिए प्रॉपर्टी बेच देते हैं। कुछ लोग खरीद मूल्य के दस्तावेज नहीं रखते, कुछ ITR फाइल नहीं करते और कुछ लोग TDS नियम समझे बिना सौदा कर लेते हैं। बाद में यही गलतियां टैक्स नोटिस, जुर्माना और रकम फंसने का कारण बनती हैं।

प्रॉपर्टी बेचने से पहले क्या करें

अगर आप NRI हैं और भारत में संपत्ति बेचना चाहते हैं, तो पहले कैपिटल गेन की गणना करवाएं, TDS कितना कटेगा यह जानें, जरूरत हो तो लोअर TDS सर्टिफिकेट लें, सभी दस्तावेज तैयार रखें और विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। इससे नुकसान से बचा जा सकता है।

क्या अब NRI के लिए प्रॉपर्टी बेचना महंगा हो गया है

विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स नियम पहले की तुलना में ज्यादा जटिल हो गए हैं। इंडेक्सेशन लाभ में बदलाव और भारी TDS कटौती के कारण नकदी प्रवाह प्रभावित होता है। यानी अंतिम टैक्स कम भी निकले, तब भी बिक्री के समय बड़ी रकम कट सकती है। भारत में प्रॉपर्टी बेचने वाले एनआरआई के लिए अब सिर्फ खरीदार ढूंढना काफी नहीं है। टैक्स नियम, TDS, कैपिटल गेन, ITR फाइलिंग और पैसा विदेश भेजने की प्रक्रिया समझना उतना ही जरूरी है। सही योजना के साथ सौदा किया जाए तो टैक्स बोझ कम किया जा सकता है, लेकिन बिना तैयारी के 20 से 30 फीसदी तक TDS कट सकता है। इसलिए प्रॉपर्टी बेचने से पहले पूरी टैक्स प्लानिंग जरूर करें।

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