
Hapur News : मौसम में बदलाव के बीच आसपास के जिलों में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद हापुड़ स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में निगरानी बढ़ाने के साथ सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को बुखार, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों वाले मरीजों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन बीमारी के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। समय पर चिकित्सकीय सलाह मिलने से मरीज की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है और आवश्यकता के अनुसार उपचार शुरू किया जा सकता है।
बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी तो रहें सावधान
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, ठंड लगना और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। ऐसे लक्षणों को सामान्य मौसमी बीमारी मानकर लंबे समय तक घर पर इलाज करते रहना उचित नहीं है।विशेष रूप से तेज बुखार के साथ सांस लेने में दिक्कत महसूस होने पर मरीज को जल्द चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से कहा है कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें।
अस्पतालों को संदिग्ध मरीजों पर नजर रखने के निर्देश
आसपास के जिलों में संक्रमण के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्यकर्मियों से कहा गया है कि सांस संबंधी लक्षणों और बुखार-खांसी की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाए।
जरूरत पड़ने पर मरीज को चिकित्सकीय जांच और आगे की सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि संभावित संक्रमण की पहचान समय रहते हो और गंभीर लक्षण वाले मरीजों को उपचार में देरी न हो।
खांसते-छींकते समय मुंह और नाक ढकें
स्वाइन फ्लू समेत श्वसन संबंधी संक्रमण से बचाव में व्यक्तिगत स्वच्छता को महत्वपूर्ण बताया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से खांसते और छींकते समय रूमाल या टिश्यू से मुंह और नाक ढकने की अपील की है।इसके अलावा हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोने, बिना हाथ साफ किए आंख, नाक और मुंह को छूने से बचने तथा बीमार व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचने को भी कहा गया है।
खुद से एंटीबायोटिक लेना पड़ सकता है भारी
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन नहीं करने की सलाह दी है। बुखार या खांसी होने पर हर बार एक जैसी बीमारी नहीं होती, इसलिए दवा लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लक्षणों के आधार पर डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन कर आवश्यक सलाह दे सकते हैं। इसलिए इंटरनेट या आसपास के लोगों की सलाह के आधार पर खुद इलाज करने से बचना चाहिए।
लापरवाही पड़ सकती है भारी
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्वाइन फ्लू को लेकर अनावश्यक डर फैलाने की जरूरत नहीं है। हालांकि, इसके संभावित लक्षणों को हल्के में लेना भी ठीक नहीं है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों में किसी भी गंभीर लक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।स्वास्थ्य विभाग की अपील है कि लोग साफ-सफाई का ध्यान रखें, भीड़भाड़ से बचें और बीमारी के लक्षण सामने आने पर समय से चिकित्सकीय सलाह लें। सावधानी और समय पर चिकित्सकीय देखभाल संक्रमण से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
बोले मुख्य चिकित्सा अधिकारी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. किशोर कुमार आहुजा ने बताया कि स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को आवश्यक सावधानियां बरतने तथा संदिग्ध मरीजों की समय से पहचान के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन बचाव के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।

