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पंजाब में BJP का बड़ा सियासी खेल! अमृतपाल सिंह से सीधी टक्कर की तैयारी...अकाली दल की बढ़ी धड़कनें

पंजाब में BJP का बड़ा सियासी खेल! अमृतपाल सिंह से सीधी टक्कर की तैयारी...अकाली दल की बढ़ी धड़कनें

Newstrack 1 week ago

BJP Plan Election Strategy 2027: पंजाब में अगले साल की शुरुआत में ही होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राज्य का सियासी तापमान अचानक बेहद गरम हो गया है। वर्षों से सत्ता में वापसी की राह देख रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सूबे के ग्रामीण इलाकों में अपनी सीधी पैठ बनाने के लिए एक अत्यंत आक्रामक और चौंकाने वाली रणनीति तैयार कर ली है।

पार्टी ने इस बार निर्दलीय सांसद और वारिस पंजाब दे संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह के गृह क्षेत्र से ही अपने चुनावी अभियान का दायरा बढ़ाने का मन बनाया है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने अपने सहयोगी दल शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) को ग्रामीण क्षेत्रों में अपने चुनाव प्रचार की रफ्तार धीमी करने का स्पष्ट संकेत दिया है, ताकि वह खुद सीधे तौर पर किसानों और ग्रामीणों के बीच अपना जनाधार खड़ा कर सके।

शहरी छवि से बाहर निकलने का प्लान

पारंपरिक रूप से पंजाब के केवल शहरी इलाकों तक सीमित मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिए यह नया दांव सूबे की राजनीति में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी मोड़ साबित हो सकता है। बीजेपी ग्रामीण मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों को ढाल बनाने जा रही है।

पार्टी राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर बड़े पैमाने पर नशा विरोधी यात्राएं निकालने की योजना बना रही है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा देश भर के किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और दी जा रही सीधी आर्थिक सहायता को भी ग्रामीण जनता के बीच जोर-शोर से पहुंचाया जाएगा, जिससे किसान वर्ग को पार्टी के साथ जोड़ा जा सके।

अमृतपाल सिंह की सबसे बड़ी चुनौती

बीजेपी के इस नए और आक्रामक सियासी अभियान के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह को माना जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जेल में निरुद्ध अमृतपाल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में खडूर साहिब सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरकर एक बहुत बड़ी और एकतरफा जीत दर्ज की थी।

अमृतपाल भी लगातार नशा मुक्ति, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और सिख पहचान जैसे संवेदनशील मुद्दों को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाते रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के युवा वोटरों को आकर्षित करने के लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं और अमृतपाल समर्थकों के बीच सीधा और बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

अकाली दल पर मंडराया राजनीतिक संकट

इस पूरे बदलते राजनीतिक घटनाक्रम से शिरोमणि अकाली दल के सामने अस्तित्व का सबसे बड़ा संकट खड़ा होता दिख रहा है। यदि बीजेपी पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में अपना अलग और मजबूत वोट बैंक स्थापित करने में पूरी तरह कामयाब हो जाती है, और दूसरी तरफ अमृतपाल सिंह का गुट सिख वोटरों का ध्रुवीकरण करने में सफल रहता है, तो अकाली दल का वर्षों पुराना पारंपरिक वोट बैंक दोनों तरफ से बुरी तरह बिखर सकता है।

पंजाब के इस नए सियासी संग्राम ने सभी राजनीतिक दलों के होश उड़ा दिए हैं, और आने वाले दिनों में राज्य के भीतर वोटरों को लुभाने की यह जंग और भी ज्यादा नाटकीय होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

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