Sonbhadra News: वर्षों से भूमि विवादों के नाम पर कागजों में निस्तारित दिखाए गए मामलों की अब परत-दर-परत जांच होगी। शासन ने प्रदेशभर में एक माह का विशेष अभियान शुरू करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब सिर्फ फाइल बंद करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना होगा।
इसी क्रम में 1 जून से 30 जून तक विशेष अभियान चलाकर पूर्व में निस्तारित किए गए भूमि विवादों का दोबारा सत्यापन कराया जाएगा।इस संबंध में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर अभियान की रूपरेखा तय की तथा कड़े निर्देश जारी किए।
जिलाधिकारी ने बताया कि शासन स्तर पर 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच जनसुनवाई पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का व्यापक विश्लेषण किया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अनेक मामलों में शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहा। कई प्रकरणों को "स्पेशल क्लोज" श्रेणी में डालकर बंद कर दिया गया, जबकि मौके पर विवाद जस का तस बना रहा।कुछ मामलों में अधूरी अथवा भ्रामक रिपोर्ट लगाकर समाधान दिखा दिया गया। अब ऐसे सभी मामलों की तहसील, जिला और मंडल स्तर पर पुनः समीक्षा की जाएगी ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और पीड़ित पक्षों को न्याय मिल सके।
भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों पर रहेगा विशेष फोकस
विशेष अभियान के दौरान भू-माफियाओं द्वारा किए गए अवैध कब्जे, सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण, चकबंदी विवाद, राजस्व एवं पुलिस विभाग से जुड़े भूमि प्रकरण तथा अन्य भूमि विवादों को प्राथमिकता से लिया जाएगा।जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कमजोर वर्गों की भूमि पर कब्जा करने वालों और भू-माफियाओं के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही या संरक्षण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।जिलाधिकारी ने कहा कि अब केवल कार्यालयी रिपोर्ट के आधार पर किसी मामले को निस्तारित नहीं माना जाएगा। प्रत्येक शिकायत का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जाएगा और तथ्यपरक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
अभियान के तहत मामलों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा-
वास्तविक रूप से निस्तारित मामले,
निस्तारित लेकिन फील्ड सत्यापन योग्य मामले,
अनिस्तारित मामले,
तथा ऐसे मामले जो भूमि विवाद की श्रेणी में नहीं आते।
न्यायालयों में लंबित मामलों की भी होगी अलग समीक्षा
शासन द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत ग्राम स्तरीय विवादों से लेकर राजस्व, सिविल, चकबंदी और उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों की अलग-अलग समीक्षा की जाएगी।न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के लिए वाद संख्या, सीएनआर नंबर और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा। अंतिम न्यायिक आदेश प्राप्त होने के बाद ही शिकायत को पूर्ण रूप से निस्तारित माना जाएगा।भूमि विवादों को जड़ से खत्म करने के लिए प्रत्येक तहसील में न्याय पंचायतवार ग्राम चौपाल आयोजित की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जाए ताकि लोगों को बार-बार तहसील और अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें।
गलत रिपोर्ट पर कार्रवाई, बेहतर काम पर सम्मान
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कहा कि अभियान की नियमित समीक्षा मंडलायुक्त स्तर से की जाएगी। यदि किसी अधिकारी द्वारा गलत निस्तारण, भ्रामक रिपोर्ट या लापरवाही पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं उत्कृष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जाएगा।उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल शिकायतों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि भूमि विवादों का वास्तविक, निष्पक्ष और स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। अभियान की सफलता तभी मानी जाएगी जब आमजन को न्याय मिले और वर्षों से लंबित विवादों का प्रभावी निस्तारण धरातल पर दिखाई दे।

