Raeabareli News: बच्ची की हालत गंभीर होने पर उसे लखनऊ के अपोलो अस्पताल रेफर किया गया, जहां वह वेंटिलेटर पर भर्ती है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल और चिकित्सक पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वहीं अस्पताल पक्ष ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि मामले में चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
परिजनों का आरोप है कि बच्ची को टॉन्सिल की सामान्य सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के बाद उसे तेज दर्द होने लगा, जिस पर एक इंजेक्शन लगाया गया, लेकिन राहत नहीं मिली। उनका कहना है कि बाद में डॉक्टर के फोन पर दिए गए निर्देश के अनुसार दूसरा इंजेक्शन लगाया गया, जिसके तुरंत बाद बच्ची बेहोश हो गई और फिर उसे होश नहीं आया। गंभीर स्थिति को देखते हुए अस्पताल की टीम ने उसे तत्काल लखनऊ के अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया।
परिजनों का यह भी आरोप है कि अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान पूर्व में दी गई दवाओं और इंजेक्शनों की जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे उपचार में कठिनाई हुई। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, सभी मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं डॉ. अमित के सहयोगियों का कहना है कि मरीज के उपचार से जुड़ी प्रत्येक दवा, इंजेक्शन और चिकित्सकीय प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड अस्पताल में सुरक्षित रखा जाता है। उनका कहना है कि मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर होने पर परिजनों की सहमति से उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया था। उन्होंने लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की अफवाह या एकतरफा निष्कर्ष से बचें। इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

