INS Malvan: आज का दिन भारतीय नौसेना और हर देशवासी के लिए गर्व से भर देने वाला है। समंदर की लहरों पर अब भारत का एक ऐसा योद्धा राज करेगा, जिससे टकराने की हिम्मत कोई भी दुश्मन पनडुब्बी नहीं कर पाएगी।
31 मार्च, 2026 की तारीख भारतीय रक्षा इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई है, क्योंकि इसी दिन 'मालवन' नामक शक्तिशाली युद्धपोत को आधिकारिक तौर पर नौसेना को सौंप दिया गया है। यह केवल एक जहाज नहीं है, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प का वो जीता-जागता उदाहरण है, जो अब पानी के भीतर छिपे गद्दारों और खतरों का नामो-निशान मिटा देगा। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों 'मालवन' के आने से हिंद महासागर में भारत की तूती बोलने वाली है।
शिवाजी महाराज की विरासत और 'मालवन' का गौरवशाली इतिहास
इस युद्धपोत का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर 'मालवन' के नाम पर रखा गया है। यह वही जगह है जिसका संबंध छत्रपति शिवाजी महाराज की महान समुद्री शक्ति और उनकी दूरदर्शी सोच से है। शिवाजी महाराज ने सदियों पहले समझ लिया था कि भारत की सुरक्षा का रास्ता समंदर से होकर गुजरता है, और आज 'मालवन' उसी गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय नौसेना में पहले भी 'आईएनएस मालवन' नाम का एक जहाज हुआ करता था, जिसने 2003 तक देश की सेवा की थी। अब उसी नाम और जोश के साथ यह नया शिकारी समंदर में उतर चुका है।
कोच्चि में तैयार हुआ स्वदेशी शिकारी
'मालवन' को कोच्चि स्थित 'कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड' (CSL) ने बेहद आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया है। यह 'एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट' (ASW SWC) सीरीज का दूसरा जहाज है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें 80 प्रतिशत से भी अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। लगभग 80 मीटर लंबा और 1,100 टन वजनी यह जहाज 'वाटरजेट प्रोपल्शन' प्रणाली से लैस है, जो इसे पानी में चीते जैसी रफ्तार और सटीकता प्रदान करती है। इसमें लगे रडार और सोनार सिस्टम इतने एडवांस हैं कि पानी के सैकड़ों फीट नीचे छिपी दुश्मन की पनडुब्बी भी इसकी नजरों से बच नहीं पाएगी।
टॉरपीडो और रॉकेट से लैस
हथियारों के मामले में 'मालवन' किसी से पीछे नहीं है। यह घातक टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट और आधुनिक रडार से पूरी तरह लैस है। इसका मुख्य काम तटीय इलाकों में छिपे खतरों को ढूंढकर उन्हें वहीं खत्म करना है। चाहे पानी के नीचे निगरानी करनी हो या खदानों (माइन वॉरफेयर) का पता लगाना हो, 'मालवन' हर मिशन में माहिर है। इसके शामिल होने से भारत की तटीय सुरक्षा अभेद्य हो गई है।
मेक इन इंडिया का धमाका
स्वदेशी ताकत का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकता। एक तरफ जहां 'मालवन' समंदर की रक्षा करेगा, वहीं दूसरी ओर आसमान की सुरक्षा के लिए रक्षा मंत्रालय ने 'भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड' (BEL) के साथ 1,950 करोड़ रुपये का एक बड़ा करार किया है। इसके तहत भारतीय वायुसेना के लिए दो शक्तिशाली माउंटेन रडार खरीदे जाएंगे, जो पहाड़ी इलाकों में दुश्मन की हर हरकत पर पैनी नजर रखेंगे। यह साफ संदेश है कि भारत अब रक्षा के क्षेत्र में किसी और पर निर्भर नहीं रहने वाला है।

