Sonbhadra News: भीषण गर्मी के बीच प्रदेश की बिजली व्यवस्था संभाल रहे संविदा कर्मियों की लगातार हो रही मौतों को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने गंभीर चिंता जताई है। समिति ने आरोप लगाया है कि निजीकरण, डाउनसाइजिंग और वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी की जा रही है, जिससे बिजली व्यवस्था पर संकट गहराने के साथ-साथ कर्मचारियों की जान भी खतरे में पड़ रही है।
शक्ति भवन में सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने पिछले एक माह के दौरान ड्यूटी करते हुए जान गंवाने वाले संविदा कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान समिति ने कहा कि प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या घटाए जाने से बचे हुए कर्मियों पर काम का असहनीय दबाव पड़ रहा है। यही वजह है कि दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और संविदा कर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि निजीकरण की नीति लागू करने के लिए पावर कॉरपोरेशन लगातार कर्मचारियों की संख्या कम कर रहा है। पहले जहां एक उपकेंद्र पर 36 संविदा कर्मी तैनात रहते थे, वहीं डाउनसाइजिंग के बाद यह संख्या घटाकर 18.5 कर दी गई। इसके बाद वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू होने पर कई स्थानों पर यह संख्या घटकर मात्र 7.5 रह गई है। नए टेंडरों में भी संविदा कर्मियों की संख्या में 45 प्रतिशत से अधिक कटौती की गई है।समिति का आरोप है कि कर्मचारियों की कमी के कारण अब प्रशिक्षित और कुशल कर्मियों के स्थान पर अकुशल कर्मचारियों से जोखिम भरे कार्य कराए जा रहे हैं। बेहद कम वेतन पाने वाले संविदा कर्मियों को सुरक्षा संसाधनों के अभाव में कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है, जिससे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
संघर्ष समिति के अनुसार 22 अप्रैल से 28 मई 2026 के बीच कार्य के दौरान लगभग 22 संविदा कर्मियों की मौत हुई है। इनमें करीब 70 प्रतिशत कर्मचारी अकुशल श्रेणी के थे। समिति ने इसे बिजली विभाग में घटती मानव संसाधन क्षमता और प्रबंधन की नीतियों का सीधा परिणाम बताया है।समिति ने पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन पर संविदा कर्मियों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय कर्मचारियों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। इससे न केवल कर्मियों का मनोबल टूट रहा है बल्कि प्रदेश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित होने का खतरा बढ़ रहा है।
संघर्ष समिति ने मांग की है कि डाउनसाइजिंग और वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए, रोजगार से वंचित किए गए कर्मियों को पुनः नियुक्त किया जाए तथा बिजली कर्मियों के खिलाफ चल रही सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए। समिति का कहना है कि पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की उपलब्धता ही प्रदेश में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर सकती है।समिति ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और छंटनी की प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो बिजली व्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि संविदा कर्मियों की सुरक्षा, सम्मान और रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था मजबूत बनी रहे।

